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पीलीभीत: देवहा नदी फ्लड प्लेन जोन एरिया पर रसूखदारों ने बना दीं बिल्डिंग और शोरूम, अवैध निर्माण का जाल! कौन मालामाल, कौन बेहाल?

पीलीभीत की देवहा नदी के फ्लड प्लेन जोन में अवैध निर्माणों पर बड़ा खुलासा। रसूखदारों के शोरूम और बिल्डिंगों पर उठे सवाल।

देवहा नदी के फ्लड प्लेन जोन एरिया पर अवैध निर्माण का जाल! आखिर प्रशासन की नाक के नीचे कैसे खड़ी हो गईं दर्जनों इमारतें?

पीलीभीत। बाढ़ जब भी आती है, अपने साथ सिर्फ पानी नहीं, बल्कि तबाही लेकर आती है। मकान ढह जाते हैं, सड़कें बह जाती हैं, वाहन पानी में समा जाते हैं, पशुधन नष्ट हो जाता है और कई बार इंसानी ज़िंदगियां भी बाढ़ की भेंट चढ़ जाती हैं। यही वजह है कि सरकार ने नदियों के किनारे स्थित फ्लड प्लेन जोन यानि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण पर प्रतिबंध लगाया है, ताकि बाढ़ के प्राकृतिक बहाव में बाधा न आए और जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

लेकिन  सवाल यह है कि जब कानून स्पष्ट है, तो फिर देवहा नदी के फ्लड प्लेन में आखिर इतनी बड़ी संख्या में व्यावसायिक निर्माण कैसे खड़े हो गए?

सरकारी नियमों को खुली चुनौती?

देवहा नदी पीलीभीत की जीवनरेखा मानी जाती है। बरसात के मौसम में नदी उफान पर आती है तो शहर से जुड़े कई इलाके जलमग्न हो जाते हैं। एनएच-730, ईदगाह चौराहे से टाइगर तिराहे के बीच का क्षेत्र फ्लड प्लेन जोन में आता है, जहां नियमानुसार स्थायी भवन निर्माण प्रतिबंधित है।

इसके बावजूद इसी क्षेत्र में कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और गोदामों का निर्माण होने का मामला सामने आया है। स्थानीय स्तर पर जिन प्रतिष्ठानों के नाम चर्चा में हैं, उनमें शाहजी मोटोज़ोन प्राइवेट लिमिटेड, डायमंड कार श्रृंगार, वसीम मोटर्स, गुड्डू स्टील वर्क्स, केजीएन आर.एल. मोटर्स और डिजी हब इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अन्य निर्माण शामिल बताए जा रहे हैं। इन निर्माणों के संबंध में प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी स्थिति की जांच जारी है।

सिटी मजिस्ट्रेट का बयान

रॉकेट पोस्ट भारत ने जब पूरे मामले पर सिटी मजिस्ट्रेट विजय वर्धन तोमर से बातचीत की, तो उन्होंने स्वीकार किया कि यह फ्लड प्लेन जोन यानि बाढ़ क्षेत्र है जिसमे नियमों के विपरीत निर्माण हुए हैं, जो अवैध हैं और हमने अभी नोटिस दिया है और जल्द ही इसके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जायेगी।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध थे, तो इन्हें बनने से पहले क्यों नहीं रोका गया?

जिम्मेदारी किसकी?

जानकारी के अनुसार संबंधित क्षेत्र के तकनीकी अधिकारियों को इन निर्माणों की जानकारी पहले से होने के आरोप हैं। यदि ऐसा है, तो क्या उच्च अधिकारियों को समय रहते सूचना दी गई? यदि नहीं, तो क्यों?

कोई भी बहुमंजिला इमारत या विशाल गोदाम एक दिन में तैयार नहीं हो जाता। ऐसे निर्माणों में महीनों, बल्कि कई बार वर्षों का समय लगता है। फिर फ्लड प्लेन जोन में इतने निर्माण होते रहे और प्रशासन को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? यह सवाल अब सार्वजनिक बहस का विषय बन चुका है।

अब सबसे बड़ा सवाल

यदि प्रशासन स्वयं नियमों के उल्लंघन की बात स्वीकार कर रहा है, तो क्या कार्रवाई केवल नोटिस जारी करने तक सीमित रहेगी? या फिर फ्लड प्लेन जोन में बने निर्माणों की वैधता की जांच कर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई भी की जाएगी?

देवहा नदी सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि पीलीभीत की जीवनरेखा है। यदि फ्लड प्लेन पर नियमों के विपरीत निर्माण हुए हैं, तो यह मामला केवल भवन निर्माण का नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित बाढ़ जोखिम और जनसुरक्षा का भी है। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह केवल नोटिस जारी करेगा या कानून के अनुरूप ठोस कदम भी उठाएगा।

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