पीलीभीत पर धान खरीद पर डीएम सख्त: किसानों के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बनी मिसाल
Rocket Post भारत, पीलीभीत:
आज हम आपको लेकर चलते हैं पीलीभीत जिले के धान खरीद केंद्रों के कंट्रोल रूम के कमरों में। जहाँ पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने धान खरीद में पारदर्शिता और किसान हित को लेकर एक अनोखी पहल शुरू की है, जो पूरे प्रदेश में मिसाल बन सकती है।
धान खरीद के नाम पर अक्सर किसान परेशान रहते हैं। कहीं तौल में गड़बड़ी, कहीं भुगतान में देरी, तो कहीं बिचौलियों का दख़ल — ऐसी शिकायतें हर साल सुनने को मिलती हैं। लेकिन इस बार पीलीभीत में कहानी कुछ और ही है।
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने इस बार धान खरीद को पूरी तरह पारदर्शी और किसान-हितैषी बनाने के लिए एक सख्त और सुनियोजित मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल की कमान अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व प्रसून द्विवेदी के हाथों में है। और इसका असर किसानों पर सीधे दिखाई दे रहा है।
कंट्रोल रूम: किसानों की आवाज़ सीधे प्रशासन तक
धान खरीद के दौरान हर केंद्र की निगरानी के लिए एक सक्रिय कंट्रोल रूम बनाया गया है। यहाँ की टीम ने अब तक 4,862 किसानों से सीधे फोन पर संपर्क कर उनकी शिकायतें और सुझाव रिकॉर्ड किए हैं।
सवाल आसान लेकिन असरदार हैं:
क्या तौल सही हुई?
क्या भुगतान समय पर मिला?
किसी ने अतिरिक्त रुपये मांगे?
खरीद केंद्र पर कोई और समस्या तो नहीं?
हर सवाल का जवाब सीधे किसान से लिया जाता है, बिचौलियों के बिना।
रैंडम विज़िट और वीडियो फीडबैक, सच का साक्ष्य
सिर्फ कॉल ही नहीं, बल्कि एक विशेष सरकारी टीम धान क्रय केंद्रों पर जाकर किसानों की बातों को वीडियो में रिकॉर्ड कर रही है। इसका उद्देश्य एकदम स्पष्ट है — जो किसान कह रहा है, वही सच सामने आए।
इन वीडियो और फीडबैक को सीधे जिलाधिकारी के पास भेजा जाता है, ताकि प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सके।
प्रशासन की सख्ती, कोई भी गलती बर्दाश्त नहीं
जहाँ कमियां मिलीं, वहाँ प्रशासन ने तुरंत कड़ी कार्रवाई की है:
एक बिचौलिए पर एफआईआर दर्ज
51 केंद्र प्रभारियों का एक दिन का वेतन रोका
कई क्रय एजेंसियों के जिला प्रबंधकों को ‘कारण बताओ’ नोटिस
6 केंद्र प्रभारियों पर विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि
4 केंद्र प्रभारियों पर ऑनलाइन उपस्थिति न दर्ज करने पर कार्रवाई
जिन राइस मिलों ने एग्रीमेंट या FRK ऑर्डर नहीं किया, उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी
इस कड़ी निगरानी और कार्रवाई का मकसद सिर्फ एक है — किसान को न धोखा मिले, न देरी।
भुगतान की रफ्तार तेज, किसानों के चेहरे पर मुस्कान
जनपद में अब तक 11,669 किसानों से कुल 88,553 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। किसानों को लगभग 168 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल भुगतान का 89 प्रतिशत है।
सबसे बड़ी बात — 95 प्रतिशत किसानों को 48 घंटे के अंदर भुगतान मिल रहा है।
यदि किसी किसान का बैंक खाता NPCI मैप नहीं है, तो प्रशासन उसे तुरंत बैंक भेजकर मैपिंग करवा रहा है, ताकि भुगतान में कोई भी देरी न हो।
खरीद केंद्रों में नियमों का पालन, किसान का हक़ सुरक्षित
जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने सभी केंद्रों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं:
धान रिजेक्ट करने से पहले किसान को सुखाने का पूरा मौका दिया जाए
रिजेक्शन केवल दो गवाहों की मौजूदगी में हो
शील्ड सैंपल की एक प्रति किसान को दी जाए
हर बोरे पर अनिवार्य रूप से स्टेंसिल लगाया जाए
स्टेंसिल न होने पर नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
किसान केंद्रित और पारदर्शी मॉडल
धान खरीद की यह पूरी प्रक्रिया — फोन कॉल, वीडियो फीडबैक, रैंडम विज़िट, सख्त कार्रवाई — यही दर्शाती है कि पीलीभीत प्रशासन किसान की फसल का सही दाम दिलाने में कितना गंभीर है।
यह मॉडल केवल धान खरीद के लिए नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में किसान हितैषी और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक मिसाल बन सकता है।
यदि आप भी धान बेच रहे हैं और आपके पास कोई सुझाव, शिकायत या अनुभव है, तो सीधे जिला कंट्रोल रूम से संपर्क करें।
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