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पीलीभीत: मुकुट चोरी या पुजारी को हटाने की साजिश, मंदिर की 5 एकड़ जमीन पर किसकी नजर

पीलीभीत के गजरौला क्षेत्र में मंदिर से दो चांदी के मुकुट चोरी। 5 एकड़ जमीन और बुजुर्ग पुजारी को हटाने की साजिश के एंगल पर उठे सवाल।

पीलीभीत के मंदिर में दो बार हुई मुकुट चोरी: क्या बुजुर्ग पुजारी को हटाने की साजिश? 5 एकड़ जमीन और पुलिस के बयान ने बढ़ाए सवाल

पीलीभीत जिले के गजरौला थाना क्षेत्र के ग्राम मुंडेला कलां के ताल्लुका पुरबा गौटिया स्थित मंदिर में एक सप्ताह के भीतर दो बार चांदी के मुकुट चोरी होने की घटना अब केवल सामान्य चोरी तक सीमित नहीं रह गई है। पूरे मामले ने अब एक नए सवाल को जन्म दे दिया है — क्या यह घटनाएं वास्तव में मंदिर के बुजुर्ग पुजारी को रास्ते से हटाने की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हैं?

यह सवाल यूं ही नहीं उठ रहा। इसकी वजह खुद पुलिस का वह बयान भी है, जिसमें घटना को केवल चोरी नहीं बल्कि संभावित षड्यंत्र और संपत्ति विवाद के नजरिये से भी देखा जा रहा है।

मंदिर के नाम करीब पांच एकड़ बहुमूल्य जमीन बताई जा रही है। ऐसे में लगातार दो बार हुई चोरी और उसके पीछे उभरती आशंकाओं ने पूरे गांव का माहौल बदल दिया है।

पहली चोरी पर चुप्पी, दूसरी घटना ने बढ़ाए शक

मंदिर के पुजारी के मुताबिक पहली चोरी 17 तारीख की तड़के करीब 4 बजे हुई थी। उस समय मंदिर से चांदी का मुकुट गायब हुआ, लेकिन गांव स्तर पर मामले को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया और गजरौला थाना पुलिस तक तत्काल सूचना भी नहीं पहुंचाई गई।

ग्रामीण अब मान रहे हैं कि पहली घटना पर बनी यही चुप्पी दूसरी वारदात की वजह बन गई।

पहली चोरी के ठीक एक सप्ताह बाद 24 तारीख को दिनदहाड़े मंदिर से फिर दूसरा चांदी का मुकुट चोरी हो गया। इस बार घटना उस समय हुई जब बुजुर्ग पुजारी मंदिर परिसर की साफ-सफाई कर रहे थे।

पुजारी का कहना है कि कुछ लोग सामान्य श्रद्धालुओं की तरह मंदिर परिसर के आसपास मौजूद थे। इसी दौरान पीछे की दीवार फांदकर आए लोगों ने मौका देखकर देव प्रतिमा से चांदी का मुकुट उतारा और फरार हो गए।

क्या पुजारी को अक्षम साबित करने की कोशिश हो रही है?

पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा गजरौला थाना पुलिस के उस बयान की हो रही है जिसमें घटना को संपत्ति विवाद और साजिश के एंगल से जोड़कर देखा गया।

थाना प्रभारी ब्रजवीर सिंह ने कहा कि मंदिर के नाम करीब पांच एकड़ जमीन है और यह भी संभव है कि बुजुर्ग पुजारी को हटाने के उद्देश्य से इस प्रकार की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा हो, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि अब पुजारी मंदिर की सुरक्षा और देखरेख करने में सक्षम नहीं हैं।

पुलिस का यह बयान अब गांव में नई बहस का कारण बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब खुद पुलिस इस संभावना को मान रही है कि घटना के पीछे कोई साजिश हो सकती है, तो फिर मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

चोरी भी हुई, साजिश की आशंका भी… लेकिन सवाल अब भी कायम

पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प और चिंताजनक पहलू यह है कि पुलिस यह मान रही है कि मंदिर से चांदी के मुकुट चोरी हुए हैं, लेकिन साथ ही यह भी कह रही है कि मामला केवल चोरी नहीं बल्कि किसी योजनाबद्ध रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

हालांकि अभी तक इस मामले में औपचारिक तहरीर पुलिस तक नहीं पहुंची है। यही वजह है कि जांच शुरुआती स्तर से आगे नहीं बढ़ सकी है।

लेकिन गांव के लोगों का सवाल यह है कि जब धार्मिक स्थल से लगातार दो बार चोरी हो चुकी है और स्वयं पुलिस भी साजिश की आशंका जता रही है, तो क्या केवल तहरीर का इंतजार पर्याप्त माना जा सकता है?

ग्रामीणों में डर और आक्रोश दोनों

लगातार दो घटनाओं के बाद गांव में माहौल तनावपूर्ण हो गया है। लोगों का कहना है कि यह केवल चांदी के मुकुट की चोरी नहीं, बल्कि गांव की धार्मिक आस्था पर चोट है।

ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि यदि वास्तव में मंदिर की जमीन को लेकर कोई अंदरूनी विवाद है, तो आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं।

कुछ ग्रामीणों का मानना है कि यदि पहली घटना के बाद गंभीर निगरानी की जाती, संदिग्ध लोगों पर नजर रखी जाती या मंदिर की सुरक्षा बढ़ाई जाती, तो शायद दूसरी घटना रोकी जा सकती थी।

 सवाल, चर्चा केवल चोरों की नहीं बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया की भी

गांव में अब चर्चा केवल चोरों की नहीं बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया की भी होने लगी है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर चोरी हुए मुकुट कहां गए? क्या किसी संदिग्ध से पूछताछ हुई? क्या मंदिर के आसपास के लोगों से जानकारी जुटाई गई?

हालांकि पुलिस का कहना है कि मामला कई एंगल से देखा जा रहा है, लेकिन अभी तक किसी ठोस नतीजे की जानकारी सामने नहीं आई है।

यही वजह है कि गांव में यह भावना मजबूत होती जा रही है कि मामला जितना दिखाई दे रहा है, उससे कहीं ज्यादा गहरा हो सकता है।

अब सबकी नजर वरिष्ठ अधिकारियों पर

लगातार दो बार हुई चोरी और पुलिस द्वारा जताई गई साजिश की आशंका के बाद अब लोगों की उम्मीदें पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिक गई हैं।

ग्रामीण चाहते हैं कि मामले की जांच केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि यह पता लगाया जाए कि आखिर मंदिर को बार-बार निशाना क्यों बनाया गया और क्या इसके पीछे वास्तव में जमीन, कब्जा या पुजारी को हटाने जैसी कोई बड़ी योजना काम कर रही है।

फिलहाल गांव में हर चर्चा एक ही सवाल के आसपास घूम रही है — क्या यह सिर्फ चोरी है, या फिर मंदिर की बहुमूल्य जमीन तक पहुंचने की कोई सोची-समझी शुरुआत?