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JE ने ट्रेन के आगे कूदकर की आत्महत्या, सिर धड़ से अलग – एक्सईएन पर प्रताड़ना का गंभीर आरोप

शाहजहाँपुर में ट्रेन से कटकर सिंचाई विभाग के जेई ने दी जान – एक्सईएन की प्रताड़ना से था डिप्रेशन में, सिर हुआ धड़ से अलग, परिवार ने लगाए गंभीर आरोप!

JE ने ट्रेन के आगे कूदकर की आत्महत्या:शासन की जीरो टॉलरेंस नीति को खुली चुनौती- अफसरशाही ने ले ली ईमानदार की जान?

योगी सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त, जवाबदेह प्रशासन की नीतियों को एक बार फिर शर्मसार कर देने वाली घटना शाहजहाँपुर में सामने आई है। सिंचाई विभाग में कार्यरत 36 वर्षीय जूनियर इंजीनियर संतोष कुमार ने खुदकुशी कर ली। आत्महत्या का तरीका इतना झकझोर देने वाला है कि जिसने भी देखा, वह कांप गया—रेलवे ट्रैक पर लेटकर ट्रेन के आगे जान देना, और वह भी सिर धड़ से अलग हो जाए, यह कोई आम घटना नहीं, बल्कि सिस्टम के अत्याचार की खौफनाक चीख है।

JE ने ट्रेन के आगे कूदकर की आत्महत्या: परिजनों ने लगाया एक्सईएन पर प्रताड़ना का आरोप, आत्मसम्मान बचाने को दी जान

मृतक के परिजनों ने बताया कि दो महीने पहले संतोष कुमार का अपने विभाग के सबसे बड़े अधिकारी एक्सईएन से विवाद हुआ था। एक्सईएन उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहे थे, काम का अनावश्यक दबाव, मानसिक शोषण और तानाशाही जैसा व्यवहार कर रहे थे।
संतोष बार-बार कहते थे:

“मुझे हर दिन ऐसा लगता है कि मेरा दम घुट रहा है… मैं ईमानदारी से नौकरी करना चाहता हूँ, लेकिन मुझे घेर कर मारा जा रहा है।”

ड्यूटी के नाम पर अपमान, सच्चाई के रास्ते पर चलना बना मौत की वजह

संतोष कुमार शाहजहाँपुर में नलकूप खंड सिंचाई विभाग में जेई के पद पर तैनात थे और अपनी ससुराल के एमनजई जलालनगर मोहल्ले में रह रहे थे। वे बेहद शालीन, कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार अधिकारी के तौर पर जाने जाते थे।
परिजनों का कहना है कि संतोष को सिर्फ इसलिए टारगेट किया गया क्योंकि वो घूसखोरी में शामिल नहीं थे, और हर कार्य नियमों के अनुसार करते थे।
बड़े अफसरों को यही रास नहीं आया, और फिर शुरू हुआ मानसिक प्रताड़ना का सिलसिला, जो अंतत: मौत पर जाकर खत्म हुआ।

JE ने ट्रेन के आगे कूदकर की आत्महत्या: रेलवे ट्रैक बना प्रताड़ना का अंतिम पड़ाव: यात्रियों ने देखा खौफनाक मंजर

घटना शाहजहाँपुर रेलवे स्टेशन की है, जहां संतोष कुमार ने पंजाब मेल के सामने ट्रैक पर लेटकर आत्महत्या कर ली।
ट्रेन सिर के ऊपर से निकल गई और सिर शरीर से अलग हो गया
यह दृश्य इतना खौफनाक था कि वहां मौजूद यात्रियों ने तत्काल जीआरपी को सूचना दी।
शव की पहचान कपड़ों और आईडी कार्ड से हुई।

मृतक के साले की माने तो – सिस्टम से टकराना मौत को बुलाना है!

मृतक के साले अमित ने खुलासा किया कि दो महीने पहले एक्सईएन से विवाद के बाद वह और उनका परिवार एक्सईएन के पास शिकायत करने भी गए थे, लेकिन संतोष ने कहा –

“मैं इसी विभाग में काम करता हूँ, मामला बढ़ेगा तो और परेशानी होगी… मुझे बख्श दो।”

परिजन बोले –

“हमने तहरीर देने की कोशिश की थी, लेकिन सिस्टम से टकराने की हिम्मत किसी ईमानदार के पास नहीं होती। संतोष अंदर ही अंदर घुटता रहा… और आखिरकार दम टूट गया।”

क्या यह आत्महत्या है या अफसरशाही द्वारा सिस्टमिक मर्डर?

यह सवाल अब हर किसी के ज़हन में है कि क्या यह वास्तव में आत्महत्या है?
या यह उस तानाशाही और अफसरशाही का सिस्टमिक मर्डर है, जहां ईमानदार अधिकारी को जीने नहीं दिया जाता?
क्या यह योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के मुँह पर तमाचा नहीं है?

अगर एक जेई अपनी जान गंवा देता है तो सोचिए, बाकी छोटे कर्मचारी किस मानसिक दबाव में जी रहे होंगे?

सरकार और प्रशासन के लिए शर्मनाक लम्हा – जवाबदेही तय होगी या मामला दब जयेगा?

अगर मृतक परिवार द्वारा लगाए गए आरोप सच हैं, तो यह घटना उत्तर प्रदेश शासन और सिंचाई विभाग दोनों के लिए शर्मनाक धब्बा है।
यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, यह व्यवस्था की मानवता के प्रति संवेदनहीनता का पर्दाफाश है।
अब देखना होगा कि क्या एक्सईएन जैसे अधिकारी के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई होगी, या यह मामला भी फाइलों और राजनीति की धूल में दब जाएगा।

“बड़े अधिकारी छोटे अफसरों की ज़ुबान बंद कर देते हैं… जो सच्चाई के साथ चलते हैं, उनके रास्ते में रोड़े अटकाते हैं… और अंत में वही चुपचाप मर जाते हैं।”

JE ने ट्रेन के आगे कूदकर की आत्महत्या: यह मौत नहीं, व्यवस्था का अपराध है

इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सरकारी सिस्टम में ईमानदारी एक अभिशाप बन चुका है?
क्या जीरो टॉलरेंस और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का दावा सिर्फ कागजों पर ही सीमित है?

अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मान लेना चाहिए कि बड़े अफसरों को बचाने वाला सिस्टम खुद मौत की वजह बन चुका है।

पीलीभीत: फर्जी ID से युवक की इज्जत नीलाम करने की कोशिश, मुकदमा दर्ज!