Pilibhit SIR Controversy: पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के मामले में दो पूर्व एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी समेत एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने बृहस्पतिवार को इसकी पुष्टि की। मामला पीलीभीत सदर विधानसभा सीट के 13,150 मतदाता रिकॉर्ड में कथित बदलाव से जुड़ा है।
13,150 रिकॉर्ड में बदलाव, DM ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जानकारी
पीलीभीत सदर विधानसभा सीट की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी आलोक कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच और कार्रवाई की जानकारी दी। इस मामले में कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 रिकॉर्ड में बदलाव किए गए।
कांग्रेस नेताओं का दावा था कि कुछ मतदाताओं के नाम हटाए गए और ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए, जो संबंधित क्षेत्र में नहीं रहते। पार्टी ने मतदाता पहचान पत्र यानी EPIC नंबर और क्रम संख्या समान रहने के बावजूद रिकॉर्ड में बदलाव होने पर भी सवाल उठाए थे। इन आरोपों की जांच की जा रही है।
दो पूर्व SDM और कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने पुष्टि की कि इस मामले में पूर्व एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। एक कंप्यूटर ऑपरेटर को भी आरोपी बनाया गया है। कंप्यूटर ऑपरेटर का नाम उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
इससे पहले दोनों पूर्व एसडीएम को जिला मुख्यालय से संबद्ध करने और VRC कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई सामने आई थी। अब FIR दर्ज होने से मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर आपराधिक जांच तक पहुंच गया है।
पत्रकारों ने पूछा—13,150 रिकॉर्ड कब तक ठीक होंगे?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों ने DM से पूछा कि 13,150 रिकॉर्ड में बदलाव का मामला सामने आने के बाद इन्हें ठीक करने में कितना समय लगेगा। इस पर जिलाधिकारी ने बताया कि काफी काम पूरा हो चुका है और बाकी रिकॉर्ड ठीक करने का लक्ष्य एक से दो दिन में पूरा करने का है।
उन्होंने यह भी बताया कि जांच केवल पीलीभीत सदर सीट तक सीमित नहीं रखी जाएगी। दूसरी विधानसभा सीटों के रिकॉर्ड भी जांचे जाएंगे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी इसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं हुई।
शिकायत के आठ दिन बाद कार्रवाई क्यों हुई?
पत्रकारों ने यह सवाल भी उठाया कि जब करीब आठ दिन पहले शिकायत की गई थी, तो कार्रवाई में इतना समय क्यों लगा। DM ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित ARO और SDM को निर्देश दिए गए थे और मामले की जांच जारी थी।
इस सवाल का महत्व इसलिए भी है क्योंकि मामला बड़ी संख्या में मतदाता रिकॉर्ड में कथित बदलाव से जुड़ा है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि शिकायत मिलने के बाद अलग-अलग स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और गड़बड़ी का पता लगने के बावजूद सुधार में कितना समय लगा।
क्या केवल कंप्यूटर ऑपरेटर जिम्मेदार है या बड़ा नेटवर्क भी है?
पत्रकारों ने यह भी पूछा कि क्या इस मामले में केवल कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था। DM ने लापरवाही और कार्रवाई की बात कही, लेकिन बड़े नेटवर्क की भूमिका को लेकर जांच जारी रहने की बात सामने आई।
यानी अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि पूरा मामला केवल एक ऑपरेटर तक सीमित है। जांच में यह देखना होगा कि रिकॉर्ड में बदलाव किस प्रक्रिया से हुए, किसकी अनुमति या लॉगिन का इस्तेमाल किया गया और अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की कोई भूमिका थी या नहीं।
क्या SDM के दबाव में लिए जा रहे थे OTP?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में OTP को लेकर भी सवाल उठे। पत्रकारों ने पूछा कि क्या कंप्यूटर ऑपरेटर से SDM के दबाव में OTP लेकर मतदाता रिकॉर्ड में बदलाव कराए जा रहे थे।
DM ने इस पहलू की जांच किए जाने की बात कही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस संबंध में किसी अधिकारी की जिम्मेदारी को अंतिम रूप से तय किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में OTP और कथित दबाव से जुड़े आरोपों को जांच के नतीजे आने तक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस ने की CBI जांच की मांग, SP ने भी उठाया था मुद्दा
इस मामले को लेकर कांग्रेस ने राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 21 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची में कथित बदलाव का मुद्दा उठाया था। पार्टी ने दावा किया कि 804 मतदाताओं के नाम हटाए गए और करीब 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए, जो संबंधित क्षेत्र में नहीं रहते। कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने मामले की CBI जांच की मांग की थी।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष धर्मेश गंगवार ने भी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग की थी। पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा ने इस मामले में कैबिनेट मंत्री और पीलीभीत के विधायक संजय सिंह गंगवार को लेकर आरोप लगाए थे। ये राजनीतिक आरोप हैं; इन्हें जांच में साबित तथ्य नहीं माना जा सकता। संबंधित आरोपों पर मंत्री का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
अब जांच और मतदाता रिकॉर्ड में सुधार पर नजर
फिलहाल इस मामले में दो पूर्व एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ FIR दर्ज होने की पुष्टि हो चुकी है। प्रशासन ने रिकॉर्ड में सुधार के लिए एक से दो दिन का लक्ष्य बताया है और अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी जांच की बात कही है।
अब जांच के दौरान यह साफ होना महत्वपूर्ण होगा कि 13,150 रिकॉर्ड में किस तरह के बदलाव हुए, इनके लिए कौन जिम्मेदार था और क्या इसमें अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आती है। साथ ही, मतदाता सूची में जिन लोगों के रिकॉर्ड प्रभावित हुए हैं, उनके विवरण सही तरीके से बहाल किए जाते हैं या नहीं, इस पर भी नजर रहेगी।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).