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“A फॉर अखिलेश” पर सियासी तूफान, अब कोर्ट तक पहुंचा मामला!

सहारनपुर में "A फॉर अखिलेश" PDA पाठशाला विवाद अब कोर्ट पहुंच गया। सपा नेता फ़रहाद आलम को सम्मन जारी, सियासत गरमाई।

सहारनपुर में PDA पाठशाला मामले में नया मोड़, सपा नेता फ़रहाद आलम को कोर्ट से सम्मन

सहारनपुर में बच्चों को “A फॉर अखिलेश, D फॉर डिंपल और M फॉर मुलायम” पढ़ाकर सुर्खियों में आए समाजवादी पार्टी के नेता फ़रहाद आलम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार मामला राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी है। PDA पाठशाला प्रकरण में उनके खिलाफ अदालत से सम्मन जारी हुआ है, जिसके बाद यह मामला एक बार फिर गरमा गया है। फ़रहाद आलम ने सम्मन की तामील को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी निशाना साधा है।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, सहारनपुर के रामनगर क्षेत्र में समाजवादी पार्टी नेता फ़रहाद आलम ने “PDA पाठशाला” शुरू की थी। इस पाठशाला में बच्चों को पारंपरिक ABCD के साथ-साथ राजनीतिक अंदाज में “A फॉर अखिलेश यादव”, “B फॉर बाबा साहेब”, “D फॉर डिंपल यादव” और “M फॉर मुलायम सिंह यादव” पढ़ाया जा रहा था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई थी।

पहले दर्ज हुई थी एफआईआर

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय निवासी की शिकायत पर फ़रहाद आलम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उन पर बिना अनुमति पाठशाला संचालित करने, बच्चों को राजनीतिक सामग्री पढ़ाने और विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य फैलाने से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी।

कोर्ट से जारी हुआ सम्मन

ताजा घटनाक्रम में PDA पाठशाला प्रकरण में अदालत ने फ़रहाद आलम के खिलाफ सम्मन जारी किया है। जानकारी के अनुसार, यह सम्मन 23 अप्रैल को जारी किया गया था, जबकि उन्हें 1 मई को अदालत में पेश होना था।

हालांकि, फ़रहाद आलम का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें निर्धारित तारीख पर पेशी से ठीक पहले ही सम्मन उपलब्ध कराया। उनका कहना है कि यदि समय रहते सम्मन मिला होता, तो वे नियमानुसार अदालत में उपस्थित हो सकते थे।

फ़रहाद आलम ने उठाए सवाल

फ़रहाद आलम ने बताया कि वह किसी जरूरी कार्य से दिल्ली गए हुए थे। इसी दौरान उनके घर पर पुलिस सम्मन लेकर पहुंची। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने जानबूझकर अंतिम समय पर सम्मन तामील कराया।

उन्होंने पुलिसकर्मियों के घर पहुंचने का सीसीटीवी वीडियो भी सार्वजनिक किया है, जिसमें पुलिसकर्मी उनके आवास पर सम्मन देने पहुंचे दिखाई दे रहे हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज

सम्मन जारी होने के बाद सहारनपुर की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। PDA पाठशाला पहले ही राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई थी, और अब कानूनी कार्रवाई ने इसे नया आयाम दे दिया है।

फ़रहाद आलम लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उनका उद्देश्य गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा देना था, साथ ही उन्हें सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता से जोड़ना भी था।

PDA पाठशाला क्यों आई थी चर्चा में?

PDA पाठशाला समाजवादी पार्टी के “पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक” अभियान का हिस्सा बताई गई थी। इस पहल के तहत बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने के साथ-साथ समाजवादी विचारधारा से परिचित कराया जा रहा था।

लेकिन बच्चों को राजनीतिक नेताओं के नामों के साथ वर्णमाला सिखाने पर विवाद खड़ा हो गया था।

आगे क्या?

अब सभी की नजरें इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं। फ़रहाद आलम अदालत में अपना पक्ष रखेंगे। वहीं, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह मामला कानूनी और राजनीतिक रूप से आगे क्या मोड़ लेता है।

फिलहाल, सहारनपुर की यह PDA पाठशाला एक बार फिर सुर्खियों में है, और फ़रहाद आलम की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।