आगरा में अवैध धर्मांतरण गिरोह का बड़ा खुलासा, ATS और कमिश्नरेट की संयुक्त कार्रवाई में चार और गिरफ्तार
आगरा में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। कमिश्नरेट पुलिस और उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) की संयुक्त टीम ने अंतरराज्यीय धर्मांतरण गिरोह से जुड़े चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ ही अब तक इस सनसनीखेज मामले में कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, विदेश में बैठकर नेटवर्क को संचालित करने और फंडिंग करने वाले आरोपी दाऊद के खिलाफ संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी तेज कर दी गई है।
मिशन के तहत लगातार हो रही कार्रवाई
यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआ था, जब आगरा से दो युवतियों के लापता होने की जांच के दौरान पुलिस को एक संगठित अवैध धर्मांतरण नेटवर्क की जानकारी मिली। जांच आगे बढ़ी तो यह नेटवर्क कई राज्यों और विदेशों तक फैला हुआ पाया गया। इसके बाद पुलिस और ATS ने संयुक्त अभियान चलाकर लगातार कार्रवाई शुरू की।
गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी
ताजा कार्रवाई में जिन चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें—
- तलमीज़ उर्फ रहमान (दिल्ली)
- परवेज़ अख्तर (दिल्ली)
- जतिन कपूर (दिल्ली)
- हसन मोहम्मद (राजस्थान)
शामिल हैं। चारों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं, जिनके आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
आरोपियों की भूमिका बेहद चौंकाने वाली
जांच में सामने आया है कि प्रत्येक आरोपी की इस गिरोह में अलग-अलग और बेहद अहम भूमिका थी।
तलमीज़ उर्फ रहमान: धर्मांतरण के लिए करता था प्रेरित
तलमीज़ उर्फ रहमान लोगों को मानसिक रूप से प्रभावित कर धर्मांतरण के लिए तैयार करता था। वह खासतौर पर कमजोर और संवेदनशील लोगों को निशाना बनाता था।
मौलाना हसन: धर्म परिवर्तन के बाद तैयार करता था निकाहनामा
राजस्थान निवासी मौलाना हसन धर्म परिवर्तन के बाद निकाहनामे तैयार कर उन्हें प्रमाणित करता था। इस तरह अवैध गतिविधियों को वैध रूप देने का प्रयास किया जाता था।
परवेज़ अख्तर: दिल्ली में ठहराने की करता था व्यवस्था
परवेज़ अख्तर धर्मांतरण के लिए लाई गई युवतियों और महिलाओं को दिल्ली में ठहराने, लॉजिंग और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करता था।
जतिन कपूर: सोशल मीडिया से करता था ब्रेनवॉश
जतिन कपूर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों से संपर्क करता था। वह वैचारिक रूप से प्रभावित कर उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित करता था।
विदेश से संचालित हो रहा था नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया है कि दाऊद नामक आरोपी विदेश में बैठकर इस पूरे नेटवर्क को आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा था। वह गिरोह के संचालन, फंडिंग और विस्तार में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसते हुए संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अब तक 18 गिरफ्तार, जांच जारी
इस मामले में अब तक कुल 18 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस और ATS की टीमें देश के विभिन्न राज्यों में छापेमारी कर रही हैं। जांच एजेंसियां नेटवर्क के वित्तीय स्रोत, विदेशी कनेक्शन और अन्य सहयोगियों की भूमिका खंगाल रही हैं।
पुलिस कमिश्नर ने बताया
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि यह एक संगठित और सुनियोजित नेटवर्क था, जो सोशल मीडिया, आर्थिक प्रलोभन और भावनात्मक शोषण के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। उन्होंने कहा कि इस गिरोह के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।
अंतरराज्यीय नेटवर्क पर बड़ा वार
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान समेत कई राज्यों में सक्रिय था। इसके तार विदेशों तक जुड़े हुए हैं। पुलिस इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर पहलुओं के मद्देनजर भी जांच रही है।
कमिश्नरेट पुलिस और यूपी ATS की इस संयुक्त कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि अवैध धर्मांतरण, कट्टरपंथ और समाज को बांटने वाली गतिविधियों के खिलाफ सरकार और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।