3

Recent News

Heteropaternal Superfecundation: गजब का मामला! एक मां, जुड़वां बच्चे, लेकिन पिता अलग-अलग! ये कैसे संभव?

Heteropaternal Superfecundation: मेडिकल साइंस में एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने जुड़वां…

Adhaar Card Update: बदलने वाला है आपका आधार कार्ड, नए डिज़ाइन में न होगा नाम, न पता होगा और न ही DOB

Adhaar Card Update: आधार कार्ड को लेकर जल्द एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,…

Bengal Election Exit Poll : एग्जिट पोल ने बढ़ाई पार्टियों की टेंशन, BJP-TMC में कौन बना रहा सरकार? तस्वीर हुई साफ..

Bengal Election Exit Poll: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की वोटिंग खत्म होते ही एग्जिट पोल सामने आ गए हैं।…

बरेली की फर्जी IAS बहनों की कहानी: SUV पर लिखा ADM FR, नीली बत्ती, हूटर.. अधिकारीयों वाला जलवा दिखाकर ठगी
Politics: मुस्लिम इलाके में BJP की बड़ी जीत, गोधरा कांड के सबसे संवेदनशील इलाके में भाजपा ने लहराया झंडा..

Politics: 2002 के गोधरा दंगों का ग्राउंड जीरो माने जाने वाले बेहद संवेदनशील इलाके में एक अनोखा चुनावी नतीजा सामने…

3

Recent News

Heteropaternal Superfecundation: मेडिकल साइंस में एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला ने जुड़वां…

Adhaar Card Update: आधार कार्ड को लेकर जल्द एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,…

Bengal Election Exit Poll: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की वोटिंग खत्म होते ही एग्जिट पोल सामने आ गए हैं।…

Politics: 2002 के गोधरा दंगों का ग्राउंड जीरो माने जाने वाले बेहद संवेदनशील इलाके में एक अनोखा चुनावी नतीजा सामने…

Breaking News

Gaziabad: पापा आपको आपकी पत्नी मुबारक, हमारी लाश मत छूना, 22 पेज का दर्दनाक सुसाइड नोट

IB अफसर और बहन की दिल दहला देने वाली सुसाइड स्टोरी, 22 पेज के दर्दनाक सुसाइड नोट ने खोले पारिवारिक अत्याचार के राज

 गाजियाबाद, गोविंदपुरम |

एक बेटे ने अपनी जान दी, बहन ने साथ निभाया, और पिता से आखिरी शब्दों में रिश्ते तोड़ दिए।

31 जुलाई की सुबह गाजियाबाद के गोविंदपुरम में जैसे मौत ने दस्तक दी। एक घर के भीतर दो लाशें थीं—एक सरकारी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अफसर की, और दूसरी उसकी छोटी बहन की। पर ये महज आत्महत्या नहीं थी… ये चीखता हुआ विद्रोह था, एक ऐसे पिता और सौतेली मां के खिलाफ, जिन्होंने अपने बच्चों की आत्मा तक को कुचल डाला।

पहले जानिए कौन थे अविनाश और अंजली?

एच-352, गोविंदपुरम कॉलोनी में रहने वाले अविनाश कुमार सिंह दिल्ली में आईबी में अफसर थे। उनकी छोटी बहन अंजली, नोएडा की एक निजी कंपनी Ranwik Export में टीम लीडर थी। दोनों पढ़े-लिखे, आत्मनिर्भर और समझदार युवा थे। लेकिन घर में रोज़ का तनाव, सौतेली मां का व्यवहार, और पिता की बेरुखी ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया।

31 जुलाई: सल्फास खाकर खत्म कर ली ज़िंदगी

इस दिन अविनाश और अंजली ने एक साथ घर के कमरे में सल्फास की गोलियां खाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस जब पहुंची, तो दोनों की लाशें बिस्तर पर थीं। लेकिन इस मौत ने सिर्फ एक परिवार को नहीं हिलाया—इसने पूरे समाज से सवाल कर दिया: क्या घर सबसे सुरक्षित जगह होती है?

22 पन्नों का वो सुसाइड नोट जिसने रिश्तों की परतें उधेड़ दीं

मृतका अंजली ने आत्महत्या से पहले एक डायरी में अपना दर्द उतारा—22 पन्नों में बिखरे आंसू, घुटन और नाराजगी के शब्द। यही नहीं, अंजली ने इन पन्नों की तस्वीरें अपने पिता सुखबीर सिंह, सौतेली मां रितु देवी, मौसा अनिल सिंह और मौसी रेखा रानी को वॉट्सऐप पर भेज दीं।

“पापा, आपको कोई हक नहीं मेरे शव को छूने का”

अंजली ने सुसाइड नोट में साफ लिखा:

“पापा आपको आपकी पत्नी मुबारक। आपने हमारी कभी नहीं सुनी। मेरी चिता को मिस रितु और मिस्टर सुखबीर सिंह हाथ न लगाएं।”

इन शब्दों में बेटी का टूटा विश्वास, गुस्सा और बेजुबान चीखें साफ झलकती हैं। उसने बताया कि किस तरह पिता ने सौतेली मां का पक्ष लेते हुए उनकी जिंदगी को नर्क बना दिया।

सौतेली मां का जहर: मानसिक उत्पीड़न की हद

सुसाइड नोट में अंजली ने लिखा—

“रितु देवी की चालाकी के सामने पापा की सफाई बेईमानी है। वो तो हमेशा उनकी ही बात मानते रहे। हमारे मन की कभी नहीं सुनी।”

अंजली ने ये भी आरोप लगाया कि रितु देवी ने उसके चरित्र पर शक किया, बुरी बातें कहीं और उसे अपमानित किया—और उसके पिता चुप रहे, कभी उसका साथ नहीं दिया।

मां की मौत से शुरू हुआ दुखों का सिलसिला

अंजली और अविनाश की सगी मां कमलेश की मौत भी जहर खाकर हुई थी। मामा देवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि कमलेश ने अपने पति सुखबीर सिंह के अवैध संबंधों का विरोध किया था, जिसके चलते उसकी हत्या कर दी गई।
सुखबीर ने एक साल बाद रितु से शादी कर ली और बच्चों की जिंदगी में एक और दुखद अध्याय शुरू हो गया।

“दोस्त ही हम दोनों को मुखाग्नि देगा…”

सुसाइड नोट में सबसे भावुक हिस्सा ये था जब अंजली ने अपने दोस्त महिम को संबोधित कर लिखा:

“तू ही हम दोनों को मुखाग्नि देगा। मेरे खाते के पैसे, पॉलिसी और सपोर्ट तुझे दे रही हूं। तू ही मेरा सच्चा शुभचिंतक है।”

महिम एक ग्राफिक डिजाइनर है और अंजली के साथ पार्टनरशिप में काम करता था।

मामा की शिकायत, पुलिस की चुप्पी

अंजली के मामा ने कविनगर थाने में शिकायत दी है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि पारिवारिक उत्पीड़न और पूर्व नियोजित हत्या है।
फिर भी, अभी तक पुलिस ने कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया है। सवाल उठता है—क्या दो शिक्षित युवाओं की आत्महत्या को भी समाज यूं ही भुला देगा?

सवाल जो हर पिता से हैं…

क्या दूसरी शादी का मतलब पहले बच्चों को छोड़ देना होता है?

क्या सौतेली मां का हर अत्याचार नजरअंदाज करना पितृधर्म है?

क्या बच्चे सिर्फ स्कूल की फीस भरने का नाम हैं?

क्या ये आत्महत्या है या समाज के ढोंग के खिलाफ एक आखिरी चीख?

“हम तो चले गए पापा, अब ज़िंदगी में नजरें मिलाकर जीकर दिखाना…”

ये शब्द सुसाइड नोट में अंजली ने लिखे थे। आज भी वो हर उस घर के लिए आईना हैं जहाँ प्यार की जगह बर्दाश्त और भरोसे की जगह शक पल रहा है।

Pilibhit: मुजरिम पकड़ने गई पुलिस पर गंभीर आरोप, घटना CCTV में कैद