Dussehra in Delhi: दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार दशहरे पर रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला भी जलाया जाएगा। श्री केशव राम लीला समिति की इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे सफाई के प्रति जागरूकता फैलाने की कोशिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे हाल ही में दिल्ली में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों से जोड़कर देख रहे हैं। समिति के अध्यक्ष और बीजेपी विधायक अशोक गोयल ने साफ कहा है कि कॉकरोच का पुतला जलाने का फैसला राजनीतिक कारणों से नहीं लिया गया है।
दशहरे पर रावण के साथ जलेगा 30 फुट का कॉकरोच
दिल्ली के पीतमपुरा में हर साल दशहरे के मौके पर श्री केशव राम लीला समिति कार्यक्रम आयोजित करती है। इस बार समिति ने रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ कॉकरोच का भी 30 फुट ऊंचा पुतला जलाने का फैसला लिया है।
समिति का कहना है कि कॉकरोच गंदगी और मैल का प्रतीक है। ऐसे में इसके पुतले के जरिए लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करने की कोशिश की जाएगी। यह पहल ‘स्वच्छ भारत’ और ‘स्वच्छ दिल्ली’ अभियानों के संदेश से भी जुड़ी हुई है।
BJP विधायक अशोक गोयल बोले- राजनीतिक कारणों से नहीं लिया फैसला
श्री केशव राम लीला समिति के अध्यक्ष और बीजेपी विधायक अशोक गोयल ने कॉकरोच का पुतला जलाने के फैसले पर अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि यह निर्णय किसी राजनीतिक कारण से नहीं लिया गया है।
अशोक गोयल के मुताबिक, दशहरे का मूल संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है। कॉकरोच के पुतले को शामिल करने का उद्देश्य इसी संदेश के साथ सफाई के महत्व को भी सामने लाना है।
उन्होंने बताया कि कॉकरोच को रावण की सेना में असुरों के बीच दिखाया जाएगा। हालांकि, इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई है।
CJP के प्रदर्शनों से क्यों जोड़ा जा रहा है कॉकरोच का पुतला?
कॉकरोच का पुतला जलाने का फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों को लेकर चर्चा हो रही है। इसी वजह से कुछ लोग इस पहल को मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं।
CJP ने शुरुआत में पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शनों में भी शामिल हुआ।
हालांकि, बीजेपी विधायक अशोक गोयल ने इस फैसले को राजनीतिक कदम मानने से इनकार किया है। समिति की ओर से सफाई को बढ़ावा देने को इसका उद्देश्य बताया गया है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, धार्मिक आयोजन को राजनीति से दूर रखने की मांग
कॉकरोच के पुतले को लेकर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों का तर्क है कि धार्मिक आयोजन में मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रमों को शामिल करने से लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं। इससे दशहरे के पारंपरिक महत्व से भी ध्यान भटकने की आशंका जताई जा रही है।
एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। ऐसे में इस परंपरा को मौजूदा राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का मंच क्यों बनाया जाए? यूजर ने लोगों से अपील की कि त्योहारों को समुदायों को जोड़ने का माध्यम बनाया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक विभाजन बढ़ाने का।
एक अन्य यूजर ने कहा कि रावण की तुलना कॉकरोच से करने से CJP पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे हिंदुओं की भावनाएं आहत हो सकती हैं। वहीं, कुछ दूसरे यूजर्स ने भी इस पहल के धार्मिक आधार पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि त्योहार का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जा रहा है।
सफाई का संदेश या राजनीतिक विवाद? चर्चा के केंद्र में दशहरे की परंपरा
पीतमपुरा की रामलीला समिति कॉकरोच के पुतले को सफाई के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल बता रही है, जबकि सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे राजनीतिक घटनाक्रम से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं।
फिलहाल, इस मुद्दे पर दो अलग-अलग नजरिए सामने हैं। एक ओर समिति का कहना है कि इसका मकसद गंदगी के खिलाफ संदेश देना है, तो दूसरी ओर आलोचकों को आशंका है कि इससे धार्मिक आयोजन राजनीतिक विवाद का हिस्सा बन सकता है। ऐसे में दशहरे पर कॉकरोच का 30 फुट ऊंचा पुतला जलाने का फैसला चर्चा का विषय बन गया है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).