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Pilibhit: मृदा का इलाज संभव — “सॉयल हेल्थ कार्ड” ने बदला खेती का विज्ञान

Pilibhit: मृदा का इलाज संभव-सॉयल हेल्थ कार्ड से मिट्टी का वैज्ञानिक परीक्षण हुआ आसान, खेती का खर्च घटा और उपज बढ़ी।

किसानों की किस्मत बदल रही है- सरकार की नीतियों ने खोले समृद्धि के नए द्वार, खेतों में लौट रही खुशहाली —पीलीभीत डीएम ज्ञानेंद्र सिंह

पीलीभीत, 
“जब किसान खुशहाल होता है, तब ही राष्ट्र मजबूत होता है।”
इसी विचार को धरती पर उतारने का काम पिछले एक दशक में केंद्र और प्रदेश सरकारों ने मिलकर किया है। पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि आज खेती किसी संघर्ष का नाम नहीं, बल्कि समृद्धि का पर्याय बन चुकी है। खेतों की मेड़ों से लेकर खलिहानों की रौनक तक, किसानों की जिंदगी में एक ऐसा परिवर्तन आया है, जिसे स्वतंत्र भारत के कृषि इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय माना जाएगा।

डीएम ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की उस बात को आज सही मायने में सच किया गया है —
“देश की तरक्की गांवों और खेतों से होकर गुजरती है।”

11 वर्षों में बदला किसानों का भाग्य—ऐसी योजनाएँ जिन्हें अन्नदाता वरदान मानते हैं

जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह बताते हैं कि केंद्र और प्रदेश सरकार ने पिछले 11 वर्षों में जितनी योजनाएँ किसानों के लिए चलाई हैं, उतनी शायद पहले कभी नहीं चलीं। इन योजनाओं ने खेत का खर्च घटाया, उत्पादन बढ़ाया, सिंचाई को सरल बनाया और किसानों की आमदनी में अभूतपूर्व वृद्धि की।

 पहली बार मृदा का इलाज संभव — “सॉयल हेल्थ कार्ड” ने बदला खेती का विज्ञान

पहले किसान अंदाज़े पर खाद डालते थे, जमीन क्या चाहती है, यह किसी को पता नहीं था।
लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशव्यापी सॉयल हेल्थ कार्ड योजना शुरू होने के बाद जमीन का इलाज वैज्ञानिक तरीके से होने लगा।

हर खेत की मिट्टी का सैंपल

उसकी पोषक स्थिति की जांच

किसान को मिलती पूरी रिपोर्ट

कितना नाइट्रोजन, कितना पोटाश, कितना उर्वरक चाहिए—सबकी सटीक जानकारी

जिला प्रशासन के अनुसार पीलीभीत में हजारों किसानों ने खाद पर खर्च कम किया और उत्पादन में सीधी बढ़ोतरी पाई।

 पीएम किसान सम्मान निधि — सीधे किसानों की जेब में 6000 रुपये, सम्मान के साथ आर्थिक सुरक्षा

जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि पीलीभीत के हजारों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभार्थी हैं।
देशभर में 12 करोड़ किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं।

सालाना ₹6000 सीधे खाते में

बिना किसी बिचौलिये

छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता खत्म

किसान की रोजमर्रा की परेशानियों में ऐतिहासिक कमी

 सिंचाई में क्रांति — 23 लाख हेक्टेयर भूमि को पानी का वरदान

प्रदेश में पिछले 8 वर्षों में सिंचाई को लेकर ऐतिहासिक कार्य हुए—

 अर्जुन सहायक परियोजना

 बाणसागर परियोजना

 सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना

ये सभी वर्षों से लटकी पड़ी थीं।
प्रदेश सरकार ने इन्हें प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से जोड़कर पूर्ण कराया।

पीलीभीत के किसानों को भी मिला लगातार वर्षभर सिंचाई का भरोसा।

 16 लाख निजी नलकूपों के बिजली बिल माफ — किसानों की कमर सीधी हुई

डीएम ने बताया कि बिजली बिल माफी से किसानों का आर्थिक बोझ काफी कम हुआ।
कई छोटे किसान जिनके नलकूप बंद पड़े थे, वे आज फिर से चलने लगे हैं और खेतों में हरियाली लौट आई है।

फसल खरीद व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव

पहले बिचौलिए मंडियों में किसानों की उपज का बड़ा हिस्सा खा जाते थे।
लेकिन अब हालात बदल गए हैं—

 एक मंडी से दूसरी मंडी ले जाने पर कोई टैक्स नहीं

सरकारी क्रय केंद्रों पर सिर्फ भूमि मालिक किसान की उपज की खरीद

 MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का पैसा सीधे खाते में

जिलाधिकारी ने कहा कि इस कदम से बिचौलियों की पूरी गुंडागर्दी खत्म हो गई। किसान अब अपनी मेहनत का पूरा पैसा पाते हैं।

गन्ना किसानों की समृद्धि, यूपी बना ‘शुगर कॉम्प्लेक्स राज्य’

प्रदेश में 2017 से पहले सिर्फ 108–110 चीनी मिलें चल रही थीं, वह भी कम क्षमता पर।
लेकिन अब—

42 चीनी मिलों ने क्षमता वृद्धि की

4 से अधिक नई चीनी मिलें स्थापित हुईं

एथेनॉल प्लांट

कोजेन प्लांट

डिस्टलरी

फाइन शुगर यूनिटें

यूपी की चीनी मिलें अब सिर्फ चीनी मिल नहीं, बल्कि विशाल शुगर कॉम्प्लेक्स बन चुकी हैं।

 गन्ना क्षेत्र 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 30 लाख हेक्टेयर

 गन्ना मूल्य में ₹85 प्रति कुंतल की बढ़ोतरी

 ऑनलाइन पर्ची व्यवस्था — माफियागिरी, घटतौली पूरी तरह खत्म

 10 लाख से ज्यादा लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार

पीलीभीत में भी गन्ना किसान आज देश के सबसे खुशहाल किसानों में गिने जा रहे हैं।

खाड़सारी उद्योग को नई जान — लाइसेंस निःशुल्क, ग्रामीण अर्थव्यवस्था चमकी

राज्य सरकार ने खाड़सारी (परंपरागत गन्ना उत्पादों) को बढ़ावा देते हुए लाइसेंस पूरी तरह निशुल्क कर दिए।
इससे—

गुड़ बनने वाले छोटे उद्योग मजबूत हुए

गांवों में रोजगार बढ़ा

किसान को गन्ना का अतिरिक्त लाभ मिला

सरकार का लक्ष्य स्पष्ट — “किसान मुस्कुराएगा तो प्रदेश आगे बढ़ेगा”

जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने दोहराया कि सरकार की सबसे बड़ी प्रतिबद्धता किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम दिलाना है।
खेत, किसान और फसल—इन तीनों को केंद्र बनाकर जो नीतियां बनी हैं, उन्होंने आज हर जिले की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दिया है।

पीलीभीत प्रशासन का संदेश- किसान ही असली नायक, सरकार हर कदम पर साथ

डीएम ने कहा कि प्रशासन किसानों के लिए निरंतर फील्ड में काम कर रहा है—

योजनाओं का समय पर लाभ

तकनीकी मार्गदर्शन

जलभराव, कीट प्रबंधन, प्राकृतिक आपदा पर त्वरित राहत

मंडी संचालन की पारदर्शिता

फसल खरीद की निगरानी

उन्होंने कहा कि “सरकार से लेकर प्रशासन तक — अन्नदाता सर्वोपरि है।”

यह सिर्फ खबर नहीं, किसानों की नई कहानी है—एक ऐसा बदलाव जिसने खेतों को समृद्धि, और किसानों को सम्मान दिया।