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Haryana Assembly Elections: दिलचस्प है हरियाणा विधानसभा चुनाव का इतिहास, जमकर हुई है राजनीतिक उठक-पटक

Haryana Assembly Elections: हरियाणा में 2024 विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव आयोग ने हाल ही में हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीखों में संशोधन किया है। अब राज्य में 5 अक्टूबर 2024 को मतदान होगा और 8 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। इससे पहले यह चुनाव 1 अक्टूबर को होने थे। जिसके चलते चुनावी तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं और सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।

क्यों बदली गई मतदान की तारीखें

चुनाव आयोग ने हरियाणा के लिए मतदान की तारीख में बदलाव इसलिए किया, क्योंकि बिश्नोई समाज 2 अक्टूबर को आसोज अमावस्या का त्योहार मनाता है। यह त्योहार उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और हजारों बिश्नोई परिवार राजस्थान यात्रा पर जाते हैं। इसलिए, चुनाव आयोग ने उनके अधिकारों का सम्मान करते हुए मतदान की तारीख को 5 अक्टूबर किया है।

हरियाणा विधानसभा का राजनीतिक इतिहास

हरियाणा में इस समय चुनाव के चलते राजनीतिक हलचल तेज है। लेकिन इतिहास में भी हरियाणा के विधानसभा चुनाव हमेशा से दिलचस्प रहे हैं। आज इस लेख में हम हरियाणा विधानसभा चुनाव का इतिहास खंगालने की कोशिश करेंगे।

आपको बता दें कि हरियाणा विधानसभा की स्थापना 1 नवंबर 1966 को हुई थी। शुरुआत में इसमें 54 सीटें थीं, लेकिन 1977 में यह संख्या बढ़ाकर 90 कर दी गई। हरियाणा की विधानसभा में एकसदनीय प्रणाली है और हर पांच साल में चुनाव होते हैं। सबसे पहले भगवत दयाल शर्मा ने 1 नवंबर 1966 को हरियाणा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से पहले विधानसभा चुनाव जीता। उनके बाद राव बीरेन्द्र सिंह ने विशाल हरियाणा पार्टी से मुख्यमंत्री पद संभाला, लेकिन उनका कार्यकाल लंबा नहीं चला।

हरियाणा की राजनीति में बंसी लाल का खास स्थान है, जिन्होंने दो बार मुख्यमंत्री पद संभाला। 21 मई 1968 से लेकर 1972 तक उनके कार्यकाल को राज्य के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए याद किया जाता है। इसके बाद 1986 में उन्होंने फिर से सत्ता संभाली और राज्य को नई दिशा देने में योगदान दिया।

इसी प्रकार, देवी लाल और भजन लाल भी हरियाणा की राजनीति के प्रमुख चेहरे रहे हैं। देवी लाल का कार्यकाल 1977 में शुरू हुआ और उन्होंने जनता पार्टी से सत्ता प्राप्त की, जबकि भजन लाल ने 1979 में कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद संभाला।

खास रहा 1987 का हरियाणा विधानसभा चुनाव

1987 का हरियाणा विधानसभा चुनाव एक ऐतिहासिक चुनाव था, जिसमें चौधरी देवीलाल ने कांग्रेस को बुरी तरह परास्त कर राज्य की राजनीति में नए युग की शुरुआत की। यह चुनाव हरियाणा की राजनीति में क्षेत्रीय दलों के उदय और कांग्रेस के प्रभाव में कमी का प्रतीक बना। इस चुनाव में चौधरी देवीलाल के नेतृत्व वाली पार्टी लोकदल ने जबरदस्त जीत दर्ज की और कांग्रेस को एक बड़ी हार का सामना करना पड़ा।

1987 के चुनाव से पहले हरियाणा में कांग्रेस की मजबूत पकड़ थी, लेकिन जनता में बदलाव की लहर साफ देखी जा रही थी। चौधरी देवीलाल, जो किसान और ग्रामीण समाज के मसीहा माने जाते थे, ने कांग्रेस सरकार की नीतियों के खिलाफ व्यापक जनसमर्थन जुटाया। उन्होंने किसानों, मजदूरों और ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया, जिसका उन्हें बड़ा फायदा मिला।

1987 के चुनाव में लोकदल ने रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन करते हुए कुल 90 में से 85 सीटें जीतीं। यह जीत हरियाणा की राजनीति में कांग्रेस के खिलाफ एक जनादेश के रूप में देखी गई। कांग्रेस को इस चुनाव में केवल 5 सीटें मिलीं, जो उसके इतिहास की सबसे बड़ी हारों में से एक थी।

चुनाव के बाद, चौधरी देवीलाल को हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में कई किसान-हितैषी और सामाजिक सुधारों पर जोर दिया। उनकी सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने और बिजली व पानी की दरों को कम करने जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।

कांग्रेस की वापसी

1987 में कांग्रेस को करारी हार मिलने के बाद अब कांग्रेस को 1991 विधानसभा चुनाव का इंतजार था। 1991 में चुनाव हुए और कांग्रेस ने वापसी करते हुए हरियाणा में अपनी सरकार बनाई और एक बार फिर भजन लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 1996 में एक बार HVP की सरकार आई, जिस दौरान बंसी लाल को हरियाणा की कमान मिली और 2000 में INLD की सरकार बनी, जिसमें ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री रहे।

वहीं 2005 और 2009 में दो बार लगातार कांग्रेस की सरकार रही, जिसमें हरियाणा की राजनीति का जाना माना चेहरा ‘भूपेंद्र सिंह हूडा’ मुख्यमंत्री रहे। बताते चलें कि पिछले दो बार यानी 2014 और 2019 में बीजेपी ने कांग्रेस को हराकर सत्ता हासिल की थी। बीजेपी ने लगातार दोनों ही बार मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि, 2019 में भाजपा और JJP का गठबंधन हुआ था। मई 2024 में JJP ने अपना समर्थन वापस ले लिए। जिसके चलते रणनीति के तहत बीजेपी ने फिलहाल मोहन लाल खट्टर से इस्तीफा लेकर ‘नायाब सिंह सैनी’ को मुख्यमंत्री बना दिया।

2024 में क्या होंगे मुद्दे

गौरतलब है कि आने वाले दो महीने हरियाणा की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 अगले पांच वर्षों के लिए प्रदेश का नेतृत्व तय करेगा। कुल 90 सीटों पर होने वाले इस चुनाव में कृषि नीतियों, आर्थिक विकास, रोजगार और ग्रामीण बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

भारतीय जनता पार्टी (BJP), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC), और जननायक जनता पार्टी (JJP) जैसे प्रमुख राजनीतिक दल चुनावी मैदान में उतरेंगे। जानकारों का मानना है कि इस चुनाव में मतदाता भागीदारी, राजनीतिक गठबंधन और जातीय समीकरण महत्वपूर्ण कारक साबित होंगे।