UP News: उत्तर प्रदेश के रामपुर से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एंबुलेंस की लापरवाही के कारण एक युवक की जान चली गई। गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ऑक्सीजन और पेट्रोल खत्म हो जाने से उसकी मौत हो गई।
ट्रैक्टर की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हुआ युवक
घटना थाना शहजादनगर क्षेत्र के अहमदनगर जिबाई गांव की है। यहां रहने वाले 38 वर्षीय कुलदीप सिंह रात करीब 10 बजे बाइक से खेत जा रहे थे, तभी तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
जिला अस्पताल से मेरठ किया गया रेफर
परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए मेरठ रेफर कर दिया।
प्राइवेट एंबुलेंस से ले जा रहे थे मुरादाबाद
परिजनों ने अस्पताल के बाहर से एक प्राइवेट एंबुलेंस किराए पर ली और कुलदीप को मेरठ के बजाय मुरादाबाद ले जाने लगे। इस दौरान युवक ऑक्सीजन सपोर्ट पर था।
रास्ते में खत्म हुई ऑक्सीजन, फिर पेट्रोल भी हुआ खत्म
कुलदीप के भतीजे हरविंदर सिंह के मुताबिक, आधे रास्ते में ही एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खाली हो गया। उन्होंने ड्राइवर से तेजी से चलने को कहा, लेकिन थोड़ी दूर आगे बढ़ते ही एंबुलेंस का पेट्रोल भी खत्म हो गया।
ऑक्सीजन न मिलने की वजह से कुछ ही देर में कुलदीप ने दम तोड़ दिया।
गुस्साए परिजनों ने एंबुलेंस में की तोड़फोड़
युवक की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने एंबुलेंस में तोड़फोड़ कर दी। मौके का फायदा उठाकर ड्राइवर वहां से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। मुरादाबाद के मझोला थाने में एंबुलेंस को सीज कर दिया गया है।
एंबुलेंस के लिए क्या हैं जरूरी मानक?
एंबुलेंस संचालन के लिए कुछ जरूरी नियम तय हैं:
- वाहन का वैध रजिस्ट्रेशन और परमिट
- प्रशिक्षित ड्राइवर और पैरामेडिकल स्टाफ
- ऑक्सीजन सिलेंडर हमेशा भरा और चालू हालत में
- स्ट्रेचर, फर्स्ट एड किट और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) उपकरण
- 24×7 सेवा और वाहन की सही तकनीकी स्थिति
लापरवाही पर हो सकती है कड़ी कार्रवाई
ऐसे मामलों में IPC की धारा 304A (लापरवाही से मौत), 279, 336, 337, 338 के तहत केस दर्ज हो सकता है। साथ ही एंबुलेंस का परमिट रद्द, चालक की गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।
सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
यह घटना एक बार फिर सिस्टम की बड़ी लापरवाही को उजागर करती है। सवाल यह है कि क्या एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवा में भी इतनी बड़ी चूक माफ की जा सकती है?
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).