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BRICS Summit 2026: विदेशी मेहमानों को मिला खास गुडी बैग, जानें किस राज्य का कौन-सा प्रोडक्ट हुआ शामिल?

BRICS Summit 2026: विदेशी मेहमानों को मिला खास गुडी बैग, जानें किस राज्य का कौन-सा प्रोडक्ट हुआ शामिल?

BRICS Summit 2026: भारत में हो रहे BRICS Summit 2026 में शामिल होने वाले विदेशी प्रतिनिधियों और मेहमानों के स्वागत का अंदाज भी खास रखा गया है। मेहमानों को एक खास गुडी बैग गिफ्ट किया जा रहा है, जिसमें भारत के अलग-अलग राज्यों की पहचान से जुड़े खाने-पीने के सामान और पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं। इस बैग में बिहार का सत्तू और मखाना, केले के चिप्स, ओडिशा की कॉफी और गुजरात का दुपट्टा रखा गया है।

गिफ्ट बैग में दिखी भारत की विविधता

इस गुडी बैग को सिर्फ एक सामान्य उपहार की तरह नहीं देखा जा रहा है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों के उत्पादों को शामिल करके विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति, खान-पान और स्थानीय परंपराओं से परिचित कराने की कोशिश की गई है। यानी BRICS के मेहमान जब भारत से वापस जाएंगे तो उनके साथ देश के अलग-अलग राज्यों की एक छोटी सी झलक भी जाएगी।

बिहार का सत्तू और मखाना बना खास आकर्षण

गुडी बैग में बिहार का सत्तू और मखाना शामिल किया गया है। सत्तू बिहार के पारंपरिक खान-पान की पहचान है, जबकि मखाना भी राज्य के प्रमुख स्थानीय उत्पादों में शामिल है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में इन दोनों उत्पादों को जगह मिलना स्थानीय उत्पादों को बड़े मंच पर पहचान दिलाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

केले के चिप्स से लेकर ओडिशा की कॉफी तक

गुडी बैग में केले के चिप्स के साथ ओडिशा की कॉफी भी शामिल है। इससे यह साफ है कि उपहार के जरिए सिर्फ एक या दो राज्यों को नहीं, बल्कि भारत के अलग-अलग हिस्सों की खासियतों को सामने रखने की कोशिश की गई है।

गुजरात का दुपट्टा भी गुडी बैग का हिस्सा

इस खास गिफ्ट पैक में गुजरात का दुपट्टा भी शामिल है। खाने-पीने की चीजों के साथ पारंपरिक कपड़े को शामिल करने से भारत की कला, संस्कृति और हस्तशिल्प की झलक भी विदेशी मेहमानों तक पहुंचाई जा रही है।

एक बैग में भारत के कई राज्यों की पहचान

अगर पूरे गुडी बैग को देखें तो इसमें भारत के अलग-अलग हिस्सों की कहानी नजर आती है। बिहार का सत्तू और मखाना, ओडिशा की कॉफी, केले के चिप्स और गुजरात का दुपट्टा मिलकर यह संदेश देते हैं कि भारत की ताकत सिर्फ उसकी अर्थव्यवस्था या राजनीति में नहीं, बल्कि उसकी स्थानीय परंपराओं और विविध संस्कृति में भी है।

भारत मंडपम में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ की खास प्रदर्शनी

BRICS Summit के दौरान नई दिल्ली के भारत मंडपम में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ यानी ODOP की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से चुने गए करीब 70 अनोखे कला और हथकरघा उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं।

770 जिलों के 1,200 से ज्यादा उत्पादों को दुनिया के सामने लाने की तैयारी

यह प्रदर्शनी देश के 770 जिलों के 1,200 से ज्यादा अनोखे उत्पादों को दुनिया के सामने लाने की मुहिम का हिस्सा है। इसका मकसद स्थानीय उत्पादों, कारीगरों और पारंपरिक कला को बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना है।

गुडी बैग और ODOP से एक ही संदेश

BRICS के मेहमानों को दिया जा रहा गुडी बैग और भारत मंडपम में लगी ODOP प्रदर्शनी एक-दूसरे से जुड़ी हुई नजर आती हैं। दोनों में स्थानीय और पारंपरिक भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने रखने पर जोर है। फर्क सिर्फ इतना है कि प्रदर्शनी में मेहमान इन उत्पादों को देख सकते हैं, जबकि गुडी बैग के जरिए भारत की कुछ खास चीजें उनके साथ उनके घर तक जा रही हैं।

मोदी ने पुतिन को दिया तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद

BRICS Summit से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात भी हुई। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तमिल के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी भाषा में अनुवाद भेंट किया।

1,330 दोहों वाले तिरुक्कुरल में क्या है

तिरुक्कुरल तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की रचना है। इसमें कुल 1,330 दोहे हैं। इन दोहों में नैतिक जीवन, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और मानवीय मूल्यों से जुड़े विचार दिए गए हैं। तिरुक्कुरल को तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में माना जाता है और इसका कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

2026 में प्रकाशित हुआ तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद

तिरुक्कुरल का रूसी भाषा में अनुवाद 2026 में प्रकाशित हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से पुतिन को इसका रूसी संस्करण भेंट किया जाना भी भारत की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने रखने का एक खास संकेत है।

पुरी में रेत से बनी BRICS नेताओं की तस्वीर

BRICS नेताओं के भारत पहुंचने के बीच ओडिशा के पुरी में सैंड आर्टिस्ट मानस कुमार साहू ने शुक्रवार को रेत से एक खास कलाकृति बनाई। यह कलाकृति भारत आ रहे BRICS नेताओं के स्वागत के लिए तैयार की गई।

रेत पर मोदी, पुतिन, जिनपिंग और रामाफोसा

इस खास सैंड आर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के चित्र बनाए गए। इस तरह ओडिशा की मशहूर सैंड आर्ट के जरिए भी BRICS सम्मेलन और भारत की सांस्कृतिक पहचान को जोड़ा गया।

सिर्फ गिफ्ट नहीं, भारत की ब्रांडिंग भी

BRICS मेहमानों को दिया जा रहा गुडी बैग इस पूरे आयोजन का एक दिलचस्प हिस्सा है। इसमें रखे उत्पाद भारत के अलग-अलग राज्यों की पहचान हैं। ऐसे में यह उपहार विदेशी मेहमानों को भारत की विविधता से परिचित कराने के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग का भी जरिया बन रहा है।

BRICS Summit के लिए दिल्ली में कड़ी सुरक्षा

जहां एक तरफ भारत विदेशी मेहमानों को अपनी संस्कृति और स्थानीय उत्पादों से परिचित करा रहा है, वहीं उनकी सुरक्षा के लिए दिल्ली में बेहद कड़ी व्यवस्था की गई है। BRICS शिखर सम्मेलन के लिए पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के करीब 30 हजार जवान तैनात किए गए हैं।

मिसाइलों और फाइटर जेट से लेकर एंटी-ड्रोन सिस्टम तक

सम्मेलन की सुरक्षा के लिए एयर डिफेंस में आकाश मिसाइलों के साथ भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान भी तैनात किए गए हैं। जमीन पर एंटी-एयरक्राफ्ट गन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और स्नाइपर भी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा हैं।

विदेशी मेहमानों के लिए 11 होटल और 35 सुरक्षित रूट

विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के लिए 11 होटल और 35 सुरक्षित रूट तय किए गए हैं। इन रूटों पर फेस रिकॉग्निशन कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को गणतंत्र दिवस जैसे हाई-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल की तर्ज पर बेहद सख्त रखा गया है।

12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में BRICS Summit

नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को BRICS Summit आयोजित हो रही है। इससे पहले शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने BRICS Business Forum में भी भाषण दिया।

इस बार BRICS में भारत की संस्कृति भी चर्चा में

BRICS Summit 2026 में बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और नेताओं की बैठकों के बीच भारत का खास गुडी बैग भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। सत्तू, मखाना, केले के चिप्स, ओडिशा की कॉफी और गुजरात के दुपट्टे जैसे उत्पादों के जरिए भारत ने अपने विदेशी मेहमानों को यह बताने की कोशिश की है कि देश की असली पहचान उसकी विशाल सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय उत्पादों में भी बसती है।