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कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: 3 की मौत, 18 श्रद्धालु घायल

उत्तराखंड में कैंटर पलटी, चल रहा कांवड़ शिविर – 3 श्रद्धालुओं की मौत, 18 घायल

कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: सेवा-श्रद्धा के संकल्प के साथ निकले थे बुलंदशहर के श्रद्धालु

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद क्षेत्र से दर्जनों श्रद्धालु उत्तराखंड के गंगोत्री और यमुनोत्री में कांवड़ यात्रा शिविर (भंडारा) लगाने के लिए रवाना हुए थे। उनका उद्देश्य था यात्रा पर आने वाले लाखों शिवभक्तों को भोजन, जल और चिकित्सा की सेवा देना। लेकिन इस सेवा भाव की यात्रा एक दर्दनाक हादसे में बदल गई।

नरेंद्र नगर के पास ब्रेक फेल होने से कैंटर पलटा

श्रद्धालुओं से भरा एक कैंटर जैसे ही गंगोत्री–ऋषिकेश मार्ग पर स्थित नरेंद्र नगर के पास पहुंचा, अचानक वाहन के ब्रेक फेल हो गए। ड्राइवर वाहन पर काबू नहीं रख सका और कैंटर गहरी ढलान पर जाकर पलट गया।

दुर्घटना में तीन श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 18 अन्य श्रद्धालु घायल हो गए, जिनमें कई की हालत गंभीर है।

कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: मृतकों में महिलाएं भी शामिल, घायलों में कई बुजुर्ग

हादसे में मृत श्रद्धालुओं में दो महिलाएं और एक पुरुष शामिल हैं। जबकि घायलों में कई बुजुर्ग और युवा महिलाएं शामिल हैं जो शिविर में सेवा कार्यों के लिए निकली थीं। सभी घायलों को ऋषिकेश के सरकारी अस्पताल, देहरादून मेडिकल कॉलेज और आसपास के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

 SDRF और स्थानीय पुलिस ने चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

दुर्घटना की सूचना मिलते ही उत्तराखंड SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। पलटे हुए कैंटर में फंसे श्रद्धालुओं को क्रेन और हाइड्रोलिक कटर की मदद से निकाला गया। कई घायल श्रद्धालुओं को रेस्क्यू कर फौरन एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया। SDRF की त्वरित कार्रवाई से कई जानें बचाई जा सकीं।

बुलंदशहर में मातम, गांवों में पसरा सन्नाटा

जैसे ही हादसे की खबर बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद पहुंची, मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन श्रद्धालुओं के परिजन घायल हैं, वे लगातार संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू की है।

 हादसे की वजह: ब्रेक फेल या ओवरलोडिंग?

प्राथमिक जांच में हादसे का कारण ब्रेक फेल होना बताया गया है, लेकिन ओवरलोडिंग और चालक की लापरवाही की भी आशंका जताई जा रही है। हादसे के समय वाहन में 36 से अधिक श्रद्धालु सवार थे, जबकि कैंटर का यह क्षमता से कहीं अधिक भार था।

उत्तराखंड पुलिस ने वाहन चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। साथ ही वाहन के कागजात और तकनीकी जांच भी कराई जा रही है।

कांवड़ यात्रा में बड़ा हादसा: प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या तीर्थ यात्रा के दौरान सेवाभाव से निकले लोगों की सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं?
हर साल लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में भाग लेते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए पुख्ता व्यवस्था और सुरक्षित यातायात साधन मुहैया कराना प्रशासन का कर्तव्य है।

 सरकार से मांग: मुआवजा और जिम्मेदारियों की तय सीमा

मृतकों के परिवारों के लिए 20 लाख रुपये तक का मुआवजा, घायलों के लिए नि:शुल्क इलाज और पुनर्वास, और भविष्य में कांवड़ शिविर सेवकों के लिए यात्रा बीमा योजना की मांग की जा रही है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सरकार से स्पीडी ट्रायल और ट्रांसपोर्ट नियमों के कड़े पालन की अपील की है।

श्रद्धा की राह में सतर्कता भी ज़रूरी

यह हादसा हम सबको एक गहरा सबक देता है—सेवा और श्रद्धा के साथ-साथ सुरक्षा और सावधानी भी उतनी ही जरूरी है। चाहे वह कांवड़ यात्रा हो या तीर्थ यात्रा, प्रशासन और स्वयंसेवी दोनों को यह समझना होगा कि जीवन की रक्षा सर्वोपरि है।

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