झांसी में CBI का छापा! GST दफ्तर बना रिश्वतखोरी का अड्डा, 1.5 करोड़ की डील, उप आयुक्त से अधिवक्ता तक गिरफ्तार, नोटों-जेवरों का अंबार बरामद
झांसी
देश में कर चोरी रोकने और ईमानदारी की दुहाई देने वाले महकमे के भीतर ही अगर रिश्वतखोरी का संगठित खेल चल रहा हो, तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है। झांसी में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) कार्यालय से सामने आई सच्चाई ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे रिश्वतखोरी रैकेट का पर्दाफाश किया, जिसमें विभाग के शीर्ष अधिकारी से लेकर अधिवक्ता और निजी कारोबारी तक शामिल पाए गए।
1.5 करोड़ की रिश्वत डील, GST चोरी में ‘सेटिंग’ का खेल
सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, झांसी स्थित CGST कार्यालय में तैनात अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने एक निजी फर्म को जीएसटी चोरी के मामलों में राहत और अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले 1.5 करोड़ रुपये की अवैध रिश्वत की मांग की। यह रकम किस्तों में वसूली जा रही थी और पूरा रैकेट सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा था।
जाल बिछा, 70 लाख लेते रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारी
सीबीआई ने पूरी योजना के साथ जाल बिछाया। जैसे ही रिश्वत की रकम का लेन-देन हुआ, दो अधीक्षक अनिल तिवारी और अजय कुमार शर्मा को 70 लाख रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि यह पूरी वसूली CGST झांसी में तैनात उप आयुक्त के इशारे पर की जा रही थी।
उप आयुक्त प्रभा भंडारी भी गिरफ्त में, सिस्टम की जड़ तक पहुंची CBI
सीबीआई ने इस मामले में CGST झांसी की उप आयुक्त प्रभा भंडारी को भी गिरफ्तार किया है। एजेंसी का कहना है कि रिश्वत की मांग और उसकी रणनीति उप आयुक्त स्तर से तय की गई थी। यह खुलासा होते ही विभाग में हड़कंप मच गया और उच्च अधिकारियों में खलबली देखी गई।
अधिवक्ता और कारोबारी भी शामिल, पूरा नेटवर्क बेनकाब
जांच में सामने आया कि इस भ्रष्टाचार के जाल में केवल सरकारी अधिकारी ही नहीं, बल्कि अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता और निजी कंपनी जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगतानी भी शामिल थे। आरोप है कि अधिवक्ता ने ‘सेटिंग’ कराने में अहम भूमिका निभाई, जबकि कारोबारी ने अपने मामलों को दबवाने के लिए मोटी रकम देने पर सहमति जताई।
छापेमारी में नोटों का पहाड़, जेवरात और संपत्ति दस्तावेज बरामद
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान करीब 90 लाख रुपये नकद, बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर, और कई अचल संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार तलाशी की कार्रवाई अब भी जारी है और अब तक कुल लगभग 1.60 करोड़ रुपये नकद जब्त किए जा चुके हैं।
भ्रष्टाचार की खुल रही पोल, और बढ़ सकती है गिरफ्तारी
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल एक फर्म तक सीमित नहीं हो सकता। जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि क्या अन्य कंपनियों को भी इसी तरह लाभ पहुंचाया गया और क्या इस रैकेट में और अधिकारी या बिचौलिए शामिल हैं। आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे और नई गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।
मेडिकल के बाद कोर्ट में पेशी, न्यायिक प्रक्रिया शुरू
गिरफ्तार किए गए सभी अभियुक्तों को चिकित्सीय परीक्षण के बाद संबंधित न्यायालयों में पेश किया जाएगा। सीबीआई इस पूरे मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य गंभीर धाराओं में आगे बढ़ा रही है।
सवालों के घेरे में टैक्स सिस्टम, जनता का भरोसा फिर डगमगाया
जिस विभाग का काम कर चोरी रोकना और राजस्व की रक्षा करना है, वही विभाग अगर रिश्वत के सहारे फाइलें निपटाने लगे, तो यह देश की आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत है। झांसी का यह मामला सिर्फ गिरफ्तारी की खबर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की भयावह तस्वीर है।