Political News: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली के बाद रामलीला मैदान में कराए गए कथित शुद्धिकरण हवन को लेकर सियासत गरमा गई है। 8 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई कांग्रेस नेताओं ने रामलीला मैदान में जनसभा की थी। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास नाम के संगठन ने वहां हवन किया और गंगाजल का छिड़काव किया। अब कांग्रेस ने इसे लेकर सवाल उठाए हैं और मामला राज्यसभा तक पहुंच गया है।
8 अगस्त को रामलीला मैदान में हुई थी कांग्रेस की बड़ी रैली
कांग्रेस ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में विजय शंखनाद रैली का आयोजन किया था। इसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। रैली में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचे थे।
रैली के दिन एसएसपी ऑफिस के बाहर भी हुआ था हंगामा
कांग्रेस की रैली के दौरान हल्द्वानी में पुलिस चेकिंग को लेकर भी विवाद हुआ था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप था कि रैली में शामिल होने आ रहे कार्यकर्ताओं के वाहनों को अलग-अलग जगहों पर चेकिंग के नाम पर रोका जा रहा था। इसके विरोध में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एसएसपी कार्यालय पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।
एसएसपी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक बयान का वीडियो वायरल
इस दौरान कांग्रेस नेताओं की ओर से एसएसपी के लिए कथित तौर पर अपशब्द कहे जाने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वहीं, भाजपा की ओर से कांग्रेस की रैली को लेकर एक और आरोप लगाया गया। भाजपा नेताओं ने दावा किया कि खड़गे की रैली के दौरान मुस्लिम धर्म के समर्थन में नारे लगाए गए थे। इन आरोपों को लेकर भी उस समय राजनीतिक विवाद देखने को मिला।
रैली के दो दिन बाद रामलीला मैदान में कराया गया हवन
कांग्रेस की रैली के दो दिन बाद 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के कार्यकर्ता रामलीला मैदान पहुंचे। संगठन की ओर से वहां हवन किया गया और पूरे मैदान में गंगाजल का छिड़काव किया गया। संगठन का कहना था कि रामलीला मैदान सनातन से जुड़े कार्यक्रमों का स्थल रहा है और कांग्रेस की रैली के बाद इसकी पवित्रता को कथित तौर पर खंडित किया गया।
जहाँ से मल्लिकार्जुन खड़गे ने भाषण दिया उस जगह को किया गया शुद्ध।
8 अगस्त को उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली रामलीला मैदान में हुई।
हिंदू वादी संगठन ने रैली के बाद इस स्थान को शुद्ध करने के लिए मंत्रोचारण और पूजा की।
कहा इस… pic.twitter.com/s6aXBVATc7
— Robin Singh Chauhan (@robinsinghchauh) August 12, 2026
खड़गे के पुराने बयानों को बनाया गया आधार
संगठन की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे के पिछले कथित सनातन विरोधी बयानों को भी हवन और गंगाजल छिड़कने के फैसले का आधार बताया गया। हालांकि, इसी हवन के बाद राजनीतिक विवाद और ज्यादा बढ़ गया। कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को जातिगत भेदभाव और दलित नेता के अपमान से जोड़कर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने लगाया दलित नेता के कारण शुद्धिकरण कराने का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि रामलीला मैदान में शुद्धिकरण हवन इसलिए कराया गया क्योंकि वहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य जैसे नेता मौजूद थे, जिनमें खड़गे और यशपाल आर्य दलित समुदाय से आते हैं। कांग्रेस ने इस घटना को सामाजिक बराबरी और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
खड़गे ने राज्यसभा में उठाया हल्द्वानी का मुद्दा
अब यह मामला गुरुवार को राज्यसभा में भी उठा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में हल्द्वानी की घटना का जिक्र करते हुए सवाल किया कि क्या लोकतंत्र में किसी विपक्षी नेता की सभा के बाद मंच या मैदान को शुद्ध करने के लिए हवन कराया जाना उचित है।
खड़गे बोले- मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया
राज्यसभा में खड़गे ने कहा कि वह हल्द्वानी के रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। उनके मुताबिक भाषण के दौरान उन्होंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, बल्कि सरकार से जुड़े मुद्दों को ही उठाया था। खड़गे ने आरोप लगाया कि उनके भाषण के बाद भाजपा से जुड़े लोगों ने मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए हवन किया।
खड़गे ने संविधान की रक्षा पर उठाया सवाल
मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र में इस तरह की घटनाएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह विपक्ष के नेता हैं और संविधान की रक्षा को लेकर सवाल उठाना उनका अधिकार है। खड़गे ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते, क्योंकि वह लंबे समय से राज्यसभा के सदस्य रहे हैं।
बोले- मैं अनुसूचित जाति से आता हूं और दलित हूं
खड़गे ने अपने संबोधन में अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह अनुसूचित जाति से आते हैं और दलित हैं। उनका कहना था कि उन्होंने कभी किसी से मदद या सुरक्षा की गुहार नहीं लगाई। हल्द्वानी की घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों से जोड़कर सवाल उठाया।
जेपी नड्डा ने घटना को बताया दुखद
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस घटना को दुखद बताया और मामले की जांच का आश्वासन दिया। राज्यसभा में खड़गे की ओर से मुद्दा उठाए जाने के बाद अब इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है।
यशपाल आर्य ने भी उठाए लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल
उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भी रामलीला मैदान में कथित शुद्धिकरण हवन को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक सभा के बाद इस तरह का कार्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मर्यादाओं को लेकर चिंता पैदा करता है।
उत्तराखंड की सामाजिक एकता का दिया हवाला
यशपाल आर्य ने कहा कि उत्तराखंड सामाजिक समरसता, भाईचारे और लोकतांत्रिक चेतना की भूमि रही है। उनके मुताबिक हल्द्वानी जैसे शहर में इस तरह की घटना सामने आना प्रदेश की सामाजिक एकता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने भाजपा नेताओं से समाज को जोड़ने और जाति तथा ऊंच-नीच की दीवारें खड़ी न करने की अपील की।
खड़गे के सार्वजनिक जीवन का भी किया जिक्र
यशपाल आर्य ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे केवल कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं हैं, बल्कि देश के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि खड़गे का सार्वजनिक जीवन संविधान, लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष से जुड़ा रहा है।
शुद्धिकरण को सामाजिक बराबरी के खिलाफ बताया
यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि खड़गे की जनसभा के बाद मैदान का कथित शुद्धिकरण सामाजिक बराबरी की उस भावना का अपमान है, जिसके लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर समेत कई महापुरुषों ने संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि किसी सार्वजनिक स्थान की पवित्रता किसी व्यक्ति की जाति, वर्ग या राजनीतिक विचारधारा से तय नहीं होनी चाहिए।
सार्वजनिक मैदान सभी के लिए होते हैं- यशपाल आर्य
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सार्वजनिक मैदान जनता के होते हैं। अलग-अलग राजनीतिक दलों की सभाएं ऐसे स्थानों पर होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है। उनके मुताबिक किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद मैदान को ‘शुद्ध’ करने की कोशिश समाज में छुआछूत और ऊंच-नीच जैसी पुरानी कुरीतियों को बढ़ावा देने वाली मानसिकता को दिखाती है।
संविधान की समानता की भावना का दिया हवाला
यशपाल आर्य ने कहा कि भारतीय संविधान हर नागरिक को समानता, सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। संविधान की मूल भावना सामाजिक भेदभाव को खत्म करके सभी नागरिकों को बराबरी का अधिकार देना है। ऐसे में इस तरह के प्रतीकात्मक कृत्य समाज में गलत संदेश दे सकते हैं और सामाजिक सद्भाव को कमजोर कर सकते हैं।
भाजपा से पूछा- क्या इस मानसिकता का समर्थन करती है पार्टी?
यशपाल आर्य ने भाजपा से सीधा सवाल किया कि यदि किसी सार्वजनिक मैदान में किसी दलित नेता की सभा के बाद उसे शुद्ध करने की आवश्यकता महसूस की जाती है, तो क्या भाजपा नेतृत्व इस मानसिकता का समर्थन करता है? उन्होंने कहा कि अगर भाजपा इसका समर्थन नहीं करती है तो उसे घटना पर अपना स्पष्ट पक्ष जनता के सामने रखना चाहिए।
विचारधारा का मुकाबला विचारधारा से होना चाहिए
यशपाल आर्य ने कहा कि राजनीतिक विचारधारा का मुकाबला विचारधारा से होना चाहिए, किसी व्यक्ति की सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर उसके प्रति अपमानजनक व्यवहार से नहीं। लोकतंत्र में किसी व्यक्ति की जाति के बजाय उसके विचार, कर्म और संवैधानिक अधिकार महत्वपूर्ण होने चाहिए।
हल्द्वानी हवन विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली के बाद हुए कथित शुद्धिकरण हवन ने अब स्थानीय विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस में बदल दिया है। एक तरफ संगठन इसे मैदान की धार्मिक पवित्रता से जोड़कर देख रहा है, वहीं कांग्रेस इसे सामाजिक भेदभाव और संवैधानिक मूल्यों का मामला बता रही है। राज्यसभा में मामला उठने और जांच के आश्वासन के बाद अब सभी की नजर इस विवाद पर आगे होने वाली कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर है।