Sugar Price India: देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। शनिवार को उन्होंने चीनी के घटते स्टॉक, विदेश से चीनी आयात और एथेनॉल नीति को लेकर मोदी सरकार से 3 सवाल किए। खड़गे ने पूछा कि जब देश में चीनी की कमी हो रही है और विदेश से चीनी मंगानी पड़ रही है, तो गन्ने का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में क्यों किया जा रहा है।
तीन महीने में करीब 40% महंगी हुई चीनी
चीनी के दाम पिछले तीन महीने में करीब 40% यानी लगभग 19 रुपए प्रति किलो तक बढ़े हैं। जहां तीन महीने पहले चीनी की कीमत करीब 48 रुपए प्रति किलो थी, वहीं अब यह बढ़कर करीब 67 रुपए प्रति किलो पहुंच गई है। कई शहरों में खुदरा कीमत 70 रुपए प्रति किलो तक बताई जा रही है। कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना आयात शुल्क के मंगाने की मंजूरी दी है।
खड़गे का पहला सवाल- चीनी का स्टॉक इतना कम क्यों हुआ?
मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूछा कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया। उन्होंने सवाल किया कि स्थिति ऐसी क्यों बनी कि सरकार को चीनी के निर्यात पर रोक लगाने और 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने का फैसला लेना पड़ा।
दूसरा सवाल- तीन महीने में 40% महंगाई का जिम्मेदार कौन?
खड़गे ने सरकार से दूसरा सवाल करते हुए कहा कि तीन महीने में चीनी करीब 40% महंगी हो गई है। ऐसे समय में जब त्योहारों का सीजन शुरू होने वाला है, जनता पर पड़ी इस महंगाई की मार का जिम्मेदार कौन है?
तीसरा सवाल- E20 नीति की समीक्षा क्यों नहीं?
खड़गे ने तीसरा सवाल एथेनॉल और E20 नीति को लेकर किया। उन्होंने पूछा कि जब देश में चीनी की कमी है और सरकार को विदेश से चीनी आयात करनी पड़ रही है, तब गन्ने और चीनी से E20 के लिए एथेनॉल बनाने की नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है।
सरकार ने कहा- एथेनॉल की वजह से नहीं बढ़े चीनी के दाम
हालांकि, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार मानने से इनकार किया था। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम की वजह से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव जैसे कारण हैं।
खाद्य सचिव बोले- 20 जुलाई से कीमतों में बड़ा उछाल
संजीव चोपड़ा के मुताबिक, 20 जुलाई को चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 48 रुपए प्रति किलो थी, जो बढ़कर 56 रुपए प्रति किलो हो गई। वहीं एक्स-मिल कीमत महज 7 से 10 दिनों में 47-48 रुपए से बढ़कर 62 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। उन्होंने मिलों की ओर से अचानक कीमत बढ़ाने को अनुचित बताया।
चीनी का स्टॉक घटने की 4 बड़ी वजह
चीनी के स्टॉक में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें खराब मौसम से गन्ने की पैदावार और रिकवरी में कमी, गन्ने का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल, पहले दी गई एक्सपोर्ट मंजूरी और त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग शामिल हैं।
पहली वजह- बारिश से गन्ने की फसल को नुकसान
नेशनल फेडरेशन ऑफ को-ऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के मुताबिक, पिछले साल ज्यादा बारिश से गन्ने की फसल को नुकसान हुआ। इससे गन्ने से चीनी बनने की दर यानी रिकवरी रेट 12% से नीचे आ गई। इसका मतलब है कि 100 किलो गन्ने से 12 किलो से भी कम चीनी बनी।
इसके चलते देश का चीनी उत्पादन करीब 3 करोड़ टन रहा, जबकि अनुमान 3.2 करोड़ टन का था।
दूसरी वजह- एथेनॉल बनाने में गन्ने का इस्तेमाल
सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी के तहत गन्ने का एक हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो रहा है। ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसके लिए 1.33 करोड़ टन अनाज और करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ। इसमें करीब 34 लाख टन गन्ना शामिल था।
सरकार का दावा- एथेनॉल में अब कम चीनी जा रही
खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के मुताबिक, अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही शुगर से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनाया जाता है।
उनके अनुसार, एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी, जो 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गई। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए करीब 28 लाख टन शुगर डायवर्ट की गई है।
तीसरी वजह- कम स्टॉक के बावजूद चीनी का एक्सपोर्ट
केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। इसके बाद फरवरी 2026 में 5 लाख टन और निर्यात की मंजूरी दी गई। कीमतों में बढ़ोतरी के बाद मई 2026 में सरकार ने चीनी के एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी।
हालांकि, तब तक करीब 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी। इससे चीनी का स्टॉक 47 लाख टन से घटकर करीब 39 लाख टन रह गया और घरेलू बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ा।
चौथी वजह- त्योहारों में बढ़ी चीनी की मांग और जमाखोरी
अगस्त से नवंबर तक गणेश चतुर्थी, दिवाली समेत कई त्योहार आते हैं। इस दौरान मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की मांग बढ़ जाती है। मिठाई और बेवरेज बनाने वाली कंपनियां भी ज्यादा चीनी स्टॉक करने लगती हैं। ऐसे में मांग बढ़ने और स्टॉक कम होने से कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
सरकार ने चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट घटाई
चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने बड़े खरीदारों और डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट तय की है। महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े खरीदार अब 15 दिन की जरूरत से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
बड़े डीलर 4,000 क्विंटल से ज्यादा स्टॉक नहीं रख सकेंगे
सरकार ने बड़े सप्लायर और डीलरों के लिए भी स्टॉक सीमा तय की है। उन्हें 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी रखने की अनुमति नहीं होगी। इसका मकसद जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।
मिलों को 50 हजार टन ज्यादा चीनी बेचने की अनुमति
सरकार ने चीनी मिलों को सितंबर से 50 हजार टन अतिरिक्त चीनी बाजार में बेचने की अनुमति दी है। साथ ही बिक्री के 7 दिन के भीतर चीनी को मिल से बाहर भेजना जरूरी किया गया है, ताकि सप्लाई जल्द बाजार तक पहुंच सके।
10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात होगी
घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन से ज्यादा रॉ शुगर बिना आयात शुल्क के मंगाने की मंजूरी दी है। हालांकि, इससे थोक कीमतों में बहुत बड़ी गिरावट आने की उम्मीद नहीं जताई जा रही है।
तीन महीने में गुड़ भी 24% तक महंगा
चीनी के साथ-साथ दूसरी रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़े हैं। पिछले तीन महीने में गुड़ करीब 24%, चावल 16% और मक्के का आटा 11% तक महंगा हुआ है। चीनी के दाम बढ़ने की एक वजह मिलों के पास बचे स्टॉक में कमी भी बताई जा रही है।
मिलों के पास शुरुआती स्टॉक भी घटा
पिछले सीजन में चीनी की नई पेराई शुरू होने से पहले मिलों के पास करीब 47 लाख टन चीनी का शुरुआती स्टॉक था। इस बार यह घटकर करीब 32 लाख टन रह गया है। यानी नया सीजन शुरू होने से पहले ही मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक पिछले साल की तुलना में काफी कम है।
तीन महीने में रोजमर्रा की चीजों के दाम
| सामान | तीन महीने पहले | अब | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| चीनी | ₹48 | ₹67 | ₹19 (39.58%) |
| गुड़ | ₹50 | ₹65 | ₹15 (24%) |
| चावल (कनकी) | ₹25 | ₹29 | ₹4 (16%) |
| मक्के का आटा | ₹36 | ₹40 | ₹4 (11.11%) |
| इडली रवा/राइस फ्लोर | ₹38 | ₹42 | ₹4 (10.53%) |
| पशु आहार | ₹29 | ₹32 | ₹3 (10.34%) |
| पोल्ट्री फीड | ₹23 | ₹25 | ₹2 (8.70%) |
नोट: सभी कीमतें रुपए प्रति किलोग्राम हैं।
खराब अनाज की उपलब्धता से पशु आहार भी महंगा
ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल 720 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। इसमें 1.33 करोड़ टन अनाज और करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा इस्तेमाल हुआ। संगठन का कहना है कि खराब अनाज की उपलब्धता कम होने से पशु आहार और पोल्ट्री फीड भी करीब 8-10% तक महंगे हुए।
भारत ने 9 साल बाद फिर शुरू किया चीनी आयात
भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और निर्यातक देश है। 2021-22 में भारत ने रिकॉर्ड करीब 1.1 करोड़ टन चीनी एक्सपोर्ट की थी। इसके बाद निर्यात लगातार घटता गया।
जब घरेलू सप्लाई पर संकट आता है तो सरकार ब्राजील जैसे देशों से कच्ची चीनी मंगाकर उसे घरेलू मिलों में रिफाइन कर बाजार में उतारती है। इससे पहले 2017 में करीब 24 लाख टन चीनी आयात की गई थी। अब करीब 9 साल बाद भारत को फिर विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ी है।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक
| रैंक | देश | चीनी उत्पादन |
|---|---|---|
| 1 | ब्राजील | 4.38 करोड़ टन |
| 2 | भारत | 3.00 करोड़ टन |
| 3 | चीन | 1.26 करोड़ टन |
| 4 | थाईलैंड | 1.10 करोड़ टन |
| 5 | अमेरिका | 85 लाख टन |
2025-26 में चीनी उत्पादन का अनुमान घटा
2025-26 में देश में चीनी उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 लाख टन का था। गन्ने में रेड रॉट, टॉप बोरर और ज्यादा बारिश जैसी समस्याओं के कारण फसल को नुकसान हुआ, जिससे चीनी उत्पादन का अनुमान घटाना पड़ा।
सरकार का दावा- सितंबर तक पर्याप्त स्टॉक रहेगा
हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि सितंबर 2026 के अंत तक देश में 33-35 लाख टन शुगर का स्टॉक बचा रहने का अनुमान है। सरकार के मुताबिक, यह घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त है और बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है।
अक्टूबर से बढ़ सकती है चीनी की सप्लाई
सरकार के मुताबिक, इस बार चीनी मिलों में नए सीजन की पेराई करीब 15 अक्टूबर से शुरू हो सकती है। इसके बाद अक्टूबर में करीब 10-12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त सप्लाई उपलब्ध रहेगी और त्योहारों के दौरान चीनी की कमी नहीं होगी।
चीनी की कीमतों पर सरकार के कदम से क्या होगा?
सरकार ने एक तरफ 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री चीनी आयात की मंजूरी दी है, वहीं दूसरी तरफ बड़े खरीदारों और डीलरों की स्टॉक सीमा तय की है। मिलों को अतिरिक्त चीनी बाजार में बेचने की अनुमति भी दी गई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन कदमों से आने वाले दिनों में चीनी की खुदरा कीमतों में कितनी राहत मिलती है।
चीनी के दाम पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
चीनी की कीमतों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गया है। मल्लिकार्जुन खड़गे जहां एथेनॉल नीति और चीनी स्टॉक को लेकर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि मौजूदा महंगाई के लिए एथेनॉल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। सरकार के मुताबिक, फसल का नुकसान, कम उत्पादन, त्योहारों की मांग और बाजार में सप्लाई का दबाव कीमत बढ़ने की मुख्य वजहें हैं।