UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार महिलाओं के लिए बड़ी आर्थिक सहायता योजना लागू करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित योजना के तहत 50 लाख से ज्यादा महिलाओं को कुल ₹50-₹50 हजार की आर्थिक मदद दी जा सकती है। चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में ₹20 हजार की पहली किस्त भेजने और भाजपा की सरकार दोबारा बनने पर ₹10-10 हजार की तीन और किस्तें देने का प्रस्ताव चर्चा में है। हालांकि, योजना अभी मंथन के स्तर पर है और अंतिम फैसला सरकार की मंजूरी के बाद होगा।
चुनाव से पहले महिला वोटबैंक पर BJP की नजर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल जनवरी-फरवरी में संभावित हैं। इससे पहले भाजपा की नजर करीब 5.67 करोड़ महिला वोटरों पर है। बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं के खातों में चुनाव से पहले आर्थिक सहायता पहुंचाने के बाद मिली बड़ी जीत को देखते हुए यूपी में भी इसी तरह की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
बिहार मॉडल की तर्ज पर यूपी में योजना की तैयारी
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटों पर जीत दर्ज की थी। चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में ₹10 हजार की आर्थिक सहायता भेजे जाने को एनडीए के पक्ष में महिलाओं के समर्थन से जोड़कर देखा गया। इसी मॉडल को देखते हुए यूपी में भी महिलाओं को आर्थिक मदद, स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ने वाली योजना लाने पर मंथन शुरू हुआ है।
महिला कल्याण विभाग के जरिए प्रस्तावित हो सकती है योजना
योगी सरकार में महिला सहायता, स्वरोजगार और आर्थिक स्वावलंबन को लेकर नई योजना तैयार करने पर विचार चल रहा है। प्रस्तावित योजना महिला कल्याण विभाग के जरिए लाई जा सकती है। इसके तहत पात्र महिलाओं को कुल ₹50 हजार तक की आर्थिक सहायता देने का विचार है।
BPL और कमजोर परिवारों की महिलाओं को प्राथमिकता
योजना में SC और ST परिवारों की महिलाओं, गरीबी रेखा से नीचे यानी BPL परिवारों की महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। ऐसे परिवारों की महिलाओं को भी योजना में शामिल किया जा सकता है, जिनकी वार्षिक आय ₹12 लाख से ज्यादा नहीं है। पात्रता और अंतिम आय सीमा सरकार के स्तर पर तय की जाएगी।
चुनाव में गेमचेंजर साबित हो सकती है योजना
सरकार से जुड़े लोगों का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने वाली योजना विधानसभा चुनाव में गेमचेंजर साबित हो सकती है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में महिलाओं के लिए कैश ट्रांसफर या आर्थिक सहायता वाली योजनाओं के चुनावी असर को देखते हुए यूपी में भी इसी तरह की योजना पर जोर दिया जा रहा है।
कई राज्यों में महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद
देश के कई राज्यों में महिलाओं के लिए कैश ट्रांसफर योजनाएं पहले से चल रही हैं। इनमें मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना के तहत ₹1,250 प्रति माह, छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना में ₹1,000, झारखंड की मंईयां सम्मान योजना में ₹1,000, दिल्ली की महिला समृद्धि योजना में ₹2,500 और पश्चिम बंगाल की लक्ष्मी भंडार योजना में ₹1,500 से ₹1,700 तक की सहायता शामिल है।
महाराष्ट्र में माझी लाडकी बहिन योजना के तहत ₹1,500, ओडिशा में सुभद्रा योजना के तहत सालाना ₹10 हजार दो किस्तों में, तमिलनाडु की मगलिर उरीमाई थोगाई में ₹1,000, कर्नाटक की गृह लक्ष्मी योजना में ₹2,000 और असम की अरुणोदोई योजना में ₹1,250 की सहायता दी जाती है।
हिमाचल प्रदेश की इंदिरा गांधी प्यारी बहना योजना में ₹1,500, तेलंगाना की महालक्ष्मी योजना में ₹2,500, आंध्र प्रदेश की आदाविथा निधि योजना में ₹1,500, पंजाब की मावां धीयां सत्कार योजना में ₹1,000 से ₹1,500 और गोवा की गृह आधार योजना में ₹1,500 की सहायता का प्रावधान है।
राजनीतिक विश्लेषक ने बताया क्यों महत्वपूर्ण है महिला वोट
राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्रनाथ भट्ट का मानना है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार में महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता देने का चुनावी फायदा मिला है। उनके मुताबिक अगर यूपी में भी ऐसी योजना लागू होती है तो इसका भाजपा को विधानसभा चुनाव में निश्चित तौर पर फायदा मिल सकता है। यूपी में करीब 5.67 करोड़ महिला वोटर होना इस रणनीति को और महत्वपूर्ण बनाता है।
बिहार की तरह यूपी में भी महिलाएं बन सकती हैं गेमचेंजर
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की बड़ी जीत के पीछे महिलाओं के अभूतपूर्व समर्थन को महत्वपूर्ण माना गया। चुनाव से ठीक पहले जीविका दीदी के खातों में ₹10-10 हजार भेजे गए थे। भाजपा और एनडीए के नेताओं के साथ-साथ कई राजनीतिक विश्लेषकों ने भी महिलाओं के इस समर्थन को चुनावी नतीजों में महत्वपूर्ण factor माना।
मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र और बिहार तक महिला योजनाओं का मॉडल
भाजपा ने अलग-अलग राज्यों में महिलाओं को आर्थिक रूप से जोड़ने वाली योजनाओं को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया है। मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना, महाराष्ट्र की मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना और हरियाणा की दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के बाद अब यूपी में भी महिलाओं और बेटियों के वोट को साधने के लिए बड़ी योजना लाने की तैयारी की चर्चा है।
मिशन 2027 में BJP पर बड़ी जीत का दबाव
हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार में भाजपा या एनडीए की जीत के बाद अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 भाजपा के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। बिहार में उम्मीद से ज्यादा बड़ी जीत के बाद यूपी में भी भाजपा पर बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव बढ़ा है। ऐसे में महिला वोटरों को अपने पक्ष में मजबूत करना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
क्या है बिहार का मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना मॉडल?
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना लागू की थी। इसका उद्देश्य हर परिवार की एक महिला को स्वरोजगार से जोड़ना था। योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को चुनाव से पहले ₹10 हजार की आर्थिक सहायता दी गई।
रोजगार शुरू करने के बाद ₹2 लाख तक अतिरिक्त मदद का वादा
बिहार की योजना में यह व्यवस्था बताई गई थी कि महिला को आर्थिक सहायता मिलने के बाद वह स्वरोजगार शुरू करे। रोजगार शुरू करने के बाद सरकार उसके काम का आकलन करेगी और जरूरत के अनुसार उसे कामकाज आगे बढ़ाने के लिए अधिकतम ₹2 लाख तक की अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जा सकती है।
बिहार में 25 लाख महिलाओं को मिले ₹10-10 हजार
बिहार सरकार ने चुनाव से पहले करीब 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में ₹10-10 हजार ट्रांसफर किए थे। इस पर करीब ₹500 करोड़ खर्च हुए। विधानसभा चुनाव में एनडीए ने 202 सीटें जीतीं। इसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों के एक वर्ग ने माना कि महिलाओं को मिली आर्थिक सहायता ने एनडीए की बड़ी जीत में अहम भूमिका निभाई।
महिला वोटरों की संख्या क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
महिला वोटरों की संख्या कई राज्यों में चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखती है। आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में करीब 2.75 करोड़, यूपी में 5.67 करोड़, महाराष्ट्र में 4.46 करोड़, बिहार में 3.41 करोड़, छत्तीसगढ़ में 1.04 करोड़ और झारखंड में करीब 1.26 करोड़ महिला वोटर हैं।
एक महिला को साधने से परिवार के कई वोट प्रभावित होने का दावा
राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि किसी परिवार की महिला को आर्थिक सहायता मिलने का असर सिर्फ उसके वोट तक सीमित नहीं रहता। उनके मुताबिक परिवार की एक महिला को साधने से करीब पांच वोट तक प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से बड़ी संख्या में महिला वोटरों वाले यूपी में ऐसी योजना का राजनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है।
यूपी में करीब 98 लाख महिलाएं स्वरोजगार समूहों से जुड़ीं
उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन पहले से चल रहा है। इसके तहत करीब 10-10 महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाता है। सरकार की ओर से सब्सिडी पर आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।
8.99 लाख परिवारों की 98.76 लाख महिलाएं समूहों से जुड़ीं
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यूपी में फिलहाल 8,99,398 परिवारों की 98,76,389 महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में नई आर्थिक सहायता योजना को मौजूदा महिला स्वरोजगार नेटवर्क से जोड़कर लागू करने की संभावना भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
सपा के PDA की काट बन सकती है महिला रणनीति
भाजपा नेताओं का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को बड़ी आर्थिक सहायता देने की रणनीति समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट बन सकती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा का PDA मुद्दा प्रभावी रहा था और इसके बाद भाजपा की लोकसभा सीटों की संख्या 64 से घटकर 34 रह गई थी।
2027 में महिला वोटों पर भाजपा का बड़ा दांव
लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कथित तौर पर यह आकलन रखा था कि अगर उस समय विधानसभा चुनाव हों तो भाजपा को यूपी में 188 सीटें मिल सकती हैं। अब 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी महिला वोटरों को मजबूत करने की रणनीति पर जोर दे रही है।
क्या यूपी में लागू होगी ₹50 हजार वाली योजना?
फिलहाल यूपी में महिलाओं को कुल ₹50 हजार देने वाली प्रस्तावित योजना सरकार के मंथन के स्तर पर है। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो चुनाव से पहले 20 हजार रुपये की पहली किस्त और चुनाव के बाद भाजपा की सरकार बनने पर तीन किस्तों में 10-10 हजार रुपये देने का प्रस्ताव लागू किया जा सकता है। अंतिम लाभार्थी संख्या, पात्रता, आय सीमा और भुगतान की तारीखों पर सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्थिति साफ होगी।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).