Shrimad Bhagwat Katha – माता की कृपा से ध्रुव ने प्राप्त किया सर्वोच्य पद – कथा व्यास डॉ. रामकृपाल त्रिपाठी
श्रीमद् भागवत कथा – चकेरी के सनिगवां में जारी है भागवत कथा, तीसरे दिन किया गया सती का वर्णन
रिपोर्ट – रवि गुप्ता – विशेष सवांददाता – कानपुर नगर
Shrimad Bhagwat Katha – कानपुर के चकेरी स्थित सनिगवां में इन दिनों श्री मदभागवत कथा का आयोजन जारी है। जिसमें श्री धाम वृंदावन के कथा व्यास डॉ. रामकृपाल त्रिपाठी जी की मुखवाणी से कथा का उच्चारण किया जा रहा है। जिसके चलते परिसर का वातावरण एक मात्र भक्ति से सराबोर हो चुका है श्रद्धालु भी बड़ी मात्रा में आकर श्रीमद भागवत कथा को सुनकर आस्था के संगम को बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
तीसरे दिन सटी का हुआ वर्णन
लगातार जारी कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को सुन्दर सती चरित्र का वर्णन किया गया। श्री धाम वृंदावन के कथा व्यास डॉ. रामकृपाल त्रिपाठी ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सती ने भगवान शिव का स्थान यज्ञ में न देखकर क्रोध में अपनी देह का त्याग किया। इसके अलावा ध्रुव की तपस्या का व्याख्यान सुनाया। कहा कि बड़े- बड़े संतो को युगों-युगों तक भगवत प्राप्ति नहीं होती। जबकि ध्रुव को मात्र 5 वर्ष की आयु में ही भगवत प्राप्ति हुई। ध्रुव को यह परम गति उनकी माता की कृपा और उनके पुण्यों से प्राप्त हुई।
राजा जड़ भारत की कथा भी गई सुनाई
कथा में भक्तों ने राजा जड़ भरत की कथा का भी रसास्वादन किया। व्यास जी ने अजामिलोपख्यान के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि अजामिल को जब यम दूत लेने आए तो उन्होंने नारायण नाम लिया। इससे नारायण के दूतों ने यम से उसकी रक्षा कर भगवत धाम की प्राप्ति कराई। मुख्य यजमान स्वयं प्रकाश अवस्थी ने आरती कर कथा को विश्राम दिया। इस दौरान मुख्य श्रोता उपेंद्र, सौरभ, चैतन्य, मोहित, दिव्या, सूर्या आदि मौजूद रहे।
गोरखपुर में हाल ही में घटी एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे जिले को हिला दिया। पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवाद और तलाक की कचहरी में खिंचते मामले का नतीजा सरेआम खून-खराबे के रूप में सामने आया। पति ने दिनदहाड़े अपनी पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना ने न केवल पारिवारिक कलह की भयावहता को उजागर किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि सामाजिक और मानसिक तनाव किस तरह एक परिवार को तबाह कर सकता है
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