Pilibhit News: पीलीभीत के विकास भवन में अफसरों की गैरहाजिरी का मामला एक बार फिर सामने आया है। गुरुवार सुबह जिलाधिकारी आलोक कुमार ने करीब 10:05 बजे विकास भवन का औचक निरीक्षण किया तो पांच बड़े अधिकारी अपने कार्यालयों में मौजूद नहीं मिले। खास बात यह है कि इससे पहले भी तत्कालीन डीएम ज्ञानेंद्र सिंह के निरीक्षण में 10 अधिकारी और 60 कर्मचारी गैरहाजिर मिले थे और कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद हालात फिर वही नजर आए।
विकास भवन में सुबह 10 बजे फिर खाली मिलीं अधिकारियों की कुर्सियां
सरकारी कार्यालयों में सुबह 10 बजे से काम शुरू होना चाहिए, लेकिन पीलीभीत के विकास भवन में कुछ अधिकारियों के लिए शायद सरकारी समय की घड़ी अलग चल रही है। जनता अपने काम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटती रहे, फरियादी इंतजार करते रहें और अधिकारी समय पर कार्यालय पहुंचें या नहीं—अब यह सवाल सिर्फ गैरहाजिरी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही से भी जुड़ गया है।
गुरुवार सुबह जिलाधिकारी आलोक कुमार ने विकास भवन का औचक निरीक्षण किया। सुबह करीब 10:05 बजे हुए निरीक्षण में जिला पंचायतराज अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी और जिला कृषि अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में मौजूद नहीं मिले। डीएम ने सभी अनुपस्थित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए।
पहले भी 10 अधिकारी और 60 कर्मचारी मिले थे गैरहाजिर
यह पहली बार नहीं है जब विकास भवन में अधिकारियों और कर्मचारियों की गैरहाजिरी सामने आई हो। कुछ समय पहले तत्कालीन जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के निरीक्षण में भी विकास भवन और उससे जुड़े कार्यालयों में बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी अनुपस्थित मिले थे।
उस निरीक्षण में कुल 10 अधिकारी और 60 कर्मचारी गैरहाजिर पाए गए थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। अनुपस्थित कर्मचारियों-अधिकारियों से स्पष्टीकरण लेने और वेतन काटने जैसे कदम भी उठाए गए थे।
कार्रवाई के बाद भी क्यों नहीं बदला ढर्रा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पहले गैरहाजिरी पर कार्रवाई हो चुकी थी, तो उसके बाद भी वही तस्वीर दोबारा कैसे सामने आ गई? अगर कार्रवाई के कुछ समय बाद ही बड़े अधिकारियों की कुर्सियां फिर खाली मिलें तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पिछली कार्रवाई का कोई असर नहीं हुआ?
या फिर अधिकारियों को यह भरोसा है कि कुछ दिन बाद सब कुछ पहले की तरह चलने लगेगा? डीएम के औचक निरीक्षण ने कम से कम यह जरूर दिखा दिया है कि कार्यालयों में अधिकारियों की मौजूदगी और समय की पाबंदी पर अब नजर रखी जा रही है।
जनता के लिए सिर्फ गैरहाजिरी नहीं, काम रुकने का सवाल
विकास भवन में जिले की तमाम विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों से जुड़े महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले गरीब, किसान, लाभार्थी और आम फरियादी के लिए संबंधित अधिकारी से मुलाकात बेहद जरूरी होती है।
किसी अधिकारी के कार्यालय में समय पर मौजूद न होने का मतलब कई बार फरियादी का काम टल जाना भी होता है। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारी ही अगर तय समय पर कार्यालय में मौजूद नहीं होंगे तो जनता अपनी शिकायत और समस्या लेकर आखिर किसके सामने पहुंचेगी?
DM आलोक कुमार ने दिए समय की पाबंदी के निर्देश
औचक निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी आलोक कुमार ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यदिवस में सुबह 10 बजे कार्यालय में उपस्थित रहने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने सरकारी कामकाज में समय की पाबंदी और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया।
डीएम ने लंबित पत्रावलियों का समयबद्ध तरीके से निस्तारण करने, कार्यालयों में साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने और सरकारी कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही न बरतने के निर्देश भी दिए।
अब स्पष्टीकरण से आगे होगी कार्रवाई या फिर मामला वहीं थम जाएगा?
इस बार पांच बड़े अधिकारियों की गैरहाजिरी सामने आने के बाद उनका स्पष्टीकरण तलब किया गया है। अब देखने वाली बात होगी कि मामला सिर्फ स्पष्टीकरण की फाइल तक सीमित रहता है या जिम्मेदारी तय करते हुए ऐसी कार्रवाई भी होती है, जिसका असर विकास भवन की कार्यसंस्कृति में दिखाई दे।
क्योंकि सवाल सीधा है—जब एक जिलाधिकारी पहले ही गैरहाजिरी पर कार्रवाई कर चुके हैं, फिर भी वही तस्वीर दोबारा सामने आ गई तो आखिर गलती कहां है?
सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी है जवाबदेही
सरकार की कोशिश है कि अधिकारी जनता के प्रति जवाबदेह रहें और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। लेकिन अगर सरकारी कार्यालयों में ही समय की पाबंदी और अनुशासन कमजोर पड़ जाए तो योजनाओं और सरकारी सेवाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
पीलीभीत विकास भवन का यह निरीक्षण इसी वजह से सिर्फ पांच अधिकारियों की गैरहाजिरी का मामला नहीं माना जा सकता। अब जरूरत इस बात की है कि सरकारी कार्यालयों में नियमों का पालन लगातार हो और कार्रवाई का असर भी जमीन पर दिखाई दे।
जिलाधिकारी आलोक कुमार के औचक निरीक्षण से इतना जरूर साफ है कि विकास भवन में अधिकारियों की मौजूदगी और कामकाज पर नजर रखी जा रही है। अब जरूरत सिर्फ इतनी है कि नजर के साथ कार्रवाई भी उतनी ही सख्त दिखाई दे।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).