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कुशीनगर किडनी कांड: पथरी के नाम पर इंसानियत का कत्ल

कुशीनगर में मरीज की किडनी निकाल ली! पथरी के बहाने ऑपरेशन टेबल पर हुई मौत से भी खतरनाक वारदात

कुशीनगर में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मेडिकल जगत और इंसानियत दोनों को शर्मसार कर दिया। इलाज के भरोसे अस्पताल पहुंचा एक मरीज, पथरी निकालने की उम्मीद लेकर ऑपरेशन टेबल पर लेटा, लेकिन जागा तो पूरी किडनी गायब थी। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सफेद कोट में छिपा वह दरिंदगी है जो भरोसे की जड़ों को काट देती है। अब पीड़ित इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है और इलाके के लोग अस्पतालों की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं।

कुशीनगर किडनी कांड:इलाज के नाम पर धोखा

रामपुर खुद गांव के 35 वर्षीय अलाउद्दीन को कई दिनों से पेट में दर्द था। जांच में उन्हें बाईं किडनी में 17 मिमी की पथरी होने की बात बताई गई। बेहतर इलाज के लिए उन्होंने स्थानीय डॉक्टरों से राय ली और इसी बीच एक जानकार के माध्यम से कोटवा बाजार स्थित न्यू लाइफ केयर  हॉस्पिटल पहुंच गए। अस्पताल संचालकों ने भरोसा दिलाया कि यहां विशेषज्ञ सर्जन आएंगे और कम खर्च में पथरी का ऑपरेशन कर देंगे। इस भरोसे के साथ अलाउद्दीन 13 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हो गए।

कुशीनगर किडनी कांड:ऑपरेशन और तबीयत बिगड़ना

14 अप्रैल की रात उनका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद धीरे-धीरे उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। पेशाब में खून आने लगा, शरीर बेहद कमजोर होने लगा और लगातार दर्द बना रहा। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी उनकी हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई।

कुशीनगर किडनी कांड:सच्चाई का खुलासा

आखिरकार जब हालत गंभीर हुई तो उन्हें बड़े अस्पताल भेजा गया। वहां अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचों में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई—बाईं किडनी का नामोनिशान तक नहीं था। जिस पथरी को निकालने का दावा किया गया था, उसकी जगह पूरी किडनी ही गायब थी। यह जानकर पीड़ित और उसके परिजन स्तब्ध रह गए।

कुशीनगर किडनी कांड:न्याय की गुहार

इलाज के बाद होश में आने और सच्चाई जानने के बाद अलाउद्दीन ने सीधे पुलिस अधीक्षक से मिलकर पूरी घटना की जानकारी दी और न्याय की मांग की। उनकी शिकायत पर अस्पताल संचालकों के खिलाफ 12 अगस्त को गंभीर धाराओं में  तार मोहम्मद और इमामुद्दीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

अस्पताल की सच्चाई और पुलिस कार्रवाई

जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल का पंजीकरण संदिग्ध है और यहां उचित चिकित्सा मानकों का पालन नहीं किया जाता था। पुलिस ने अस्पताल संचालकों की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन वे फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस टीमों के छापेमारी अभियान जारी हैं और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया जा रहा है।

इलाके में दहशत और सवाल

इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अस्पताल अब इलाज के मंदिर हैं या मौत के फंदे? कितने और मरीज ऐसे “मेडिकल शिकारीयों” के शिकार बन चुके हैं, जिनका सच कभी सामने ही नहीं आया? यह घटना चिकित्सा नैतिकता, ईमानदारी और इंसानियत—तीनों को चीर देने वाला सच है।

कुशीनगर का यह किडनी कांड प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों के लिए चेतावनी है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की तस्वीर है जिसमें इलाज के नाम पर मरीज की जिंदगी और अंग दोनों दांव पर लग जाते हैं। जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलती, हर मरीज के दिल में यह डर कायम रहेगा कि कहीं इलाज के नाम पर उसकी भी जिंदगी का सौदा न हो जाए।

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