Agra: दवा व्यापारियों पर बड़ी छापेमारी, करोड़ों की नकली दवाइयाँ और नकदी जब्त
आगरा शहर में नकली और अवैध दवाओं के व्यापार पर शिकंजा कसते हुए ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने रविवार को एक बड़ी कार्रवाई की। इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े उस काले कारोबार का पर्दाफाश किया है, जिसमें करोड़ों रुपये की दवाएँ अवैध रूप से बेची जा रही थीं और नामी कंपनियों की पैकेजिंग का दुरुपयोग किया जा रहा था।
Agra: 24 घंटे चली कार्रवाई, करोड़ों की बरामदगी
यह छापेमारी पूरे 24 घंटे तक चली, जिसमें शहर के कई प्रमुख गोदामों और मेडिकल स्टोर्स को खंगाला गया। इस दौरान लगभग दो करोड़ तैंतालीस लाख रुपये मूल्य की दवाइयाँ बरामद की गईं। इनमें बड़ी संख्या में महंगी ब्रांडेड दवाइयाँ शामिल थीं, जिनकी असली-नकली होने की जांच अभी जारी है।
Agra: नोट गिनने की मशीनें हुईं गर्म
कार्रवाई के दौरान छापे में इतनी भारी मात्रा में नकदी मिली कि नोट गिनने की मशीनें तक गर्म हो गईं। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बताया कि जब्ती की गई नकदी करोड़ों में थी। यही नहीं, दवा व्यापारी ने टीम को एक करोड़ रुपये देकर खरीदने की कोशिश भी की, मगर अधिकारियों ने ईमानदारी दिखाते हुए रिश्वत ठुकरा दी और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
Agra: दवाओं का ज़खीरा और नामी ब्रांडों की पैकेजिंग
जब्त किए गए माल में नामी दवा कंपनियों के नाम से बेचे जाने वाले उत्पाद भी शामिल हैं। यह अंदेशा जताया जा रहा है कि दवाओं की पैकिंग तो असली कंपनियों जैसी है, लेकिन भीतर का माल नकली हो सकता है। इस आशंका की पुष्टि के लिए मौके से 14 सैंपल कलेक्ट कर लैब जांच के लिए भेजे गए हैं।
गोदामों और दुकानों से भारी बरामदगी
मुख्य रूप से हेमा मेडिकल की दुकान और उसके गोदाम से यह माल बरामद हुआ है। जांच में सामने आया कि फर्म का लाइसेंस हिमांशु अग्रवाल के नाम से जारी है, लेकिन संचालन अलग-अलग लोगों के हाथ में था। इसी तरह बंसल मेडिकल स्टोर पर भी छापेमारी जारी रही, जहाँ बड़े ज़खीरे के मिलने की संभावना जताई गई है।
Agra: करोड़ों की दवाइयाँ लगातार पकड़ में
कार्रवाई का यह सिलसिला लगातार दो दिनों से चल रहा है। इससे पहले हुई छापेमारी में भी लगभग अस्सी लाख रुपये से अधिक की दवाइयाँ बरामद की गई थीं। उस दौरान टीम ने केवल एक जगह से एलेग्रा 120mg की दो लाख सत्तानबे हजार टैबलेट पकड़कर सीज़ की थीं। यह बरामदगी साबित करती है कि अवैध दवाओं का यह कारोबार लंबे समय से संगठित रूप में चल रहा था।
बिलिंग में फर्जीवाड़ा और सप्लाई नेटवर्क
जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि दवाओं की खरीद-फरोख्त के लिए फर्जी बिल तैयार किए गए थे। एक बिल चेन्नई से लखनऊ की पार्टी के नाम पर काटा गया था, जिससे यह साफ होता है कि इस नेटवर्क का दायरा एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि कई राज्यों को जोड़ने वाली सप्लाई चेन के जरिए यह कारोबार चल रहा था। मौके से करीब दस लाख रुपये मूल्य के बिल भी बरामद किए गए।
अधिकारियों की टीम और कड़ा एक्शन
इस पूरी कार्रवाई में दो मंडलों के ड्रग इंस्पेक्टर, दो सहायक आयुक्त और पुलिस की विशेष टीम शामिल रही। लगातार चली छापेमारी और जब्ती से यह साफ हो गया है कि नकली दवाओं का यह नेटवर्क संगठित और व्यापक स्तर पर फैला हुआ है।
आगरा में हुई इस कार्रवाई ने दिखा दिया कि नकली और अवैध दवाओं का कारोबार किस तरह आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रहा था। करोड़ों रुपये की नकली दवाओं का बरामद होना और अधिकारियों को रिश्वत देने का प्रयास यह साबित करता है कि इस व्यापार के पीछे मजबूत और संगठित गिरोह काम कर रहा है। फिलहाल बरामद किए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दवाएँ नकली थीं या वैध, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में जब्ती ने स्वास्थ्य तंत्र और प्रशासन को हिला कर रख दिया है।
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