Middle East War: सऊदी अरब में बुधवार देर रात एक बार फिर हमलों से हड़कंप मच गया। दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और सऊदी अरामको की एक तेल फैसिलिटी को निशाना बनाए जाने की खबर है। इन हमलों में एक भारतीय नागरिक समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हुए हैं। एयरपोर्ट को भी नुकसान पहुंचा है और कई उड़ानों का रास्ता बदलना पड़ा। इस बीच अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात अपने कुछ राजनयिकों और सरकारी कर्मचारियों को परिवार समेत देश छोड़ने का आदेश दिया है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल फैसिलिटी पर हमला
बुधवार देर रात सऊदी अरब के पूर्वी इलाके में दम्माम स्थित किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अरामको की एक तेल फैसिलिटी पर हमला हुआ। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हमलों में तीन लोगों की जान चली गई। मृतकों में एयरपोर्ट पर काम करने वाला एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। अरामको की साइट पर एक नेपाली और एक फिलिपिनो नागरिक की मौत होने की जानकारी सामने आई है।
एयरपोर्ट को नुकसान, उड़ानों के रास्ते बदले
हमले में किंग फहद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को नुकसान पहुंचा है। फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Flightradar24 ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि प्रभावित क्षेत्र की स्थिति को देखते हुए कई उड़ानों के रास्ते बदले गए। हमले के बाद एयरपोर्ट की सुरक्षा और हवाई यातायात को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई।
10 लोग घायल, भारतीय नागरिक भी शामिल
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों घटनाओं में कुल 10 लोग घायल हुए हैं। एयरपोर्ट पर दो भारतीय नागरिकों समेत आठ लोग घायल बताए गए हैं, जबकि अरामको की तेल फैसिलिटी पर एक भारतीय नागरिक और दो अन्य लोगों के घायल होने की जानकारी है। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं में घायलों की संख्या को लेकर सामने आए आंकड़ों में अंतर दिखाई देता है।
हमले के पीछे किसका हाथ? हूती विद्रोहियों पर भी नजर
सऊदी अरब के दम्माम एयरपोर्ट और अरामको की तेल फैसिलिटी पर हुए ताजा हमलों के पीछे किसका हाथ है, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सऊदी अधिकारियों ने अभी तक किसी संगठन को इन हमलों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
हालांकि, यमन के हूती विद्रोही पहले भी सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल से जुड़े अहम ठिकानों पर हमले करने का दावा कर चुके हैं। इस महीने सऊदी अरब में हुए कई हमलों को लेकर भी हूतियों का नाम सामने आया है। लेकिन दम्माम एयरपोर्ट और अरामको की ताजा घटना के लिए हूतियों को जिम्मेदार बताने का फिलहाल कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है।
ऐसे में हमले के पीछे किसका हाथ है, यह स्पष्ट होने के लिए आधिकारिक जांच और संबंधित पक्षों के बयान का इंतजार करना होगा।
सऊदी गठबंधन ने चार ड्रोन हमले नाकाम करने का दावा किया
हमलों के बीच सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया कि उसने देश के पूर्वी इलाके में चार ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया। क्षेत्र में लगातार हो रही मिसाइल और ड्रोन गतिविधियों के कारण अहम ठिकानों, एयरपोर्ट और तेल से जुड़े बुनियादी ढांचे की सुरक्षा बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
इस महीने हमलों में 23 से ज्यादा मौतों का दावा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हूती विद्रोहियों ने इस महीने छह बड़े हमले किए हैं। इन हमलों में अब तक कम से कम 23 लोगों की मौत और 370 लोगों के घायल होने की बात कही गई है। हालांकि, इन आंकड़ों और अलग-अलग घटनाओं की जिम्मेदारी से जुड़ी जानकारी को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अक्टूबर में कब-कब हुए हमले?
6 अक्टूबर: जिजान और नजरान एयरपोर्ट निशाने पर
6 अक्टूबर को जिजान और नजरान के एयरपोर्ट पर हमले की खबर सामने आई थी। उस दौरान बैलिस्टिक मिसाइल को बीच में ही रोकने का दावा भी किया गया था।
7 अक्टूबर: रियाद और अबहा में हमले
7 अक्टूबर को रियाद और अबहा में हमलों की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, इन घटनाओं में तीन विदेशी नागरिकों की मौत हुई और 36 लोग घायल हुए।
8 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर हमले की खबर
8 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हमले की खबर आई थी। रिपोर्ट में तीन सऊदी नागरिकों की मौत और सऊदी एयरलाइन Saudia के एक विमान को नुकसान पहुंचने का दावा किया गया।
10 अक्टूबर: मिसाइल हमले में 13 लोगों की मौत का दावा
10 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले की खबर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना में एक भारतीय नागरिक समेत 13 लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। हमले के बाद एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन रोकने की बात भी कही गई।
11 अक्टूबर: फिर मिसाइल और ड्रोन हमले की खबर
11 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल और ड्रोन हमले की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए।
अमेरिका ने सऊदी अरब से कुछ राजनयिकों को जाने का आदेश दिया
सऊदी अरब में लगातार हो रहे हमलों के बीच अमेरिका ने अपने कुछ राजनयिकों और सरकारी कर्मचारियों को उनके परिवारों के साथ देश छोड़ने का आदेश दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पिगॉट ने इस फैसले के पीछे हूती विद्रोहियों की ओर से नागरिक एयरपोर्ट और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर किए जा रहे हमलों का हवाला दिया। अमेरिका का यह कदम ऐसे समय पर आया है, जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है।
ईरान के साथ युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिकी दूतावास को भी नुकसान
रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के आखिर में ईरान के साथ शुरू हुए युद्ध के शुरुआती दौर में अमेरिकी दूतावास को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद वहां कर्मचारियों की संख्या सीमित रह गई थी। हाल ही में कुछ राजनयिकों के वापस लौटने की जानकारी भी सामने आई थी।
UAE, जॉर्डन और कतर से भी अमेरिकी कर्मचारियों की वापसी की खबरें
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि अमेरिका संयुक्त अरब अमीरात (UAE), जॉर्डन, कतर और बहरीन से भी अपने कर्मचारियों को वापस बुला रहा है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने इन खबरों को गलत बताया। उनके मुताबिक, कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश केवल सऊदी अरब के लिए दिया गया है।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी घटाने की खबर
NBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना पश्चिम एशिया के कई सैन्य ठिकानों पर अपनी मौजूदगी धीरे-धीरे कम कर रही है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता ने कहा कि सैन्यकर्मियों को मिशन की तैयारी और जरूरतों को बेहतर बनाने के लिए नियमित तौर पर अलग-अलग जगहों पर तैनात किया जाता है।
खाड़ी देशों में बढ़ते हमलों के बीच अमेरिका की सैन्य गतिविधियों पर भी नजर रखी जा रही है। इसी दौरान ऐसी खबरें सामने आई हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ एक और कार्रवाई पर विचार कर सकता है। हालांकि, किसी नई कार्रवाई को लेकर इन रिपोर्टों से आधिकारिक पुष्टि नहीं होती।
खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव, सुरक्षा पर सवाल
सऊदी अरब के एयरपोर्ट और तेल से जुड़े अहम ठिकानों पर हमलों की खबरों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन ड्रोन हमलों को नाकाम करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका अपने कुछ कर्मचारियों को सऊदी अरब छोड़ने के लिए कह रहा है।
इन घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या खाड़ी क्षेत्र में हमलों का दायरा और बढ़ेगा। फिलहाल, स्थिति पर क्षेत्रीय देशों और अमेरिका की प्रतिक्रिया पर नजर बनी हुई है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).