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Pilibhit: अंधविश्वासी इलाज ने ली किसान की जान, करंट लगने पर रेत में दबा दिया

पीलीभीत में हाईटेंशन तार की चपेट में आए किसान दाताराम की दर्दनाक मौत: परिवार में मचा कोहराम

Pilibhit: शुक्रवार की सुबह 8 बजे, गांव लुकटिहाई के छोटे से घुंघचाई थाना क्षेत्र में एक सामान्य दिन की शुरुआत हुई थी। दाताराम, उम्र 35 वर्ष, अपने घर की झोपड़ी की मरम्मत के लिए घर के सामने बांस काट रहे थे। अचानक उनके हाथों में लिए बांस का टुकड़ा ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से टकरा गया। तेज करंट लगते ही दाताराम तुरंत जमीन पर गिर गए। यह घटना इतनी अचानक और घातक थी कि आसपास मौजूद लोग भी स्तब्ध रह गए। केवल कुछ क्षणों में दाताराम का जीवन खतरे में पड़ गया, और यह दुखद घटना पूरे परिवार और गांव के लिए गहरा सदमा बन गई।

Pilibhit: ग्रामीणों और परिजनों की प्रतिक्रिया

मौके पर मौजूद दाताराम की पत्नी रेशमा, उनके बच्चे और अन्य ग्रामीण तुरंत मदद के लिए दौड़े। लेकिन घबराहट और परंपरागत ज्ञान के आधार पर उन्होंने दाताराम को रेत में दबा दिया और करीब एक घंटे तक ऐसे ही रखा। इस दौरान कोई आधुनिक चिकित्सीय सहायता उपलब्ध नहीं थी। ग्रामीणों की यह नादानी, हालांकि उनकी मंशा मदद करने की थी, लेकिन परिणामस्वरूप यह एक घातक गलती साबित हुई। समय पर उचित इलाज न मिलने की वजह से दाताराम की स्थिति गंभीर होती गई और उनके जीवन को बचाना असंभव हो गया।

Pilibhit:अस्पताल और मृत्यु

एक घंटे तक रेत में दबाए जाने के बाद परिजन उन्हें स्थानीय अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने तुरंत उनका परीक्षण किया और दुखद सत्य सामने आया—दाताराम को मृत घोषित कर दिया गया। यह घटना न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए शॉकिंग और हृदयविदारक थी। यह बताती है कि यदि समय पर प्राथमिक चिकित्सा और आधुनिक उपचार उपलब्ध होते तो उनकी जान बच सकती थी।

Pilibhit: परिवार की बर्बादी 

दाताराम अपनी पत्नी रेशमा और तीन छोटे बच्चों—प्रदीप (11), अंशुल (6) और बंदना (5)—को छोड़ गए। उनका परिवार खेती और मजदूरी पर निर्भर था और अब पूरी आर्थिक और भावनात्मक जिम्मेदारी रेशमा के कंधों पर आ गई है। बच्चों के लिए पिता की अनुपस्थिति का दर्द गहरा और अकल्पनीय है। परिवार की खुशियों की दुनिया अब खालीपन और दरिद्रता में बदल गई है। माता-पिता और बच्चों की मासूमियाँ अब केवल यादों में बसी रह गई हैं, और हर दिन का जीवन उनके लिए संघर्ष और मानसिक पीड़ा लेकर आनेबाला  हो गया है।

Pilibhit: ग्रामीणों की नादानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी

इस हादसे में ग्रामीणों ने दाताराम को रेत में दबाकर प्राथमिक सहायता देने का प्रयास किया, लेकिन यह आधुनिक चिकित्सा के लिहाज से घातक साबित हुआ। अगर तत्काल एंबुलेंस और डॉक्टर की सुविधा होती, तो दाताराम की जान बच सकती थी। प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि हाईटेंशन लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा समय पर उपलब्ध कराए। इस घटना ने यह भी साबित कर दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा और प्राथमिक उपचार की जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

जागरूकता  की कमी और भविष्य की चेतावनी

दाताराम की मौत इस बात का प्रतीक है कि खुले और खतरनाक हाईटेंशन तार ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के जीवन के लिए गंभीर खतरा हैं। बिजली विभाग और प्रशासन की लापरवाही ने सीधे तौर पर इंसान की जान को जोखिम में डाल दिया। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी है कि हाईटेंशन लाइनों को आवासीय इलाकों से दूर किया जाए, नियमित निरीक्षण किया जाए और ग्रामीणों को बिजली सुरक्षा, बचाव और प्राथमिक उपचार के प्रशिक्षण से अवगत कराया जाए। यह घटना चेतावनी है कि सुरक्षा की अनदेखी किसी भी समय जीवन के लिए घातक साबित हो सकती है।

Pilibhit:  परिवार अब कैसे जिएगा

दाताराम की अनुपस्थिति ने उनके परिवार को पूरी तरह अकेला और असुरक्षित छोड़ दिया है। रेशमा को अब अकेले बच्चों की देखभाल करनी होगी और परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उठानी होगी। बच्चों की मासूम आँखों में पिता की अनुपस्थिति का दर्द साफ झलकता दिखाई दिया। परिवार को न केवल आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है बल्कि भावनात्मक पीड़ा भी गहरी है। यह घटना स्पष्ट करती है कि दाताराम का परिवार अब एक ऐसे जीवन की ओर बढ़ रहा है, जिसमें हर खुशी के साथ पिता की याद और उनके बिना जीवन यापन की कठिनाइयाँ जुड़ी होंगी।

प्रशासन को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए

दाताराम की दुखद मृत्यु के बाद उनके पीछे पत्नी रेशमा और तीन छोटे मासूम बच्चों का पूरा जीवन संकट में पड़ गया है। प्रशासन को तुरंत कदम उठाते हुए इस परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए ताकि उनका रोजमर्रा का जीवन और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। वित्तीय मदद न केवल परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी, बल्कि इसे प्राप्त करने से परिवार को मानसिक राहत और थोड़ी सांत्वना भी मिलेगी। जिला प्रशासन को चाहिए कि यह सहायता तत्काल दी जाए, ताकि रेशमा को अपने बच्चों का पालन-पोषण अकेले करने में कोई अतिरिक्त बोझ न झेलना पड़े। और आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

प्रशासनिक जिम्मेदारी

दाताराम की मौत केवल व्यक्तिगत tragedy नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सुरक्षा की कमी और प्राथमिक चिकित्सा की अपर्याप्तता का प्रतीक भी है। प्रशासन और बिजली विभाग को तत्काल कदम उठाने चाहिए: हाईटेंशन लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, ग्रामीणों में जागरूकता फैलाना, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा समय पर उपलब्ध कराना और ऐसे हादसों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना। यह घटना हमें याद दिलाती है कि एक पल की लापरवाही पूरे परिवार की दुनिया को उजाड़ सकती है और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं से बचने के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं।

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