बड़ी खबर: मुंबई में द्रोणाचार्य अवॉर्डी मलखंभ कोच गणेश प्रभाकर देवरुखकर के खिलाफ 16 साल की छात्रा की शिकायत पर POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। छात्रा का आरोप है कि कोच ने उसे WhatsApp पर मैसेज कर जिम्नेजियम बुलाया और वहां उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि आरोपी कोच फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
45 साल के मलखंभ कोच पर POCSO में केस
पुलिस के मुताबिक, 45 साल के मलखंभ कोच गणेश प्रभाकर देवरुखकर के खिलाफ 16 साल की छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई है। छात्रा मुंबई के एक कॉलेज में पढ़ती है और पिछले कई साल से आरोपी कोच से जिमनास्टिक की ट्रेनिंग ले रही थी।
शिकायत में छात्रा ने 21 अगस्त की सुबह हुई घटना का जिक्र किया है। पुलिस अब छात्रा के आरोपों, CCTV फुटेज और WhatsApp चैट समेत दूसरे सबूतों की जांच कर रही है।
WhatsApp पर सिर्फ ‘Hi’ भेजकर जिम्नेजियम बुलाने का आरोप
छात्रा ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार, 21 अगस्त की सुबह वह घर पर पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसके मोबाइल पर कोच का WhatsApp मैसेज आया, जिसमें सिर्फ ‘Hi’ लिखा था।
छात्रा ने भी जवाब में ‘Hi’ लिखा और अपनी मां को इसकी जानकारी दी। मां के कहने पर छात्रा ने कोच से पूछा कि उन्होंने मैसेज क्यों किया था।
शिकायत के मुताबिक, कोच ने उससे पूछा कि वह कहां है और अगर फ्री हो तो जिम्नेजियम आकर उससे मिले। कई साल से कोच से ट्रेनिंग लेने की वजह से छात्रा को लगा कि उसे जिमनास्टिक से जुड़ी किसी बात के लिए बुलाया गया है। इसके बाद वह जिम्नेजियम पहुंच गई।
दरवाजा अंदर से बंद करने को कहा, गोद में बैठाने का आरोप
शिकायत के अनुसार, छात्रा जब जिम्नेजियम पहुंची तो वहां कोच अकेला था। आरोप है कि कोच ने छात्रा को चप्पल अंदर लाने और दरवाजा अंदर से बंद करने को कहा।
इसके बाद दोनों के बीच कॉलेज और पढ़ाई को लेकर बातचीत हुई। छात्रा ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान कोच ने उसका बायां हाथ पकड़ा और उसे खींचकर अपनी गोद में बैठा लिया।
शिकायत के मुताबिक, छात्रा ने जब उठने की कोशिश की तो कोच ने पीछे से उसकी कमर पकड़ ली और उसके साथ छेड़छाड़ की। ये आरोप छात्रा की शिकायत पर आधारित हैं और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
घटना के बाद सीधे कॉलेज पहुंची छात्रा
छात्रा के मुताबिक, वह जिम्नेजियम से निकलकर सीधे अपने कॉलेज पहुंची। उसे परेशान देखकर उसकी सहेलियों ने घटना के बारे में पूछा।
इसके बाद छात्रा ने अपनी टीचर को पूरी बात बताई। टीचर ने परिवार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद परिजन छात्रा को लेकर पुलिस के पास पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने POCSO और BNS की धाराओं में FIR दर्ज की
मुंबई की पार्ले पुलिस ने छात्रा की शिकायत के आधार पर आरोपी कोच के खिलाफ POCSO एक्ट और BNS की संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की है।
पुलिस जिम्नेजियम और उसके आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। WhatsApp पर हुई बातचीत और जिम्नेजियम में हुई घटनाओं से जुड़े दूसरे सबूतों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है।
आरोपी कोच फिलहाल फरार
पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच जारी है और आरोपी कोच फिलहाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
मलखंभ फेडरेशन ऑफ इंडिया के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि घटना को लेकर मुंबई मलखंभ फेडरेशन से जानकारी मांगी गई है।
कोच-एथलीट के बीच सेफ बाउंड्रीज क्यों जरूरी?
नाबालिग खिलाड़ियों के मामले में कोच और एथलीट के बीच स्पष्ट और सुरक्षित पेशेवर सीमाएं बेहद जरूरी हैं।
कोच और नाबालिग एथलीट के बीच बातचीत संभव हो तो खुली और पारदर्शी जगह पर होनी चाहिए। निजी चैट को ट्रेनिंग और जरूरी पेशेवर जानकारी तक सीमित रखना जरूरी है।
ट्रेनिंग की जरूरत के अलावा खिलाड़ी को अकेले बुलाने, निजी तौर पर मिलने या अनावश्यक शारीरिक संपर्क जैसी परिस्थितियों से बचना चाहिए।
कौन-सी चीजें Red Flag हो सकती हैं?
नाबालिग खिलाड़ी के लिए निजी गिफ्ट, अनुचित समय पर बुलाना, जरूरत से ज्यादा निजी सवाल पूछना या ट्रेनिंग सेंटर में अकेले मिलने का दबाव जैसे व्यवहार चिंता का कारण हो सकते हैं।
शारीरिक संपर्क अगर ट्रेनिंग का हिस्सा है तो वह भी स्पष्ट पेशेवर जरूरत और उचित सीमाओं के भीतर होना चाहिए।
पैरेंट्स ट्रेनिंग सेंटर भेजते समय क्या देखें?
माता-पिता को बच्चे को किसी कोच या ट्रेनिंग सेंटर के पास भेजने से पहले कुछ जरूरी बातें जरूर जांचनी चाहिए।
- कोच की योग्यता और अनुभव की जानकारी लें।
- ट्रेनिंग सेंटर की Child Safety Policy के बारे में पूछें।
- शिकायत करने की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारी की जानकारी रखें।
- बच्चे से नियमित रूप से पूछें कि ट्रेनिंग में सब ठीक चल रहा है या नहीं।
- बच्चे को समझाएं कि कोई भी व्यवहार असहज लगे तो तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को बताए।
- कोशिश करें कि नाबालिग बच्चा कोच के साथ बंद कमरे में अकेला न रहे।
POCSO एक्ट क्या है?
POCSO यानी Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 भारत का विशेष कानून है, जिसका उद्देश्य 18 साल से कम उम्र के बच्चों को यौन अपराधों, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी से सुरक्षा देना है।
इस कानून में अलग-अलग प्रकार के यौन अपराधों के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं।
POCSO में कितनी सजा हो सकती है?
अपराध की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर POCSO में कई साल की जेल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। कुछ बेहद गंभीर अपराधों में कानून के तहत मृत्युदंड का भी प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
POCSO की प्रमुख धाराएं कौन-सी हैं?
POCSO एक्ट में अलग-अलग अपराधों के लिए अलग धाराएं हैं। इनमें धारा 3 पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट, धारा 5 गंभीर परिस्थितियों में पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट, धारा 7 सेक्सुअल असॉल्ट और धारा 9 गंभीर परिस्थितियों में सेक्सुअल असॉल्ट से संबंधित है।
हालांकि, इस मामले में आरोपी के खिलाफ कौन-कौन सी सटीक धाराएं लागू की गई हैं, यह FIR और पुलिस की आगे की जांच के आधार पर स्पष्ट होगा।
अब पुलिस की जांच में क्या अहम होगा?
इस मामले में छात्रा की शिकायत के अलावा WhatsApp चैट, जिम्नेजियम और आसपास के CCTV फुटेज, मौके पर मौजूद परिस्थितियां और दूसरे संभावित सबूत जांच के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसलिए आरोपी पर लगे आरोपों को जांच पूरी होने और अदालत के फैसले से पहले साबित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।