उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले से सामने आया यह मामला न सिर्फ गंभीर है, बल्कि सिस्टम के लिए एक कड़ा इम्तिहान भी है।
योगी सरकार के प्रदेश में और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसदीय सीट रायबरेली में सैकड़ों युवाओं से विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप लगा है।
इस ठगी से जुड़े पीड़ित शनिवार को रायबरेली के पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुँचे और न्याय की गुहार लगाई, लेकिन पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
“100–125 युवाओं से करोड़ों की ठगी हुई” — पीड़ित की बाइट
SP ऑफिस पहुँचे पीड़ितों में शामिल राजीव सिंह (निवासी: फतेहपुर) ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि—
“अजरबैजान और अरब देशों में काम दिलाने के नाम पर करीब 100 से 125 युवाओं से करोड़ों रुपये लिए गए। हम सभी से अलग-अलग रकम वसूली गई।”
पीड़ित का कहना है कि यह सब रायबरेली के लालगंज इलाके में खोली गई एक कथित कंपनी के जरिए किया गया।
अरब देशों में नौकरी का झांसा, कंस्ट्रक्शन लाइन में काम का वादा
राजीव सिंह के अनुसार, खुद को कंपनी संचालक बताने वाले लोग युवाओं को यह भरोसा दिलाते थे कि—
“अरब देशों में कंस्ट्रक्शन लाइन में पक्की नौकरी मिलेगी और विदेश भेजने की पूरी गारंटी रहेगी।”
पीड़ितों के मुताबिक, इसी भरोसे के आधार पर—
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किसी से 1.5 लाख रुपये
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किसी से 1.2 लाख रुपये
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और कई युवाओं से 1 लाख रुपये
वसूले गए।

टिकट तक बुक, फिर अचानक सब गायब — पीड़ितों का दावा
पीड़ितों का कहना है कि भरोसा बढ़ाने के लिए 30 तारीख की फ्लाइट के टिकट तक बुक किए गए थे।
लेकिन बाद में वे टिकट कैंसिल कर दिए गए और उसी के बाद—
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आरोपियों के फोन बंद हो गए
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कंपनी का ऑफिस बंद मिला
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और कथित संचालक गायब बताए जा रहे हैं
राजीव सिंह के मुताबिक—
“29 तारीख को कुछ लोग दिल्ली तक फ्लाइट पकड़ने भी निकल गए थे, लेकिन उसके बाद से किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा।”
सबसे अहम सबूत? वायरल वीडियो ने आसान की पहचान
इस पूरे मामले में एक बेहद अहम तथ्य भी सामने आया है।
पीड़ितों के अनुसार, ठगी में शामिल बताए जा रहे एक व्यक्ति का वीडियो वायरल है, जिसमें वह—
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एक पीड़ित महिला से नकद पैसे लेते हुए
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और उन्हें गिनते हुए साफ़ दिखाई देता है
पीड़ितों का दावा है कि—
“महिला को शक हुआ था या सुरक्षा के मकसद से उसने यह वीडियो चुपके से रिकॉर्ड कर लिया था।”
अगर यह वीडियो जांच में सही पाया जाता है, तो यह आरोपियों की पहचान को काफी आसान बना देता है।
“अगर पुलिस चाहे तो घंटों में गिरफ्तारी संभव” — पीड़ितों का कहना
पीड़ितों का दावा है कि—
“वीडियो सामने होने के बावजूद अगर कार्रवाई नहीं होती, तो यह हैरान करने वाली बात होगी।
अगर पुलिस गंभीरता से जांच करे, तो कुछ ही घंटों में आरोपियों तक पहुंचा जा सकता है।”
आरोपियों के नाम और पहचान पर भी सवाल
पीड़ितों ने जिन नामों का ज़िक्र किया है, वे हैं—
रोहित मिश्रा और किशन भगवत।
SP ऑफिस तक पहुँची बात, लेकिन आगे क्या?
पीड़ितों ने सामूहिक रूप से SP ऑफिस में शिकायत दी, लेकिन अब भी कई सवाल खुले हैं—
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FIR दर्ज हुई या नहीं?
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आरोपियों की तलाश शुरू हुई या नहीं?
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वायरल वीडियो को जांच में शामिल किया गया या नहीं?
सवाल सिर्फ ठगी का नहीं
अगर पीड़ितों के दावे सही साबित होते हैं, तो रायबरेली का यह मामला
संगठित मानव तस्करी और बड़े आर्थिक अपराध की श्रेणी में आ सकता है।
अब सवाल सिर्फ ठगी का नहीं, बल्कि यह है कि
क्या सिस्टम समय रहते हरकत में आएगा या नहीं?
पीड़ितों को अब आश्वासन नहीं, तत्काल और ठोस कार्रवाई चाहिए।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).