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पीलीभीत, लखीमपुर खीरी और बहराइच जिले में मकान मालिकों के लिए सरकार का शानदार तोहफा, होगी बड़ी कमाई

पीलीभीत में मकान मालिकों की बल्ले-बल्ले, सरकार की होमस्टे नीति से अब घर के अतिरिक्त कमरों से होगी शानदार कमाई और रोजगार।

अगर आपके मकान में हैं अतिरिक्त कमरे खाली हैं, बनेंगे कमाई का जरिया 

उत्तर प्रदेश के वन एवं सीमावर्ती जिलों में पर्यटन की रफ्तार जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसने अब स्थानीय निवासियों के लिए आय के नए रास्ते खोल दिए हैं। खासकर लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और बहराइच जैसे जिलों में, जहां वन्यजीव अभयारण्य, प्राकृतिक सौंदर्य और ईको टूरिज्म पर्यटकों को लगातार आकर्षित कर रहे हैं, वहां रहने वाले लोगों के लिए यह समय सुनहरे अवसर लेकर आया है। अब अपने ही घर के अतिरिक्त कमरों को पर्यटकों के लिए खोलकर लोग सम्मानजनक और स्थायी अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

पर्यटन की बढ़ती रफ्तार, आवास की बढ़ती मांग

उत्तर प्रदेश में पर्यटन अब केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदेश सरकार की योजनाओं और ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते पर्यटकों की संख्या में लगातार ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की जा रही है। जैसे-जैसे पर्यटक बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे गुणवत्तापूर्ण ठहराव सुविधाओं की मांग भी तेज़ी से बढ़ी है। होटल और लॉज की सीमित उपलब्धता के बीच स्थानीय लोगों के घर अब पर्यटकों के लिए सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित विकल्प बनकर उभर रहे हैं।

बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति-2025 से खुले आय के नए द्वार

पर्यटन विभाग द्वारा लाई गई उत्तर प्रदेश बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति-2025 आम नागरिकों के लिए एक व्यावहारिक और लाभकारी योजना बनकर सामने आई है। इस नीति का उद्देश्य न केवल पर्यटकों को बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है, बल्कि स्थानीय निवासियों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक लोग इस नीति से जुड़ें और अपने घरों को रोजगार और आय का केंद्र बनाएं।

वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास रहने वालों के लिए बड़ा मौका

लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और बहराइच जैसे जिलों में स्थित वन्यजीव अभयारण्य और प्राकृतिक क्षेत्र आज देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। इन क्षेत्रों में पर्यटक प्रकृति, जंगल सफारी और स्थानीय संस्कृति को नजदीक से अनुभव करना चाहते हैं। ऐसे में अभयारण्यों के आसपास रहने वाले लोग यदि अपने घरों के अतिरिक्त कमरों को होमस्टे या बेड एंड ब्रेकफास्ट के रूप में विकसित करते हैं, तो यह उनके लिए स्थायी कमाई का मजबूत साधन बन सकता है।

शहरी, ग्रामीण और बी एंड बी— हर वर्ग के लिए अवसर

इस नीति के अंतर्गत शहरी होमस्टे, ग्रामीण होमस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट तीनों प्रकार की इकाइयों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले वे भूस्वामी, जो स्वयं अपने घर में निवास करते हैं और जिनके पास अधिकतम छह अतिरिक्त कमरे उपलब्ध हैं, वे उन्हें पर्यटकों को आवास के लिए दे सकते हैं। वहीं, ऐसे आवासीय भवन जहां मालिक स्वयं निवास नहीं करता, वहां बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाई के रूप में संचालन किया जा सकता है, जिसमें केयरटेकर की व्यवस्था अनिवार्य होगी।

सरकार दे रही है सुविधाएं, ताकि कमाई में न आए कोई बाधा

सरकार ने इस नीति के तहत यह सुनिश्चित किया है कि होमस्टे और बी एंड बी संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। बिजली, जल कर, गृह कर और सीवर कर का भुगतान आवासीय दरों पर ही किया जाएगा। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री मुफ्त बिजली योजना के तहत छत पर सौर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे बिजली खर्च में बड़ी राहत मिलेगी।

प्रशिक्षण से लेकर प्रचार तक सरकार आपके साथ

इस नीति की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार केवल अनुमति देकर पीछे नहीं हटती, बल्कि प्रशिक्षण और प्रचार में भी पूरा सहयोग करती है। पर्यटन विभाग के कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान द्वारा आठ सहायक कर्मचारियों को निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि सेवा की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर की हो। साथ ही, पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर होमस्टे और बी एंड बी इकाइयों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे पर्यटकों तक सीधी पहुंच बने।

ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया, आसान और पारदर्शी

बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति के अंतर्गत पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन, सरल और पारदर्शी बनाया गया है। नई और पहले से संचालित दोनों प्रकार की इकाइयां पर्यटन विभाग के आधिकारिक पोर्टल up-tourismportal.in पर जाकर आसानी से पंजीकरण करा या कर  सकते  हैं। पंजीकरण की यह डिजिटल व्यवस्था समय और संसाधनों की बचत के साथ-साथ पारदर्शिता भी सुनिश्चित करती है। पंजीकरण पूर्ण होते ही संबंधित इकाई पर्यटन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल हो जाती है और नीति से जुड़े सभी सरकारी लाभ स्वतः उपलब्ध हो जाते हैं।

पर्यटकों के आंकड़े बता रहे हैं उज्ज्वल भविष्य

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश में ईको टूरिज्म ने अब एक सशक्त पहचान बना ली है। वर्ष 2025 के जनवरी से जून के बीच लखीमपुर खीरी में 11.36 लाख, पीलीभीत में लगभग 24 लाख और बहराइच में 1.59 लाख से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से बताते हैं कि आने वाले समय में ठहराव सुविधाओं की मांग और भी बढ़ने वाली है।

स्थानीय लोगों के लिए आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति-2025 केवल एक पर्यटन योजना नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर बनाने का मजबूत माध्यम है। यह नीति रोजगार सृजन, आय वृद्धि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की मंशा साफ है कि पर्यटन का लाभ सीधे आम नागरिक तक पहुंचे, और ग्रामीण व सीमावर्ती क्षेत्रों में समृद्धि का नया अध्याय लिखा जाए।