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सड़क हादसों पर सख्त हुई सरकार, एक्शन मोड में पीलीभीत एआरटीओ

सड़क हादसों पर योगी सरकार सख्त, पीलीभीत में एआरटीओ वीरेंद्र सिंह का बड़ा एक्शन, ओवरलोड और बिना फिटनेस वाहनों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई

सड़क हादसों पर सख्त हुई सरकार, पीलीभीत में एक्शन मोड में दिख रहे एआरटीओ वीरेंद्र सिंह

फिटनेस, ओवरलोडिंग, अवैध संचालन और क्षमता से अधिक सवारी पर लगातार कार्रवाई, सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन का बड़ा अभियान

उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर सरकार अब पूरी तरह सख्त रुख अपनाती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और “टॉप टू बॉटम जवाबदेही” तय करने के निर्देश के बाद प्रदेशभर में परिवहन विभाग, पुलिस प्रशासन और स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया है। सरकार का साफ संदेश है कि सड़क हादसों में किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यही वजह है कि जिलों में अधिकारी लगातार कार्रवाई करते हुए नजर आ रहे हैं।

इसी क्रम में पीलीभीत में एआरटीओ वीरेंद्र सिंह पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश लागू होने के बाद से जिले में फिटनेस विहीन वाहनों, ओवरलोडिंग, क्षमता से अधिक सवारी ढोने वाले वाहनों, मानकों की अनदेखी करने वाले स्कूल वाहनों और अवैध संचालन करने वालों के खिलाफ ताबड़तोड़ अभियान चलाया जा रहा है। परिवहन विभाग की इस सख्ती से वाहन संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।

सड़क हादसों पर सरकार की बड़ी चिंता, अधिकारियों की तय हुई जवाबदेही

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क सुरक्षा को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट कहा है कि अब सड़क हादसों की रोकथाम के लिए हर स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी। सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर सख्त अमल जरूरी है।

बैठक में निर्देश दिए गए कि जिन जिलों और स्थानों पर सबसे अधिक हादसे होते हैं, वहां के ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए जाएं और प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान किया जाए। एक्सप्रेस-वे और हाईवे पर नियमित पेट्रोलिंग बढ़ाने, सड़क सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता अभियान तेज करने और एम्बुलेंस व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया।

सरकार ने स्टंटबाजी, नशे में ड्राइविंग, ओवरलोडिंग और अवैध वाहनों के संचालन को सड़क हादसों का बड़ा कारण मानते हुए इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही परिवहन निगम को निर्देश दिया गया है कि केवल फिटनेस प्रमाणित बसें ही सड़कों पर उतरें और बिना फिटनेस वाले किसी भी वाहन को संचालन की अनुमति न दी जाए।

पीलीभीत में एआरटीओ वीरेंद्र सिंह का सख्त रुख 

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पीलीभीत में एआरटीओ वीरेंद्र सिंह लगातार सड़क पर उतरकर कार्रवाई कर रहे हैं। जिले में विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है जिसमें ओवरलोड वाहन, बिना फिटनेस वाले वाहन, नियमों की अनदेखी करने वाली बसें और क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वाले ऑटो व अन्य सार्वजनिक वाहनों की जांच की जा रही है।

बताया जा रहा है कि कई ऐसे वाहन चिन्हित किए गए हैं जो लंबे समय से बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के सड़कों पर दौड़ रहे थे। ऐसे वाहनों के खिलाफ चालान, सीज और परमिट निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई की जा रही है। वहीं, ऑटो और अन्य सवारी वाहनों में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर संचालन करने वालों पर भी सख्त निगरानी रखी जा रही है।

पीलीभीत में परिवहन विभाग की टीम सड़क किनारे ताबड़तोड़ चेकिंग कर रही है। ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों को रोका जा रहा है और वाहन मानकों की अनदेखी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि सड़क सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

अवैध पार्किंग और अवैध स्टैंड पर भी सख्ती

सरकार ने अवैध पार्किंग और अवैध बस-स्टैंडों को भी हादसों की बड़ी वजह माना है। इसी को ध्यान में रखते हुए पीलीभीत में भी अवैध स्टैंड हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सड़क किनारे बेतरतीब तरीके से खड़े वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है ताकि यातायात बाधित न हो और दुर्घटनाओं की संभावना कम की जा सके।

अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शहर और हाईवे किनारे किसी भी प्रकार की अनधिकृत पार्किंग न होने दी जाए। इसके अलावा बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहन संचालकों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश भी लागू किए जा रहे हैं।

स्कूल वाहनों और फिटनेस पर विशेष नजर

सरकार ने स्कूल वाहनों को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। निर्देश दिए गए हैं कि बिना फिटनेस वाला कोई भी स्कूल वाहन सड़क पर न चले। पीलीभीत में एआरटीओ स्कूल बसों और वैनों की विशेष जांच कर रहे है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन फिटनेस, फायर सेफ्टी, स्पीड गवर्नर और सीटिंग क्षमता की जांच की जा रही है।

क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर वाहन चलाने वालों पर भी कार्रवाई हो रही है। विभाग ने साफ कहा है कि बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

सड़क सुरक्षा अभियान के सकारात्मक आंकड़े

सरकारी आंकड़ों के अनुसार सड़क सुरक्षा अभियान और “जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट” योजना के तहत पिछले चार महीनों में 566 लोगों की जान बचाई गई है। वहीं जनवरी से अप्रैल के बीच सड़क हादसों में 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या में भी करीब 22 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज होने की बात कही गई है।

इन आंकड़ों को सरकार अपनी सख्त नीतियों और जमीनी कार्रवाई का परिणाम मान रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि इसी तरह अभियान लगातार चलता रहा तो आने वाले समय में सड़क हादसों में और अधिक कमी लाई जा सकती है।

जनता से भी सहयोग की अपील

प्रशासन और परिवहन विभाग ने आम लोगों से भी ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील की है। हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन, नशे में वाहन न चलाना और ओवरलोडिंग से बचना सड़क सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी बताया गया है।

पीलीभीत में चल रही कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सिर्फ चेतावनी नहीं बल्कि सीधी कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद परिवहन विभाग पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतर चुका है और एआरटीओ वीरेंद्र सिंह की कार्यशैली इस अभियान को और तेज करती दिखाई दे रही है।

संदेश बिल्कुल साफ है — सड़क सुरक्षा अब केवल अभियान नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता बन चुकी है, और लापरवाही करने वालों के लिए आने वाला समय बेहद कठिन साबित हो सकता है।