दर्द की दास्तां: कांवड़ शिविर के नाम पर उठा कारवां मातम में बदल गया
बुलंदशहर से निकले शिवभक्त, गंगोत्री में कांवड़ शिविर लगाने जा रहे बुलंदशहर के विक्की (30), सुनील प्रजापति और संजय उर्फ मास्टर जी की दर्दनाक मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।
विक्की की बूढ़ी मां बेसुध पड़ी हैं, घर में सबसे बड़ा बेटा था, जिम्मेदारियों का बोझ उसी के कंधों पर था।
सुनील प्रजापति, जो सबका चहेता था, उसका 17 वर्षीय बेटा तुषार भी हादसे में घायल हुआ है – एक ही परिवार पर दोहरी मार पड़ी है।
मास्टर जी, जिन्हें समाज में सम्मान से देखा जाता था, आज उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा।
तीनों परिवारों में रोने की ऐसी चीखें उठ रही हैं, जैसे किसी ने जीवन की बुनियाद ही छीन ली हो। उनकी मांओं की सिसकियाँ, पत्नियों की बेहोशी और बच्चों की खामोश आंखें… ये मंजर पत्थर को भी पिघला दे।
घायलों की चीखें: अस्पताल में तड़पती हैं उम्मीदें
इस हादसे में घायल 18 श्रद्धालु, जिनमें से कुछ की हालत बेहद गंभीर है, अभी भी अस्पताल में ज़िंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
ईश्वर सैनी, अतर सिंह, रवि, कुलदीप, झम्मन सिंह, मुकेश मित्तल, प्रेम सिंह, जुगनू, तुषार, भजनलाल, लेखराज, टिंकू, मूलचंद, राहुल, नकुल, बिशन और विनीत – ये वो नाम हैं जो सेवा की भावना से चले थे और अब दर्द की आगोश में हैं।
घायलों के परिवारजन अस्पतालों में रोते-बिलखते इधर-उधर दौड़ रहे हैं। कोई डॉक्टर से पूछ रहा है “अब्बू बचेंगे क्या?” तो कोई एंबुलेंस के पीछे-पीछे रोते हुए अस्पताल तक पहुंचा है। 4 साल का नकुल, जो अपने पिता राहुल के साथ सेवा में गया था, अब मासूम आंखों से सबको देख रहा है, समझ नहीं पा रहा कि क्या हो गया है।
गांव में पसरा मातम: हर दरवाज़े पर सन्नाटा, हर आंख में आंसू
बुलंदशहर से निकले शिवभक्त, सिकंदराबाद कस्बे के हर गली, हर मोहल्ले में मातम पसरा है। शिवशक्ति कमान सेवा ट्रस्ट का ये कांवड़ जत्था गांव की पहचान था, और अब उसकी वापसी शोक में बदल गई है।
जहां हर साल लोग फूल-मालाओं से यात्रियों को विदा करते थे, आज वहां चादर ओढ़े शव और चुपचाप चलती एंबुलेंसें लौटी हैं।
घरों में पूजा की घंटियों की जगह अब रोने की आवाजें हैं, मंदिर के पास जले दीये भी अब बुझते से लग रहे हैं।
लोगों की आंखों में सिर्फ सवाल हैं—क्या यही सेवा का फल है? क्या हमारी आस्था इतनी कमजोर थी कि उसे इस तरह तोड़ दिया गया?
प्रशासनिक सांत्वना: अफसर पहुंचे ढाढ़स बंधाने
हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। सिकंदराबाद के एसडीएम संतोष कुमार और सीओ भास्कर मिश्रा ने गांव पहुंचकर मृतकों के परिजनों को ढाढ़स बंधाया। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया और कहा कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ा है।
वहीं उत्तराखंड में SDRF और पुलिस टीम ने साहसिक रेस्क्यू कर सभी 21 श्रद्धालुओं को खाई से बाहर निकाला, जो राहत की एक छोटी किरण थी। AIIMS ऋषिकेश में भर्ती गंभीर घायलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
यह सिर्फ हादसा नहीं, श्रद्धा पर चोट है
जो श्रद्धालु हर साल ‘हर-हर महादेव’ की गूंज के साथ कांवड़ शिविर लगाते थे, उनकी यात्रा इस बार मौत की गवाही बन गई। ये हादसा सिर्फ एक ट्रक पलटने का मामला नहीं है—ये एक गांव के टूटे भरोसे, एक समाज की पीड़ा, और श्रद्धा पर लगे सबसे गहरे घाव की कहानी है।