3

Recent News

UP Crime News: माँ-बहनों के सामने पिता ने बेटी 'साजिया' को मारी गोली; वजह आपके होश उड़ा देगी..

UP Crime News: मैनपुरी में अपनी पसंद से शादी करने को लेकर परिवार में चल रहे विवाद ने हिंसक रूप…

UP MLC Election 2026: घर बैठे पता करें अपना वोटिंग सेंटर, 23 अक्टूबर को मतदान; जानिए पूरी डिटेल्स..

UP MLC Election 2026: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के लिए मतदाताओं…

Accident News: वाराणसी में सेल्फी बनी 4 दोस्तों की आखिरी तस्वीर! ओवरब्रिज पर ट्रक ने रौंदा, 2 उछलकर 30 फुट नीचे गिरे..

Accident News: वाराणसी में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में चार दोस्तों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य…

UP Election 2027: अखिलेश ने बांटे लैपटॉप, BJP MLC बोले- ‘वोट देगा अहीर और लैपटॉप लेगा जहीर’; जानिए मामला..

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती दिख रही है। भाजपा MLC…

Tiger Shroff Firing Case: कोटा से पकड़े गए 3 शूटर, ट्रेन से जयपुर, फिर दिल्ली से नेपाल भागने का था प्लान..

Tiger Shroff Firing Case: मुंबई में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में राजस्थान पुलिस ने…

3

Recent News

UP Crime News: मैनपुरी में अपनी पसंद से शादी करने को लेकर परिवार में चल रहे विवाद ने हिंसक रूप…

UP MLC Election 2026: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव के लिए मतदाताओं…

Accident News: वाराणसी में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में चार दोस्तों की मौत हो गई, जबकि चार अन्य…

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाजी तेज होती दिख रही है। भाजपा MLC…

Tiger Shroff Firing Case: मुंबई में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के मामले में राजस्थान पुलिस ने…

Breaking News

जानिए कैसे शुरू हुई थी “गया” तीर्थ यात्रा – गयासुर को मिला था वरदान

“गया” तीर्थ क्या है ?

“गया” तीर्थ यात्रा

हिन्दू राष्ट्र भारत में जैसे ही पितृ पक्ष का समय आता है, तो कुछ लोग गया जी की यात्रा पर निकल पड़ते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गया तीर्थ यात्रा की शुरुआत कैसे हुई थी और कौन थे गया, साथ ही गया जी की पावन स्थली में में कौन-कौन विराजमान हैं। अगर नहीं जानते हैं तो आज हम आपको इस पावन से अवगत कराएंगे, और बताएंगे कैसे एक राक्षस प्रवत्ति में जन्मे गयासुर कैसे लोगों के पाप को दूर करने का परोपकार करने लगा। साथ ही जानेंगे आखिरकार कैसे गया तीर्थ की नीव रख दी गई, और सबसे पहले किसने पिंडदान किया था। क्योंकि यह भी कहा यह भी जाता है कि भगवान श्री राम ने अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान गया जी की तीर्थ यात्रा करके किया था।“गया” तीर्थ क्या है ?

सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी जब इस संसार की रचना कर रहे थे। तब उनसे असुर कुल में गयासुर नाम के असुर की उत्पत्ति हो गई। “गयासुर” असुरों की संतान रूप में पैदा नहीं हुआ था। इसलिए उनके स्वभाव में आसुरी प्रवृत्ति के आचरण नहीं थे। इसलिए गयासुर देवताओं की आराधना में लीन बने रहते थे, लेकिन गयासुर के मन में एक वहम हमेशा उन्हें परेशान किया करता था। जिसमे वह अक्सर विचार किया करते थे कि भले ही वह संत प्रवृत्ति के हैं, पर असुर कुल में जन्म होने के कारण उन्हें कभी भी सम्मान नहीं मिले सकेगा। इसलिए क्यों न इतना पुण्य अर्जित किया जाए, कि उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हो जाए। 

 

इसके लिए गयासुर ने कठोर तपस्या शुरू कर दी। जिसको देख भगवान विष्णु जी प्रसन्न हो गए, फिर एक दिन विष्णु जी ने गयासुर को अपने दर्शन देकर मनचाहा वरदान मांगने को कहा। इस बात को सुनकर गयासुर ने भगवान से मांगा कि प्रभु आप मेरे शरीर में वास कर जाएं। ताकि जो भी मुझे देखे तो उसके सारे पाप दूर हो जाएं और वह पुण्यात्मा हो जाए साथ ही उसे स्वर्ग में स्थान मिल सके। गयासुर को उनका मनचाहा वरदान मिल गया। जिसके बाद वह भ्रमण करते हुए लोगों के पाप दूर करने लगे। जो भी उन्हें देख लेता था तो उसके पाप नष्ट हो जाते थे और वह स्वर्ग का अधिकारी हो जाता था। इस अचंभित चमत्कार को देख यमराज परेशान हो गए। समाधान के लिए यमराज ने ब्रह्माजी के पास पहुंचे और पूरे मामले से अवगत कराया और कहा कि अगर गयासुर को न रोका गया तो स्वर्गलोक और नरक लोक का विधान खत्म हो जाएगा। इस बात को सुनते ही ब्रह्माजी ने एक उपाय निकाला।

 

ब्रह्मा जी तुरंत गयासुर के पास पहुंच गए और गयासुर के शरीर को पवित्र बताते हुए उनकी पीठ पर देवताओं संग बैठ कर यज्ञ करने को कहा। गयासुर ने अपने आपको धन्य मानकर ब्रह्मा जी के आदेश को स्वीकार कर लिया। ब्रह्माजी सभी देवताओं के साथ पत्थर से गया को दबाकर पीठ पर बैठ गए, और यज्ञ की शुरुआत की लेकिन सभी का मुख्य मकसद गयासुर के भ्रमण को रोकना था पर गयासुर ने अपना घूमना बंद नहीं किया। जिसको लेकर यज्ञ में शामिल सभी देवता चिंतित हो गए और स्वयं श्री हरि को यज्ञ में शामिल करके गयासुर को भी देवताओं के साथ बैठ जाएं तो गयासुर अचल हो जाएगा। 

.

श्री विष्णु जी को भी सभी देवताओं के साथ अपने शरीर पर बैठा देखकर गयासुर अपने आप को और धन्य मान बैठे। फिर अंत में गयासुर ने सभी देवताओं का सम्मान करते हुए अपने आराध्य श्री हरि से कहा कि प्रभु अब मैं अचल हो रहा हूं। जिसके चलते यह शपथ लेता हूं कि अब से वः लोगों के पाप हरने का कार्य बंद कर देंगे। भगवान विष्णु जी  गयासुर की इस वाणी को सुनकर प्रसन्न हो गए और एक बार फिर वरदान मांगने तो कहा।

गयासुर ने श्री नारायण से कहा कि प्रभु मेरी इच्छा है कि आप सभी देवताओं के साथ अप्रत्यक्ष रूप से मेरी शिला पर विराजमान हो जाएं और इस स्थान को मृत्यु के बाद किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठानों के लिए तीर्थ स्थल की घोषणा कर दी जाए। श्री विष्णु ने आशीर्वाद दिया कि जहां गया स्थापित हुआ। वहां पितरों के श्राद्ध-तर्पण आदि करने से मृत आत्माओं को पीड़ा से मुक्ति मिलेगी। तब से इस क्षेत्र का नाम गयासुर के अर्ध भाग “गया” नाम से तीर्थ रूप में विख्यात हो गया।