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Pilibhit SIR: पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर और तेज हुआ बवाल; कांग्रेस के कुमुद गंगवार ने की CBI जांच की मांग..

Pilibhit SIR: पीलीभीत में वोटर लिस्ट गड़बड़ी पर और तेज हुआ बवाल; कांग्रेस के कुमुद गंगवार ने की CBI जांच की मांग..

Pilibhit SIR: पीलीभीत की वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के बाद अब कांग्रेस ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में भाजपा सरकार और प्रदेश सरकार में मंत्री संजय सिंह गंगवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित बदलाव मंत्री के इशारे पर हुए। उन्होंने पूरे मामले की CBI जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस बीच, दो SDM को जिला मुख्यालय से संबद्ध किए जाने और VRC कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

पीलीभीत की वोटर लिस्ट पर क्यों मचा बवाल?

13,150 मतदाता रिकॉर्ड में नाम बदलने का आरोप

यह पूरा मामला पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद मतदाता सूची के रिकॉर्ड में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए।

कांग्रेस के मुताबिक, 13,150 मतदाता रिकॉर्ड में नाम बदल दिए गए, जबकि संबंधित मतदाताओं के EPIC नंबर और क्रम संख्या समान रहे। EPIC नंबर मतदाता पहचान पत्र पर दर्ज विशिष्ट पहचान संख्या होती है। ऐसे में एक ही पहचान संख्या के साथ अलग-अलग नाम या विवरण दिखाई देने का मामला जांच का विषय बन गया है।

कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने 884 मतदाताओं के नाम हटाए जाने और 2,600 नए नाम जोड़े जाने को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी का दावा है कि इन आंकड़ों को मिलाकर कुल 16,554 मतदाता रिकॉर्ड विवाद के दायरे में आते हैं।

हालांकि, ये आंकड़े कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोपों और दावों पर आधारित हैं। सभी रिकॉर्ड में वास्तव में क्या बदलाव हुआ और इसके पीछे क्या कारण रहे, इसकी अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

कुमुद गंगवार का संजय सिंह गंगवार पर सीधा आरोप

कांग्रेस ने की CBI जांच की मांग

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने मंत्री संजय सिंह गंगवार का नाम लेकर सीधे आरोप लगाए। उनका दावा है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां मंत्री के इशारे पर हुईं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हजारों मतदाता रिकॉर्ड में बदलाव हुए हैं, तो इसकी जिम्मेदारी केवल कर्मचारियों तक सीमित क्यों रखी जाए?

कुमुद गंगवार ने पूरे मामले की गहराई से जांच कराने और जिन लोगों की भूमिका प्रमाणित हो, उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने CBI से जांच कराने की मांग करते हुए दोषियों को जेल भेजने की बात भी कही।

कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर मतदाता रिकॉर्ड में कथित बदलाव का मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पार्टी ने इसे मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया में लोगों के भरोसे से जुड़ा मुद्दा बताया है।

हालांकि, संजय सिंह गंगवार की कथित भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि रिकॉर्ड में बदलाव किस स्तर पर हुए और क्या किसी राजनीतिक व्यक्ति ने इसमें कोई भूमिका निभाई। इस मामले में मंत्री का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

दो SDM जिला मुख्यालय से संबद्ध, कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त

निर्वाचन विभाग की प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया?

मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के बीच प्रशासनिक कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पूरनपुर के SDM मयंक गोस्वामी और अमरिया के SDM हेमंत चौधरी को जिला मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। वहीं, मतदाता पंजीकरण केंद्र यानी VRC के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार की प्रारंभिक जांच में कुछ EPIC नंबर ऑनलाइन खोजने पर दूसरे मतदाताओं का विवरण प्रदर्शित होने की बात सामने आई। इसके बाद संबंधित रिकॉर्ड की जांच और त्रुटियों को ठीक कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

इस घटनाक्रम ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब यह पता लगाना जरूरी है कि मतदाता सूची में कथित विसंगतियां कैसे पैदा हुईं, संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव किसने किए और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

हालांकि, अधिकारियों को जिला मुख्यालय से संबद्ध किया जाना या कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि सभी आरोप सही हैं। मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष और डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण होंगे।

राहुल गांधी के सवालों से जोड़ रही है कांग्रेस

मतदाता सूची की पारदर्शिता पर उठाए सवाल

कांग्रेस इस मामले को राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर उठाए गए सवालों से जोड़ रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, क्योंकि मतदाता का नाम और उसका सही विवरण मतदान के अधिकार से सीधे जुड़ा है।

कांग्रेस के अनुसार, यदि मतदाता रिकॉर्ड में गलत तरीके से बदलाव हुए हैं, तो यह पता लगाना जरूरी है कि ऐसा किस प्रक्रिया के तहत और किसकी जिम्मेदारी में हुआ। पार्टी ने जांच का दायरा केवल कंप्यूटर ऑपरेटर या निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखने की मांग की है।

हालांकि, पीलीभीत के इस मामले से किसी व्यापक राजनीतिक साजिश की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके लिए रिकॉर्ड में हुए बदलावों, संबंधित आवेदन पत्रों, सत्यापन प्रक्रिया और डिजिटल गतिविधियों की जांच जरूरी होगी।

जांच में इन सवालों के जवाब मिलना जरूरी

पीलीभीत SIR विवाद में अब सबसे अहम सवाल यह है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियां किस स्तर पर हुईं। क्या 13,150 रिकॉर्ड में नाम बदलने और कुल 16,554 रिकॉर्ड प्रभावित होने के कांग्रेस के दावे जांच में प्रमाणित होते हैं? EPIC नंबर के साथ दूसरे मतदाता का विवरण किन परिस्थितियों में सामने आया? क्या रिकॉर्ड में बदलाव के लिए जरूरी आवेदन और सत्यापन किए गए थे?

इसके साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड और लॉगिन हिस्ट्री की जांच से यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि संशोधन कब हुए और संबंधित सिस्टम तक किसकी पहुंच थी। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो जिम्मेदारी तय करके नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस मामले में निष्पक्ष जांच के साथ उन मतदाताओं के रिकॉर्ड को दुरुस्त करना भी जरूरी है, जिनके नाम या विवरण में वास्तविक त्रुटियां पाई जाती हैं।

फिलहाल कांग्रेस ने मंत्री संजय सिंह गंगवार पर आरोप लगाकर CBI जांच की मांग की है। इन आरोपों की सच्चाई और कथित अनियमितताओं के पीछे जिम्मेदार लोगों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।