बाराबंकी हादसा: औसानेश्वर मंदिर में मौत का मंजर! करंट से मचा हड़कंप, भगदड़ में 2 की जान गई, 29 घायल
बाराबंकी में श्रद्धा का मेला मातम में बदल गया!
रविवार को औसानेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने पहुंचे हजारों भक्तों की भीड़ में अचानक चीख-पुकार मच गई। करंट का झटका, भगदड़, और चारों ओर अफरा-तफरी – मंदिर परिसर कुछ ही पलों में तबाही के मंजर में बदल गया। इस दर्दनाक हादसे में 2 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 29 लोग करंट और भगदड़ से घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाए गए।
बाराबंकी हादसा: करंट ने मचाई तबाही, भीड़ बनी भगदड़ का शिकार
हजारों भक्त सुबह जलाभिषेक करने पहुंचे थे। इसी दौरान अचानक मंदिर परिसर में बिजली का करंट फैल गया। श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई – लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे, कुछ जमीन पर गिर पड़े और कई करंट की चपेट में झुलस गए।
2 की मौत, 29 घायल – प्रशासन बेखबर?
दो लोगों की मौके पर मौत हो गई। 29 लोग घायल हैं, जिनमें कई गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। सवाल उठ रहे हैं – आखिर प्रशासन इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए तैयार क्यों नहीं था?
बाराबंकी हादसा: प्रत्यक्षदर्शियों का बयान, ‘हमने मौत को करीब से देखा’
हादसे के गवाह श्रद्धालु बताते हैं, “अचानक बिजली का झटका लगा, लोग चीखने लगे, सब भागने लगे। कई लोग दबकर गिर गए, कुछ को करंट झुलसा गया। चारों ओर अफरा-तफरी थी, कोई संभालने वाला नहीं था।”
सुरक्षा के इंतज़ाम क्यों नाकाम रहे?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन में गंभीर लापरवाही की गई। अगर समय रहते वायरिंग की जांच और भीड़ को नियंत्रित किया जाता, तो यह हादसा टल सकता था।
प्रशासन की नींद टूटी – जांच के आदेश
घटना के बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे। घायलों का इलाज जारी है और हादसे की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि, जनता का गुस्सा प्रशासन की नाकामी पर फूट पड़ा है।
श्रद्धालुओं का आक्रोश – ‘दोषियों पर कार्रवाई हो’
लोगों की मांग है कि बिजली व्यवस्था में लापरवाही बरतने वालों और भीड़ नियंत्रण में असफल अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। मृतकों के परिवार को मुआवज़ा और घायलों के इलाज की गारंटी दी जाए।
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