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जानिए प्रभु श्री राम की अग्नि परीक्षा का महत्व – फिर लौट कर आईं थी असली सीता

UP Desk – भक्तों और देवी सज्जनों आज हम आपको माता सीता की उस अग्नि परीक्षा के विषय पर बताएंगे। जो सुनते ही आपको यह लगेगा कि उन्होंने अपने जीवन का त्याग प्रभु श्री राम को समर्पित कर दिया था  हमेशा के लिए एक संदेश छोड़ा था। तो पढ़िए संकट मोचन मंदिर में एक संत के श्रीमुख से उक्त चौपाई में छिपे गूढ़ अर्थ को समझने का अवसर मिला। संत के अनुसार लोग ऐसा मानते हैं कि रावण वध के बाद सीता की अग्नि परीक्षा के बाद असली माता जानकी बाहर आईं और माया की सीता विलुप्त हो गईं।
 
 
सबसे पहले क्या आप श्री तुलसीदास जी की एक चौपाई का अद्भुत रहस्यमय अर्थ जानते हैं
 
जब लगि करहुँ निशाचर नाशा।
तुम पावक मँहु करहु निवासा।।
मुझे भी इस चौपाई का यही अर्थ पता था कि प्रभु श्री राम माता से कह रहे हैं कि जब तक वो निशाचरों का नाश नहीं कर देते तब तक माता जी अग्नि में निवास करें।
 
निशाचरों का नाश करना था प्रभु की अग्नि परीक्षा का महत्व
 
यह सत्य है कि माता सीता को अग्नि परीक्षा देना पड़ा था किंतु उस परीक्षा के बाद भी प्रभु श्री राम का आदेश मानते हुए वापस अग्नि में निवास करना पड़ा क्योंकि सभी निशाचरों का नाश करने का प्रभु का संकल्प अभी पूर्ण नहीं हुआ था।अभी प्रभु को अन्य लीलाएँ भी करनी थी जिनमें लव कुश का प्राकट्य भी एक लीला थी। सीता का पृथ्वी में समाहित होना और प्रभु का एक और मानवीय मनःस्थिति विवेचन भी शेष था।माता जानकी आज भी सदा की भाँति अग्नि में निवास करती हैं सृष्टि में निशाचरों का नाश करने के लिए प्रभु अपने विभिन्न अवतारों में आते हैं।
माता सीता के है दो रूप 
 
पद्म पुराण की कुछ कहानियों को आपस में जोड़ा जाए तो इससे ये बात सामने आती है कि रामायण में एक नहीं बल्कि दो सीता थीं। पहली मूल रूप माता सीता और दूसरी माया। अगर पद्म पुराण की कहानियों को सच मानें तो माता सीता को कोई अग्नि परीक्षा नहीं देनी पड़ी थी और ना ही उन्हें वनवास जाना पड़ा था। यही नहीं स्वयं भगवान राम भी माता सीता के इन दोनों रुपों के बारे में जानते थे। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सीता अग्नि देव की पूजा करती थीं और त्रेतायुग में ये धारणा थी कि अगर कोई व्यक्ति सच्चा है तो उसे अग्नि कोई नुकसान नहीं पहुंचाती। माता सीता की भक्ति से प्रसन्न होकर अग्नि देव ने अग्निपरीक्षा के दौरान सीता की जगह उनकी माया सीता को रखा जिसे रावण अपने साथ अपहरण करके लंका ले गया था!
अग्नि परीक्षा के बाद लौटी थी असली सीता माता 
 
ऐसा कहा जाता है कि जब सीता को भगवान राम ने रावण से बचाया था उसके बाद उन्होंने माया सीता से विनती की थी कि वो वापस चली जाएं और असली सीता वापस आ जाएं। इसीलिए सीता की अग्निपरीक्षा के दौरान असली सीता बाहर आयीं जिन्हें रावण छू भी नहीं पाया था।
यहाँ यह विचारणीय है कि माता सीता के चरित्र पर उंगली उठानेवाली प्रजा को जवाब देने के लिए जब राम ने सीता की अग्निपरीक्षा ली तो इससे ये साबित हो गया था कि वो पवित्र और निष्ठावान हैं!
 
जय माँ जानकी, जय श्री जानकी नाथ, जय श्री राम