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सघन क्षय रोग खोजी अभियान: 7 दिसंबर 2024 से 100 दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत

सघन क्षय रोग खोजी अभियान:  पीलीभीत में 100 दिवसीय सघन क्षय रोग खोजी कार्यक्रम का उद्घाटन

सघन क्षय रोग खोजी अभियान:  7 दिसंबर 2024 को उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत में 100 दिवसीय सघन क्षय रोग खोजी अभियान की शुरुआत की गई। इस अभियान की शुरुआत राज्य मंत्री गन्ना विकास एवं चीनी मिलें, संजय सिंह गंगवार ने गांधी सभागार कलेक्ट्रेट में की। कार्यक्रम में मंत्री ने मेडिकल यूनिट बैंक को हरी झंडी दिखाकर अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर विधायक स्वामी प्रवक्तानंद भी उपस्थित रहे, जिन्होंने स्वास्थ्य सेवा की दिशा में इस महत्वपूर्ण कदम को सराहा।

सघन क्षय रोग खोजी अभियान:  आधिकारिक जानकारी और अभियान की शुरुआत

सघन क्षय रोग खोजी अभियान: मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आलोक कुमार द्वारा कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि यह 100 दिवसीय अभियान 7 दिसंबर 2024 से लेकर 25 मार्च 2025 तक चलेगा। इस दौरान विशेष रूप से 60 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों, कुपोषित जनसंख्या, मधुमेह रोगी, धूम्रपान और नशे की लत वाले लोगों, और टीबी मरीजों के संपर्क में रहने वाले व्यक्तियों की जांच की जाएगी। इन सभी वर्गों को चिन्हित कर शीघ्र उपचार प्रारंभ किया जाएगा, ताकि समय पर इलाज से क्षय रोग पर काबू पाया जा सके।

सघन क्षय रोग खोजी अभियान: कुपोषित लोगों के लिए पोषण पोटली वितरण

सघन क्षय रोग खोजी अभियान:

सघन क्षय रोग खोजी अभियान:100 दिवसीय सघन क्षय रोग खोजी अभियान के शुभारंभ का दृश्य
सघन क्षय रोग खोजी अभियान:100 दिवसीय सघन क्षय रोग खोजी अभियान के शुभारंभ का दृश्य

इस अभियान के तहत 27

सघन क्षय रोग खोजी अभियान:100 दिवसीय सघन क्षय रोग खोजी अभियान के शुभारंभ का दृश्य
सघन क्षय रोग खोजी अभियान: टीबी रोगियों को पोषण पोटली वितरित

की गई, जो उनकी सेहत में सुधार करने के उद्देश्य से दी गई। पोषण पोटली में कुपोषित व्यक्तियों को आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स प्रदान किए गए हैं, ताकि उनके शरीर को पर्याप्त पोषण मिल सके और वे रोगों से लड़ने में सक्षम हो सकें। इस वितरण समारोह में राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार और विधायक स्वामी प्रवक्तानंद ने इन पोषण पोटलियों को मरीजों में वितरित किया।

अभियान के तहत चिन्हित किए जाने वाले लक्ष्य समूह

इस अभियान में विशेष ध्यान उन लोगों पर केंद्रित किया जाएगा जोइस प्रकार हैं,

  1. 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग: जिनकी उम्र ज्यादा है और जो आमतौर पर स्वास्थ्य जांच से दूर रहते हैं।
  2. कुपोषित लोग: जिनकी बीएमआई 18.5 किग्रा/मी² से कम है।
  3. मधुमेह रोगी: जो अपने रोग से अवगत हैं, लेकिन इलाज नहीं करवा रहे हैं।
  4. धूम्रपान और नशा करने वाले लोग: जो जीवनशैली की आदतों के कारण टीबी जैसी गंभीर बीमारी के शिकार हो सकते हैं।
  5. टीबी रोगियों के संपर्क में रहने वाले लोग: जिनके आसपास टीबी के मरीज रहते हैं, वे भी बीमारी के शिकार हो सकते हैं।
  6. टीबी के इलाज को पूरा करने वाले मरीज: जिनकी दवाइयां पूरी हो चुकी हैं, लेकिन निगरानी आवश्यक है।
  7. एचआईवी से संक्रमित लोग: जिनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है और जो टीबी के प्रति संवेदनशील होते हैं।

टीबी के खिलाफ जागरूकता और उपचार की महत्वता

मंत्री संजय सिंह गंगवार ने इस अभियान के महत्व को बताते हुए कहा कि भारत में क्षय रोग (टीबी) की समस्या एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है, जिसे समाप्त करने के लिए यह सघन अभियान आवश्यक है। टीबी की पहचान और इलाज में देरी से ना केवल रोगी की सेहत पर असर पड़ता है, बल्कि यह समाज में फैलने की संभावना भी बढ़ाती है। इस अभियान के जरिए पीलीभीत और उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में टीबी के मामलों की शीघ्र पहचान और इलाज शुरू किया जाएगा।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी की भूमिका और कार्यप्रणाली

डॉ. आलोक कुमार ने बताया कि यह अभियान ना केवल स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक बड़ी पहल है, बल्कि इसमें लोगों की जागरूकता और भागीदारी भी जरूरी है। टीबी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे घर-घर जाकर टीबी के मामलों की पहचान कर सकें। इसके अलावा, स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।

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कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्ति

कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर, डॉ. अशोक रस्तोगी, संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य भवन लखनऊ, डॉ. भरतेश सेट्टी, यूपीटीएसयू, डॉ. हरिदत्त नेमी, जिला टीबी अधिकारी सहित अन्य महत्वपूर्ण लोग उपस्थित थे। इन सबने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई और पूरी तरह से सहयोग देने की बात कही।

अभियान के प्रभाव और भविष्य की दिशा

यह 100 दिवसीय सघन क्षय रोग खोजी अभियान एक लंबी लड़ाई का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है कि इस अभियान को दूसरे जनपदों में भी फैलाया जाए और टीबी जैसी महामारी को समय रहते नियंत्रित किया जाए। भविष्य में, टीबी के खिलाफ जागरूकता अभियान और स्वास्थ्य जांच की प्रक्रिया को और भी बेहतर किया जाएगा ताकि जल्द से जल्द क्षय रोग को समाप्त किया जा सके।

निष्कर्ष
सघन क्षय रोग खोजी अभियान न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर में स्वास्थ्य सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अभियान टीबी की गंभीरता को समझने, इसके इलाज की प्रक्रिया को सुलभ बनाने और सभी नागरिकों को स्वस्थ रखने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके जरिए न केवल टीबी को नियंत्रित किया जाएगा, बल्कि कुपोषण, शारीरिक कमजोरी और अन्य संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए भी एक सशक्त प्रयास होगा।

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