रिपोर्ट : अश्वनी पाठक
छिबरामऊ सरकारी स्कूल का नाम आते ही आपके सामने टूटी छत, गिरते प्लास्टर, ज़मीन पर पढ़ रहे बच्चे और कुर्सियों पर उंघते टीचर जैसी छवि दिमाग में आ जाती होगी लेकिन छिबरामऊ के कल्यानपुर गाँव में बना यह सरकारी स्कूल आपकी छवि से बिल्कुल अलग है। इस स्कूल बच्चों के लिए वो सारी सुविधाएं है जो किसी कॉन्वेंट स्कूल के बच्चे को मिलती है।

कन्नौज जिले के छिबरामऊ विकासखंड में कल्यानपुर गाँव है जहां पर शासकीय उन्नत प्राथमिक अंग्रेजी शाला है। इस सरकारी स्कूल में ज्यादातर ऐसे बच्चों की संख्या जिन्होंने प्राइवेट स्कूल छोड़कर आए है। शासकीय प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका पूजा पांडेय, बतातीं हैं, “हम बच्चों को पढ़ाने के लिए कंप्यूटर और उन्नत तकनीक का उपयोग करते हैं ताकि बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समझ आ सके। बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने के लिए हम शिक्षक आपस में चर्चा भी करते हैं।” स्कूल में हो रही पढाई, वातावरण में शिक्षकों के साथ स्कूल प्रबंधन समितियों की मेहनत भी शामिल है। इन सभी के मदद से आज इस स्कूल की चर्चा कई जिले में की जाती है। शिक्षा के क्षेत्र पूजा पांडेय प्रधानाध्यापिका ने एक अध्ययन किया और यह पाया की देश में ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं जहाँ बच्चों की दाखिला न केवल बढ़ रही है बल्कि प्राइवेट स्कूल से बच्चे वापस सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं।

पांचवी कक्षा में पढ़ रहे अर्पित राठौर स्कूल इसलिए पंसद है क्योंकि पढ़ाई के साथ उनको खेलने को भी मिलता है।”हमें स्कूल आना अच्छा लगता है क्योंकि हमको पढ़ने के साथ खेलने को भी मिलता है।” निषाद ने बताया। इस स्कूल में वर्ष 22 में 261 जहां बच्चे थे वहां आज 305 बच्चे पढ़ रहे हैं। शिक्षकों के प्रयासों से अब इस गाँव के स्कूल में दर्ज संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ने पर किया गया वार्षिक उत्सव का आयोजन
प्राथमिक विद्यालय कल्यानपुर में वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया जिसमें सभी बच्चों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया बच्चों ने खेल, पढ़ाई और डांस जैसे प्रोग्राम में प्रतिभाग किया बच्चों ने आओ करके सीखें निपुण से संबंधित खेल बहुत मन से खेला जिसमें तीन बच्चों को प्रतिभाग करना था और वर्णमाला से संबंधित शब्द एक लाइन में रखने थे जिस बच्चे ने शब्द एक लाइन में जल्दी रख दिए वो विनर घोषित हुआ उसको ट्रॉफी दी गई वहीं प्रधानाध्यापिका पूजा पांडेय ने बताया इस खेल से बच्चों में पढ़ाई के प्रति ध्यानाकर्षण होता है और बच्चों ने मेरे घर राम आए हैं पर बहुत सुंदर डांस प्रस्तुति की वहीं उन्होंने कहा वार्षिकोत्सव जैसे कार्यक्रम से बच्चों में नई ऊर्जा का संचार होता है