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Arakshan Hatao Andolan: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने खदेड़ा! हिरासत में लिया तो बस पर चढ़े..

Arakshan Hatao Andolan: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने खदेड़ा! हिरासत में लिया तो बस पर चढ़े..

Arakshan Hatao Andolan: जंतर-मंतर पर शुक्रवार को आरक्षण को लेकर खूब हलचल रही। सुबह से बड़ी संख्या में लोग यहां जुटे और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे आरक्षण को पूरी तरह खत्म करने की मांग नहीं कर रहे, बल्कि चाहते हैं कि व्यवस्था की समीक्षा हो और इसका फायदा उन लोगों तक भी पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। दिनभर नारेबाजी और भाषणों के बाद शाम होते-होते मामला थोड़ा गर्म हो गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू किया तो कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया और पुलिस की बस को भी रोकने की कोशिश हुई।

सुबह से जंतर-मंतर पर जुटने लगे थे लोग

शुक्रवार सुबह से ही जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार की मांग को लेकर लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। हाथों में पोस्टर और बैनर लिए प्रदर्शनकारी अपनी बात रखने के लिए धरने पर बैठ गए।

प्रदर्शन में सिर्फ आरक्षण ही मुद्दा नहीं था। UGC के समानता मानदंड, आर्थिक आधार और SC/ST एक्ट के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर भी लोग अपनी बात रखते नजर आए।

Arakshan Hatao Andolan में बवाल! बस पर चढ़े प्रदर्शनकारी..

सबसे पहले समझिए- आखिर प्रदर्शनकारी चाहते क्या हैं?

इस पूरे आंदोलन को समझने के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि प्रदर्शनकारी खुद अपनी मांग को कैसे देखते हैं।

उनका कहना है कि आरक्षण खत्म करना उनका मकसद नहीं है। वे चाहते हैं कि मौजूदा व्यवस्था में समय के हिसाब से सुधार किया जाए।

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण का फायदा ऐसे लोगों तक पहुंचना चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। इसी वजह से वे आर्थिक स्थिति को भी आरक्षण के मानदंड में ज्यादा महत्व देने की मांग कर रहे हैं।

प्रतीक पांडे बोले- गरीब की मदद जाति देखकर क्यों?

प्रदर्शन में शामिल प्रतीक पांडे ने आर्थिक आधार को ज्यादा महत्व देने की बात कही।

उनका कहना था कि अगर कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजोर है तो उसे मदद मिलनी चाहिए, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो। यानी प्रदर्शनकारियों का जोर इस बात पर है कि जरूरतमंद व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को भी नीति बनाने में अहम जगह मिले।

यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी बहस भी है- क्या सामाजिक आधार के साथ आर्थिक स्थिति को भी ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए?

आयोजक हर्ष दुबे बोले- PM मोदी को ज्ञापन देकर जाएंगे

आंदोलन के प्रमुख आयोजक हर्ष दुबे भी प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना चाहते हैं।

हर्ष दुबे का कहना था कि प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने के बाद ही प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से हटेंगे।

यानी प्रदर्शनकारियों के लिए सिर्फ जंतर-मंतर पर बैठना ही मकसद नहीं था, बल्कि अपनी मांगों को सरकार तक औपचारिक तरीके से पहुंचाना भी इस आंदोलन का हिस्सा था।

UGC के नियमों को लेकर भी नाराजगी

प्रदर्शन के दौरान UGC के समानता मानदंडों को लेकर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर जरूरी है, लेकिन इसे लागू करने के लिए बनाए गए नियमों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए।

यानी आंदोलन का दायरा सिर्फ सरकारी नौकरियों या कॉलेज एडमिशन में आरक्षण तक सीमित नहीं था। शिक्षा व्यवस्था में समानता और उसके नियम भी प्रदर्शन का हिस्सा रहे।

SC/ST एक्ट को लेकर क्या कहा?

धरने में कुछ प्रदर्शनकारियों ने SC/ST एक्ट को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना था कि किसी भी कानून का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से ऐसी शिकायतों पर ध्यान देने और अगर कहीं कानून के दुरुपयोग की समस्या है तो उसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।

यहां प्रदर्शनकारियों का फोकस कानून खत्म करने की बजाय उसके सही इस्तेमाल और शिकायतों के समाधान पर होने की बात सामने आई।

दोपहर में अजीत भारती भी पहुंचे

दिन में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अजीत भारती भी प्रदर्शन के समर्थन में जंतर-मंतर पहुंचे। उनके आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस प्रदर्शन को लेकर चर्चा और तेज हो गई।

आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर पहले से सक्रिय कई लोग इस आंदोलन के समर्थन में पोस्ट कर रहे थे। ऐसे में जंतर-मंतर का प्रदर्शन धीरे-धीरे ऑनलाइन भी बड़ा मुद्दा बनता गया।

फिर शाम को बदल गया माहौल

सुबह से शांतिपूर्वक चल रहा धरना शाम होते-होते अलग मोड़ पर पहुंच गया।

पुलिस ने करीब 7 बजे प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू किया। पुलिस का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत जंतर-मंतर पर शाम 5 बजे के बाद प्रदर्शन जारी रखने की अनुमति नहीं थी।

दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी वहां से हटने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि जब तक प्रधानमंत्री को ज्ञापन नहीं सौंपा जाता, वे धरना खत्म नहीं करेंगे।

यहीं से पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी शुरू हो गई।

पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

धरना खत्म कराने के दौरान पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। उन्हें बस में बैठाकर वहां से ले जाया जाने लगा।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

जब पुलिस की बस मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-2 के पास पहुंची तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने बस को रोक लिया। कुछ लोग बस के ऊपर तक चढ़ गए और नारेबाजी करने लगे।

इस दौरान बस की छत पर तिरंगा भी लहराया गया।

जनपथ चौराहे पर भी बस रोकने की कोशिश

इसके बाद जनपथ चौराहे के पास भी प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बस को रोककर विरोध किया। मौके पर काफी देर तक हंगामे जैसा माहौल रहा।

हिरासत में लिए गए लोगों में ठाकुर मनीष सिंह का नाम भी सामने आया।

हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के बाद आखिरकार जंतर-मंतर पर चल रहा धरना खत्म हो गया।

प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी रही चर्चा

इस प्रदर्शन को लेकर एक और मुद्दा लगातार चर्चा में रहा- पुलिस की अनुमति।

दिल्ली पुलिस का कहना था कि जंतर-मंतर पर इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी। पुलिस ने रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर ही जुटे।

इसी वजह से शाम को पुलिस की कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन ने अपनी तरफ से कानून-व्यवस्था और निर्धारित समय सीमा का हवाला दिया।

आंदोलन को सिर्फ ‘आरक्षण खत्म करो’ कहना सही नहीं?

इस पूरे प्रदर्शन की एक अहम बात यह रही कि प्रदर्शनकारी बार-बार यह कहते रहे कि उनकी मांग आरक्षण खत्म करने की नहीं, बल्कि उसमें सुधार की है।

उनका कहना है कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिससे सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की जरूरतों पर भी ध्यान दिया जा सके।

यही वजह है कि इस आंदोलन को लेकर असली बहस सिर्फ ‘आरक्षण रहेगा या नहीं’ की नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा सवाल यह भी है कि आरक्षण का फायदा किसे, किस आधार पर और कितनी जरूरत के हिसाब से मिलना चाहिए?

जंतर-मंतर से खत्म हुआ धरना, लेकिन बहस अभी बाकी

शाम को पुलिस कार्रवाई के बाद धरना खत्म हो गया, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांगें वहीं खत्म नहीं हुईं।

आरक्षण भारत में लंबे समय से सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व का बड़ा मुद्दा रहा है। वहीं अब एक वर्ग इसमें आर्थिक स्थिति और समान अवसर जैसे पहलुओं को ज्यादा महत्व देने की मांग कर रहा है।

जंतर-मंतर पर शुक्रवार का प्रदर्शन इसी बदलती बहस की एक झलक रहा। अब देखना होगा कि प्रदर्शनकारियों की मांगों को सरकार और नीति बनाने वाले लोग किस तरह देखते हैं और क्या इस मुद्दे पर आगे कोई बड़ा संवाद शुरू होता है।