लाल इमली मिल में लाखों रुपए के वेतन घोटाले के मामले में दो रिटायर अफसरों का 50 लाख रुपए का भुगतान रोक दिया गया है। इन दोनों अफसरों पर वेतन घोटाले का आरोप है। तीसरा आरोपी अफसर अक्टूबर में रिटायर होने वाला है। जिन चार अफसरों को चार्जशीट दी गई थी, उनकी अलग से जांच शुरू की गई है। इसके अलावा, विजिलेंस के दूसरे अधिकारियों ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है।इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि घोटाले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।

अफसर षड्यंत्र के तहत डाला था खातों में पैसा
जो कर्मचारी काम नहीं करते थे, उनके खातों में 23 लख रुपए भेज दिए गए थे। इसके अलावा डैमेज शुल्क में 29 लख रुपए की हेरा फेरी मिली थी। सूत्रों ने बताया कि जांच में बी आई सी ने राखी सेठी, लाल इमली इंचार्ज सी के मौर्य ,अकाउंट ऑफिसर विनय मिश्रा धनराशि स्वीकृत करने वाले अधिकारी मनोज शुक्ला पर कार्रवाई करके कारण बताओं नोटिस और चार्जशीट दी थी। यह शुरुआती जांच में सामने आ चुका है कि अफसर ने षड्यंत्र के तहत प्रशासनिक और व्यक्तिक विभाग से अनुमति दिए बिना खाता खोले और धन भी उन खातों में भेजा विजिलेंस अफसर को जल्द जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
वेतन पीएफ ग्रेविटी भुगतान आदि रोके गए
घोटाले की रकम रिकवर करने के तहत कार्रवाई की गई है बी के मौर्य और राखी सेठी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लाल इमली ने इन दोनों आरोपियों के रिटायरमेंट संबंधी सारे भुगतान रोक दिए हैं। इसमें वेतन, पीएफ,ग्रेच्युटी भुगतान आदि शामिल हैं। दोनों का करीब 25-25 लाख भुगतान रोका गया। है मनोज शुक्ला अक्टूबर में रिटायर होंगे और विनय मिश्रा 2025 तक है।विजिलेंस और चार्ज शीट मामले की जांच के बाद इन पर सरकारी धन के दुरुपयोग और घोटाला करने की एफआईआर दर्ज कराई जानी है। सूत्रों के मुताबिक सभी ने जानबूझकर वेतन में घोटाला किया है।