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Ram Mandir CEO: अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO होंगे। ट्रस्ट ने बुधवार को उनके नाम का ऐलान किया। जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में करीब 39 साल सेवा दे चुके हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व कर चुके हैं। उनके अलावा ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी।

चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद ट्रस्ट में बड़ा बदलाव

राम मंदिर ट्रस्ट में यह बड़ा बदलाव मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आने के करीब तीन महीने बाद हुआ है। इस मामले में 8 आरोपी जेल में हैं।

मामला सामने आने के बाद 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था।

कौन हैं राम मंदिर के पहले CEO जीतेंद्र मिश्रा?

पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी रहे हैं। उन्होंने करीब 39 साल तक वायुसेना में सेवा की और 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

उनका संबंध उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपालपुर गांव, बनकटा से है। उनके पिता का नाम नथुनी मिश्रा है।

6 दिसंबर 1986 को वायुसेना में हुई थी नियुक्ति

जीतेंद्र मिश्रा की भारतीय वायुसेना में नियुक्ति 6 दिसंबर 1986 को हुई थी। उनका पहला पद लड़ाकू विमान पायलट का था।

उन्होंने NDA, पुणे के अलावा Air Command and Staff College, Air University और Royal College of Defence Studies से शिक्षा और प्रशिक्षण हासिल किया।

18 तरह के विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए

करीब 39 साल के सैन्य करियर के दौरान जीतेंद्र मिश्रा ने 18 प्रकार के विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। उनके पास 3,000 से ज्यादा घंटे की उड़ान का अनुभव है।

उनकी लंबी सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और जिम्मेदारियां संभालीं।

कारगिल युद्ध में भी निभाई अहम भूमिका

जीतेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर कई महत्वपूर्ण अभियानों से जुड़ा रहा है। कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने मिराज-2000 से लेजर गाइडेड बम के संचालन वाली टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

यह भूमिका भारतीय वायुसेना के ऑपरेशनल इतिहास में महत्वपूर्ण मानी जाती है।

अभ्यास गरुड़ में भी किया भारतीय दल का नेतृत्व

साल 2010 में अभ्यास गरुड़ के दौरान जीतेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना दल का नेतृत्व किया था।

इससे पहले भी वे कई महत्वपूर्ण सैन्य जिम्मेदारियों और अभियानों का हिस्सा रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान की कमान

जीतेंद्र मिश्रा का नाम हाल के दिनों में सबसे ज्यादा ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चर्चा में रहा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।

इस मिशन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही और इसके लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया।

हाल ही में एक पॉडकास्ट में उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई अहम पहलुओं का भी खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि भारतीय वायुसेना ने किस तरह पाकिस्तान के रडार और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया और दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणालियों को चकमा दिया।

जीतेंद्र मिश्रा को ही CEO क्यों बनाया गया?

राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के तौर पर जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के पीछे उनकी लंबी सैन्य सेवा और प्रशासनिक अनुभव को महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर की हीरो इमेज

सबसे बड़ा पहलू उनका ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ा अनुभव है। वे उस दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे और उन्हें इस भूमिका के लिए सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से भी सम्मानित किया गया।

उत्तर प्रदेश से कनेक्शन

जीतेंद्र मिश्रा का संबंध देवरिया, उत्तर प्रदेश से है। ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर उनकी नियुक्ति में उनका यूपी कनेक्शन भी एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा सकता है।

सैन्य प्रशासन का लंबा अनुभव

करीब 40 साल वायुसेना में रहने के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और ऑपरेशनल जिम्मेदारियां संभाली हैं। राम मंदिर में लगातार बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या, प्रशासन, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और बड़े स्तर के ऑपरेशनल कामकाज को देखते हुए उनका सैन्य प्रशासनिक अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है।

ट्रस्ट में 3 नए सदस्य भी बनाए गए

CEO की नियुक्ति के साथ ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में तीन नए ट्रस्टियों को भी शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं।

महेश भागचंदका कौन हैं?

महेश भागचंदका दिल्ली के रहने वाले हैं। उन्हें विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल से जुड़ा बताया जाता है।

उनकी नियुक्ति से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने लोगों और परंपरा से जुड़ाव बनाए रखने का संकेत मिलता है।

एडवोकेट मदन मोहन पांडेय कौन हैं?

मदन मोहन पांडेय अयोध्या के वकील हैं। वे रामलला से जुड़े मामले में पैरवी भी कर चुके हैं।

उनकी नियुक्ति से ट्रस्ट में स्थानीय अनुभव के साथ कानूनी विशेषज्ञता को जगह मिलेगी।

निर्मला यादव होंगी पहली महिला ट्रस्टी

निर्मला यादव शिकोहाबाद की रहने वाली हैं और RSS से जुड़ी रही हैं। उनकी नियुक्ति ट्रस्ट के लिहाज से खास है, क्योंकि वे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महिला ट्रस्टी होंगी।

इससे ट्रस्ट में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ेगी।

राम मंदिर ट्रस्ट में अब क्या बदलेगा?

पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा की CEO के तौर पर नियुक्ति और तीन नए ट्रस्टियों को शामिल किया जाना राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव है।

एक तरफ ट्रस्ट को सैन्य और प्रशासनिक अनुभव वाला पहला CEO मिला है, तो दूसरी तरफ नए ट्रस्टियों के जरिए राम मंदिर आंदोलन से जुड़ाव, स्थानीय कानूनी अनुभव और महिला प्रतिनिधित्व को भी जगह मिली है।

चढ़ावे की चोरी के मामले के बाद हुए इन बदलावों को राम मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक दायरे और आने वाले समय में मंदिर व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।