Pilibhit News: पीलीभीत के पूरनपुर में पुलिस ने नशीली दवाओं के कथित अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, माधोटांडा रोड स्थित मंडी के पास एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी मोटरसाइकिल से कैप्सूल का एक कार्टन बरामद किया गया। इसके बाद उसकी निशानदेही पर कथित गोदाम से 42 और कार्टन मिले। कुल 43 कार्टन में 5,57,760 कैप्सूल बरामद हुए हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस को शक है कि फर्जी बिलों के जरिए इन दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। अब दवाओं के स्रोत और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पूरनपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 5.57 लाख कैप्सूल बरामद
पीलीभीत पुलिस के मुताबिक, जिले में मादक पदार्थों और नशीली दवाओं की अवैध तस्करी, भंडारण और बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 28 अक्टूबर 2026 को पूरनपुर पुलिस ने मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर कार्रवाई की।
पुलिस टीम ने माधोटांडा रोड स्थित मंडी के पास दबिश देकर दानिश पुत्र राशिद खान को गिरफ्तार किया। आरोपी मोहल्ला जामा मस्जिद, थाना माधोटांडा, जनपद पीलीभीत का निवासी बताया गया है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी की मोटरसाइकिल पर रखे एक कार्टन से SPASMO ब्राउन कैप्सूल मिले। इसके बाद आरोपी की निशानदेही पर एक कथित अवैध गोदाम में छापा मारा गया, जहां से 42 अन्य कार्टन बरामद हुए। इस तरह कुल 43 कार्टन में 5,57,760 कैप्सूल मिलने की जानकारी पुलिस ने दी है।
मोटरसाइकिल और एप्पल मोबाइल फोन भी बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक मोटरसाइकिल और एप्पल कंपनी का मोबाइल फोन भी बरामद किया है। बरामद कैप्सूल की अनुमानित कीमत करीब 50 लाख रुपये बताई गई है।
इतनी बड़ी मात्रा में कैप्सूल मिलने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दवाएं कहां से लाई गई थीं, किस उद्देश्य से जमा की गई थीं और इन्हें किन-किन जगहों पर सप्लाई किया जाना था।
ट्रामाडोल युक्त कैप्सूल मिलने पर NDPS एक्ट में मुकदमा
पुलिस के मुताबिक, बरामद कैप्सूल की पैकिंग पर Dicyclomine HCL, Tramadol Hydrochloride और Acetaminophen लिखा हुआ है। इनमें ट्रामाडोल ऐसा पदार्थ है, जिस पर एनडीपीएस कानून के तहत नियंत्रण लागू होता है।
इस मामले में थाना पूरनपुर में मुकदमा अपराध संख्या 446/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21/22 के तहत कार्रवाई शुरू की है।
अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन कैप्सूल की खरीद कहां से हुई, इनके संबंध में कौन-से दस्तावेज मौजूद हैं और इतनी बड़ी खेप को आगे कहां भेजा जाना था।
मेडिकल स्टोर की आड़ में कारोबार का आरोप, फर्जी बिलों से सप्लाई का शक
पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में दानिश ने बताया कि उसका बड़ा भाई तारिक और कुछ अन्य लोग माधोटांडा क्षेत्र में मेडिकल स्टोर चलाते हैं। पुलिस का कहना है कि आरोपी के कथन के मुताबिक, मेडिकल स्टोर की आड़ में नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री और भंडारण किया जाता था।
पुलिस को शुरुआती जांच में यह भी शक है कि दूसरी दवाओं के नाम पर कथित तौर पर फर्जी बिल तैयार करके नशीली दवाओं की अलग-अलग जगहों पर सप्लाई की जाती थी।
अगर जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला केवल एक गोदाम से कैप्सूल बरामद होने तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें दवाओं की खरीद, भंडारण, बिल तैयार करने और सप्लाई करने वाले लोगों की भूमिका भी अहम होगी।
हालांकि, फर्जी बिलों और अवैध कारोबार से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और सबूतों के आधार पर ही होगी। फिलहाल पुलिस कथित बिल तैयार करने वालों, दवाओं के स्रोत और सप्लाई से जुड़े लोगों की जानकारी जुटा रही है।
तारिक समेत अन्य संदिग्धों की तलाश और भूमिका की जांच
पुलिस ने तारिक पुत्र राशिद खान, निवासी मोहल्ला जामा मस्जिद, थाना माधोटांडा को इस मामले में वांछित बताया है। इसके अलावा, पुलिस दूसरे संभावित आरोपियों और इस कारोबार से जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।
जांच में कई अहम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इतनी बड़ी खेप कहां से खरीदी गई? कथित गोदाम का संचालन कौन कर रहा था? दवाओं को किन जगहों पर पहुंचाया जाना था? क्या इस काम में और लोग भी शामिल थे?
पुलिस का कहना है कि दवाओं की खरीद, भंडारण और सप्लाई से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और सबूतों के आधार पर होगी।
अब सप्लाई नेटवर्क की जांच पर नजर
पीलीभीत के पूरनपुर में करीब 50 लाख रुपये की अनुमानित कीमत वाले 5,57,760 कैप्सूल की बरामदगी को पुलिस की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का अहम हिस्सा दवाओं के स्रोत और कथित सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचना है।
पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दवाएं कहां से आईं, कथित फर्जी बिलों का इस्तेमाल कैसे किया गया और इस मामले में अन्य लोगों की क्या भूमिका रही। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस कथित कारोबार के वास्तविक दायरे की जानकारी सामने आ सकेगी।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).