UP Encounter: वाराणसी में यूपी ATS ने झारखंड के प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) के कुख्यात कमांडर बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया है। उस पर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था। NIA ने करीब 8 साल पहले उसे टेरर फंडिंग केस में वांटेड घोषित किया था। रविवार सुबह रामनगर थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के दौरान नक्सली की गोली ATS टीम की बुलेटप्रूफ जैकेट पर भी लगी। उसका एक साथी मौके से फरार हो गया।
वाराणसी में रविवार सुबह 4 बजे हुई मुठभेड़
यूपी ATS के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 4 बजे रामनगर थाना क्षेत्र में टीम को सूचना मिली कि एक नक्सली रामनगर के रास्ते मुगलसराय की तरफ जाने वाला है। सूचना के आधार पर ATS कमांडोज ने इलाके में घेराबंदी कर दी।
इसी दौरान बृजेश गंझू अपने एक साथी के साथ बाइक से वहां पहुंचा। ATS टीम ने उसे रुकने का इशारा किया, लेकिन पुलिस के अनुसार, पकड़े जाने के डर से उसने दोनों हाथों से पिस्टल से फायरिंग शुरू कर दी।
DSP विपिन राय और हेड कॉन्स्टेबल की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी गोली
ATS के DSP विपिन राय ने बताया कि नक्सली की गोली उनकी और हेड कॉन्स्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगी। इसके बाद टीम ने जवाबी फायरिंग की।
जवाबी कार्रवाई में बृजेश गंझू को गोली लगी और वह सड़क पर गिर गया। वहीं, उसका साथी मौके से फरार होने में कामयाब रहा।
जिला अस्पताल ले जाने के बाद हुई मौत
मुठभेड़ में घायल बृजेश गंझू को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। ATS ने उसकी डेडबॉडी को लाल बहादुर शास्त्री पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया है।
ADG कानून व्यवस्था अमिताभ यश के अनुसार, कार्रवाई के बाद ATS और स्थानीय पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है।
30 लाख रुपये का इनाम, NIA के टेरर फंडिंग केस में था वांटेड
बृजेश गंझू (46) झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र का रहने वाला था। वह प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) का कमांडर था।
उस पर झारखंड सरकार ने 25 लाख रुपये और NIA ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इस तरह उसके ऊपर कुल 30 लाख रुपये का इनाम था।
करीब 8 साल पहले NIA ने टेरर फंडिंग केस में उसे वांटेड घोषित किया था। इसी मामले में बृजेश गंझू के घर की कुर्की भी की गई थी।
ट्रांसपोर्टरों और कोयला कंपनियों से वसूली का आरोप
पुलिस रिकॉर्ड और जांच एजेंसियों के मुताबिक, बृजेश गंझू ट्रांसपोर्टरों, कोयला खनन कंपनियों और ठेकेदारों से वसूली करता था। लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय रहने के दौरान उसने अपनी गतिविधियों का नेटवर्क कई इलाकों में फैलाया था।
नक्सली के पास से दो पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद
मुठभेड़ के बाद ATS ने बृजेश गंझू के पास से दो पिस्टल बरामद करने की जानकारी दी है। उसके पास से कई जिंदा कारतूस और खोखे भी मिले हैं।
ATS और स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। फरार साथी की तलाश में भी कार्रवाई की जा रही है।
बृजेश गंझू कौन था? कई नामों से रह रहा था
नक्सली कमांडर बृजेश गंझू मूल रूप से झारखंड के चतरा जिले के लूटू गांव का रहने वाला था। हालांकि, वह काफी समय से अपना ठिकाना और नाम बदल-बदलकर रह रहा था।
पुलिस रिकॉर्ड में उसके कई नाम दर्ज हैं। इनमें गोपाल सिंह भोक्ता, दुलारचंद गंझू, रंजन, फुलचंद गंझू और सरदार शामिल हैं।
बृजेश के पिता पंचू गंझू की काफी पहले ही मौत हो चुकी थी। वह लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में सक्रिय था। सिर्फ चतरा जिले में ही उसके खिलाफ 39 मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
बीड़ी पत्ता से कोयला खनन तक, वसूली का नेटवर्क कैसे बढ़ा?
बृजेश गंझू ने शुरुआत में बीड़ी पत्ता के ठेकेदारों से वसूली करना शुरू किया था। इसके बाद सीसीएल की आम्रपाली और मगध कोयला परियोजनाओं के शुरू होने के बाद उसने कोयला खनन में लगी कंपनियों से वसूली का काम शुरू किया।
समय के साथ उसकी गतिविधियां चतरा के अलावा झारखंड के रांची, हजारीबाग और कई अन्य जिलों तक फैल गईं। उसने बिहार के कुछ हिस्सों में भी अपना नेटवर्क बनाया था।
2004 में भाकपा माओवादी से अलग होकर बनाया गुट
जानकारी के मुताबिक, साल 2004 में बृजेश गंझू ने नक्सली संगठन भाकपा माओवादी से बगावत कर अपना अलग गुट बनाया था। इसके बाद धीरे-धीरे उसने अपना प्रभाव बढ़ाया।
उसका संगठन तृतीय प्रस्तुति कमेटी (TPC) और माओवादी संगठनों के बीच लंबे समय तक वर्चस्व की लड़ाई चलती रही। यह संघर्ष करीब 20 साल तक जारी रहने की जानकारी दी गई है।
2010 में निर्विरोध मुखिया चुना गया था
बृजेश गंझू साल 2010 में लावालौंग पंचायत से निर्विरोध मुखिया चुना गया था। इसके बावजूद उसकी नक्सली गतिविधियों से जुड़े रहने की जानकारी सामने आती रही।
लंबे समय तक नक्सली नेटवर्क से जुड़े रहने, अलग-अलग नामों का इस्तेमाल करने और कई जिलों में गतिविधियां फैलाने के बाद अब वाराणसी में हुई ATS मुठभेड़ में उसकी मौत हुई है।
नोट: मुठभेड़, फायरिंग और बरामदगी से जुड़ी जानकारी ATS और पुलिस के बताए विवरण पर आधारित है। मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य आधिकारिक जांच संबंधी जानकारी अलग से सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).