सलमान खान की आने वाली फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ अभी रिलीज भी नहीं हुई और चीन में पहले ही माथा ठनक गया है। ट्रेलर आते ही चीनी मीडिया और सोशल मीडिया पर हाय-तौबा मच गई। किसी को सीन पसंद नहीं आए, किसी को लुक, तो किसी को पूरी फिल्म ही “हकीकत से दूर” लगने लगी।
ग्लोबल टाइम्स की एंट्री – फिल्म से बॉर्डर नहीं हिलेंगे
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने इस पर बाकायदा आर्टिकल छाप दिया। टाइटल भी पूरा समझाने वाला रखा—
फिल्म चाहे जितनी नाटकीय हो, देश की सीमा पर असर नहीं डाल सकती।
मतलब साफ है—सलमान की फिल्म से बॉर्डर तो नहीं हिलेंगे, लेकिन बीजिंग में बेचैनी ज़रूर बढ़ गई है।
गलत वक्त पर फिल्म? – रिश्ते सुधर रहे थे साहब
अखबार ने एक चीनी एक्सपर्ट के हवाले से लिखा कि जब भारत-चीन के रिश्तों में सुधार हो रहा है, तब ऐसी फिल्म का रिलीज होना ठीक नहीं है।
उनका कहना है कि यह फिल्म सिर्फ भारतीय नजरिया दिखाएगी और इससे चीन विरोधी भावना बढ़ सकती है।
ट्रेलर पर तंज – गेम ऑफ थ्रोन्स से तुलना
चीनी सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने ट्रेलर के सीन देखकर इसकी तुलना हॉलीवुड सीरीज ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ से कर दी।
कहने का मतलब यह कि फिल्म उन्हें जरूरत से ज्यादा ड्रामेटिक लग रही है।
सलमान के लुक पर भी चर्चा – बाल और कपड़े भी खटक गए
‘बैटल ऑफ गलवान’ का ट्रेलर 27 दिसंबर को सलमान खान के जन्मदिन पर रिलीज हुआ था।
सलमान इस फिल्म में कर्नल बी. संतोष बाबू का किरदार निभा रहे हैं।
लेकिन चीनी सोशल मीडिया पर कहानी से ज़्यादा सलमान की ड्रेस और हेयर स्टाइल पर चर्चा होने लगी।
चीन का कहना – फिल्म इतिहास नहीं बदल सकती
ग्लोबल टाइम्स ने मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग झोंगपिंग के हवाले से लिखा कि भारत में फिल्मों का इस्तेमाल देशभक्ति की भावना बढ़ाने के लिए किया जाता है,
लेकिन कोई भी फिल्म गलवान झड़प के फैक्ट्स नहीं बदल सकती।
चीन का दावा – गलवान के लिए भारत जिम्मेदार
सॉन्ग झोंगपिंग ने कहा कि गलवान घाटी चीन-भारत सीमा के पश्चिमी हिस्से में LAC के चीनी क्षेत्र में है।
उनके मुताबिक भारतीय सैनिकों ने पहले LAC पार की थी, जिसके जवाब में चीनी सैनिकों ने अपने बॉर्डर की रक्षा की।
चीन का पक्ष – रात में घुसपैठ और बैरिकेडिंग
ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि अप्रैल 2020 से भारत ने LAC के पास सड़क और पुल बनाना शुरू किया।
अखबार का दावा है कि 6 मई 2020 को भारतीय सैनिक रात में LAC पार कर चीनी इलाके में घुसे और बैरिकेड बना दिए, जिससे पेट्रोलिंग में रुकावट आई।
4 सैनिकों की मौत का दावा – लेकिन शक बरकरार
चीन सरकार ने माना कि गलवान झड़प में उसके 4 सैनिक मारे गए और एक गंभीर रूप से घायल हुआ।
हालांकि, चीन के इस दावे पर दुनियाभर में संदेह जताया जाता रहा है।
असल में क्या हुआ था?
‘बैटल ऑफ गलवान’ फिल्म 15–16 जून 2020 की उस वास्तविक घटना पर आधारित है, जब पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने आ गए थे। यह झड़प कई मायनों में ऐतिहासिक और गंभीर थी।
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यह घटना 1967 के बाद पहली बार थी, जब भारत-चीन सीमा पर किसी झड़प में सैनिकों की मौत हुई
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इस संघर्ष में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हुए थे
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शहीदों में कमांडिंग ऑफिसर कर्नल बी. संतोष बाबू भी शामिल थे
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झड़प के दौरान एक भी गोली नहीं चली
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दोनों तरफ के सैनिकों के बीच लाठी, नुकीले डंडों और हाथ-से-हाथ की लड़ाई हुई
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यह संघर्ष ऊंचाई वाले इलाके और गलवान नदी के पास हुआ, जहां कई सैनिक नदी में गिर गए
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इस घटना के बाद भारत-चीन संबंधों में भारी तनाव पैदा हुआ और LAC पर दोनों देशों ने सैनिक और इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ा दिया
यही वह घटना है, जिस पर फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ आधारित बताई जा रही है और जिसे लेकर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस शुरू हो चुकी है।
विदेशी रिपोर्ट्स – आंकड़े कुछ और ही बताते हैं
ऑस्ट्रेलिया की न्यूज साइट ‘द क्लैक्सन’ ने 2022 में दावा किया था कि गलवान झड़प में चीन के 38 सैनिक मारे गए।
रिपोर्ट के मुताबिक कई चीनी सैनिक गलवान नदी में डूब गए थे।
सोशल मीडिया पोस्ट हटे – बात फैलने से पहले
इससे पहले चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीबो पर भी 38 सैनिकों के बहने की बातें सामने आई थीं, लेकिन बाद में सभी पोस्ट हटा दी गईं।
न्यूज वीक का दावा – 60 से ज्यादा मौतें
अमेरिकी अखबार न्यूज वीक ने 2021 में रिपोर्ट छापी थी कि गलवान झड़प में 60 से ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).