Best Mango in India: मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में एक ऐसा आम उगता है, जिसकी सुरक्षा किसी VIP से कम नहीं है। ‘नूरजहां’ नाम का यह खास आम अपने विशाल आकार, दुर्लभता और स्वाद के कारण देश-विदेश में चर्चा में है। हालात ऐसे हैं कि किसान को सिर्फ 9 पेड़ों की सुरक्षा के लिए 10 से 11 हथियारबंद गार्ड तैनात करने पड़े हैं।
कहां उगता है यह खास आम?
यह अनोखा आम आलीराजपुर जिले के जनजातीय क्षेत्र कट्ठीवाड़ा के जूना गांव स्थित शिव आम फार्म में उगाया जाता है।
इस फार्म को किसान भरतराजसिंह जादव संचालित करते हैं, जिनके पास नूरजहां आम के सिर्फ 9 पेड़ हैं।
अफगानिस्तान से आया ‘नूरजहां’
किसान के मुताबिक, यह आम की प्रजाति मूल रूप से अफगान क्षेत्र की है।
1960 के दशक में उनके पिता रणवीरसिंह जादव इसे गुजरात के बनमाह क्षेत्र से लेकर आए थे।
आज ये पेड़ 20-25 साल पुराने हैं और खास ग्राफ्टिंग तकनीक से नए पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं।
2 से 5 किलो तक होता है एक आम
नूरजहां आम की सबसे बड़ी खासियत इसका आकार है।
- एक आम का वजन: 2 से 5 किलो तक
- एक आम: पूरे परिवार के लिए काफी
- स्वाद: बेहद मीठा और सुगंधित
यही वजह है कि यह आम पहली नजर में ही लोगों को आकर्षित कर लेता है।
कीमत सुनकर रह जाएंगे हैरान
इस खास आम की कीमत भी उतनी ही खास है:
- 💸 ₹1500 से ₹3000 प्रति आम
- 📦 पहले से ही एडवांस बुकिंग
कम उत्पादन और ज्यादा डिमांड के कारण यह आम ‘लग्जरी फ्रूट’ की कैटेगरी में आ चुका है।
9 पेड़ों के लिए 10 गार्ड!
इस आम की सुरक्षा सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है।
- सिर्फ 9 पेड़
- लेकिन 10-11 गार्ड तैनात
- 24 घंटे निगरानी
चोरी और नुकसान से बचाने के लिए किसान को यह खास इंतजाम करना पड़ता है। आमतौर पर इतनी सुरक्षा फैक्ट्री या बड़े उद्योगों में देखने को मिलती है।
विदेशों में भी जबरदस्त डिमांड
नूरजहां आम की लोकप्रियता सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है।
- 🇦🇪 UAE
- 🇸🇦 सऊदी अरब
- 🇶🇦 कतर
- 🇰🇼 कुवैत
- 🇺🇸 अमेरिका
- 🇬🇧 UK
इन देशों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। हालांकि उत्पादन सीमित होने के कारण बड़े पैमाने पर निर्यात नहीं हो पाता।
नेशनल लेवल पर मिल चुका सम्मान
इस आम की खासियत को देखते हुए इसे:
- 1999
- 2010
में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान भी मिल चुका है। इससे आलीराजपुर को देशभर में एक अलग पहचान मिली।
मुगलकाल से जुड़ा इतिहास
माना जाता है कि इस आम का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा है।
बड़े आकार और खास स्वाद वाले आमों को उस समय शाही बागों में खास महत्व दिया जाता था।
इसी वजह से इसे ‘नूरजहां’ नाम दिया गया, जो मुगल इतिहास से जुड़ा हुआ है।