BRICS Summit 2026: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें BRICS Summit में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंच गए हैं। उनका विमान नई दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उतरा। भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को भारत मंडपम में हो रहे इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के बीच सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की प्रस्तावित द्विपक्षीय मुलाकात को लेकर है। दोनों नेताओं की मुलाकात आज शाम 5:45 बजे निर्धारित है।
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब दुनिया कई मोर्चों पर उथल-पुथल का सामना कर रही है। ऐसे में भारत और चीन जैसे दो बड़े एशियाई देशों के नेताओं की आमने-सामने बातचीत सिर्फ दो देशों के रिश्तों तक सीमित नहीं रहेगी। इस मुलाकात से निकलने वाले संदेश पर अमेरिका से लेकर रूस, पाकिस्तान और दूसरे प्रमुख देश भी नजर रखेंगे।
सात साल बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति
शी जिनपिंग का भारत पहुंचना अपने आप में एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम है। लंबे अंतराल के बाद चीनी राष्ट्रपति भारत आए हैं और उनकी यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत-चीन संबंधों में उतार-चढ़ाव का दौर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच सीमा को लेकर तनाव ने रिश्तों को प्रभावित किया। इसके बावजूद भारत और चीन के बीच बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए। अब BRICS Summit के मंच पर जिनपिंग की मौजूदगी और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत से यह संकेत मिल सकता है कि दोनों देश अपने रिश्तों को आगे किस दिशा में ले जाना चाहते हैं।
मोदी-जिनपिंग की मुलाकात क्यों है सबसे अहम?
BRICS Summit में कई देशों के नेता मौजूद रहेंगे, लेकिन भारत और चीन के बीच होने वाली बैठक को अलग नजरिए से देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच होने वाली बातचीत में द्विपक्षीय रिश्तों से जुड़े अहम मुद्दे सामने आ सकते हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता, आर्थिक संबंध, व्यापार और आपसी भरोसा जैसे विषय स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण होंगे।
इस बैठक का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं है कि दो बड़े देशों के नेता मिल रहे हैं, बल्कि इसलिए भी है कि दोनों देशों के रिश्तों का असर पूरे एशियाई क्षेत्र और वैश्विक राजनीति पर पड़ता है।
दुनिया में उथल-पुथल के बीच हो रही है मुलाकात
इस समय अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तेजी से बदल रही है। अलग-अलग क्षेत्रों में संघर्ष और तनाव, बड़ी शक्तियों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता के बीच BRICS का यह सम्मेलन हो रहा है।
ऐसे माहौल में भारत और चीन के रिश्ते दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों देश बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, परमाणु शक्ति संपन्न हैं और ग्लोबल साउथ की राजनीति में प्रभावशाली भूमिका रखते हैं।
यही वजह है कि मोदी और जिनपिंग की मुलाकात को केवल एक सामान्य द्विपक्षीय बैठक के रूप में नहीं देखा जाएगा। अगर दोनों नेताओं के बीच सकारात्मक बातचीत होती है तो इसका संदेश BRICS से बाहर भी जाएगा।
चीन के लिए क्या संदेश होगा?
शी जिनपिंग का भारत आना चीन के लिए भी महत्वपूर्ण है। बीते वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव रहा है। ऐसे में भारत की राजधानी में चीनी राष्ट्रपति की मौजूदगी यह दिखाती है कि मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है।
अगर बातचीत के दौरान दोनों पक्ष रिश्तों को स्थिर करने और आपसी सहयोग बढ़ाने की बात करते हैं, तो चीन की ओर से यह संदेश जाएगा कि वह भारत के साथ टकराव के बजाय संवाद के रास्ते को महत्व दे रहा है।
हालांकि सिर्फ एक मुलाकात से रिश्तों के सभी विवाद खत्म नहीं हो सकते। असली महत्व इस बात का होगा कि बातचीत के बाद जमीन पर क्या बदलाव दिखाई देता है।
भारत के लिए क्या संदेश जाएगा?
भारत के लिए यह मुलाकात अपनी रणनीतिक स्वायत्तता दिखाने का भी मौका है।
भारत एक तरफ अमेरिका, यूरोप, जापान और दूसरे देशों के साथ अपने रणनीतिक संबंध मजबूत कर रहा है, तो दूसरी तरफ चीन और रूस जैसे देशों के साथ भी संवाद बनाए हुए है।
मोदी-जिनपिंग की बैठक से यह संदेश जा सकता है कि भारत अपनी विदेश नीति किसी एक खेमे के हिसाब से नहीं चलाता। नई दिल्ली अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर हर महत्वपूर्ण शक्ति के साथ बातचीत करने की क्षमता रखती है।
यानी चीन के साथ बातचीत को अमेरिका या पश्चिम से दूरी के तौर पर देखना जरूरी नहीं है। बल्कि यह भारत की उस नीति को दिखाता है जिसमें अलग-अलग देशों के साथ अलग-अलग मुद्दों पर सहयोग किया जाता है।
भारत के दोस्तों को क्या संदेश मिलेगा?
भारत के रणनीतिक साझेदार इस मुलाकात को इसलिए भी ध्यान से देखेंगे क्योंकि भारत-चीन संबंधों का असर एशिया के शक्ति संतुलन पर पड़ता है।
अगर भारत चीन के साथ अपने मतभेदों को बातचीत के जरिए नियंत्रित करते हुए अमेरिका, रूस, जापान और यूरोपीय देशों के साथ अपने संबंध भी मजबूती से आगे बढ़ाता है, तो इससे भारत की कूटनीतिक स्थिति और स्पष्ट होगी।
भारत यह संदेश दे सकता है कि वह किसी एक देश के दबाव में नहीं है और जरूरत के मुताबिक अलग-अलग देशों के साथ संवाद कर सकता है।
भारत के विरोधियों के लिए क्या संदेश?
इस मुलाकात का असर भारत के विरोधियों और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों पर भी पड़ सकता है।
खास तौर पर पाकिस्तान के नजरिए से भारत-चीन संबंधों में होने वाला कोई भी सुधार महत्वपूर्ण होगा। चीन और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में अगर भारत और चीन के रिश्तों में स्थिरता आती है तो दक्षिण एशिया के रणनीतिक समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
हालांकि भारत के लिए सिर्फ रिश्तों में गर्मजोशी पर्याप्त नहीं होगी। सीमा पर स्थायी शांति, सुरक्षा हितों की रक्षा और चीन-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भारत का रुख अपनी जगह महत्वपूर्ण रहेगा।
BRICS के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है यह मुलाकात?
भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। भारत की BRICS चेयरशिप का थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “Humanity First” के नजरिए पर आधारित है।
भारत की अध्यक्षता में 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इन बैठकों में राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय तथा सांस्कृतिक और लोगों के बीच संपर्क जैसे तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
ऐसे में BRICS के मंच पर भारत और चीन के बीच बेहतर संवाद पूरे समूह के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। दोनों देश अगर साझा मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने का रास्ता तलाशते हैं तो इससे BRICS की भूमिका और मजबूत हो सकती है।
आज क्या-क्या होगा?
18वें BRICS Summit का औपचारिक आगाज आज दोपहर 2 बजे भारत मंडपम में होगा। इसके बाद दोपहर 2:30 बजे समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर पहला सेशन होगा।
शाम 4:30 बजे BRICS नेता “India Innovates” प्रदर्शनी का दौरा करेंगे। इसके बाद शाम 5 बजे फैमिली फोटो और 5:30 बजे संयुक्त पौधारोपण कार्यक्रम होगा।
शाम 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में गाला डिनर आयोजित किया जाएगा।
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय बैठक शाम 5:45 बजे निर्धारित है।
क्या भारत-चीन रिश्तों में नया अध्याय शुरू होगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शी जिनपिंग का भारत दौरा दोनों देशों के रिश्तों में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत करेगा?
इसका जवाब अभी देना जल्दबाजी होगा। भारत और चीन के बीच सीमा, व्यापार और रणनीतिक भरोसे से जुड़े कई मुद्दे अब भी मौजूद हैं। एक बैठक से इन सभी समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।
लेकिन कूटनीति में कई बार बैठक का महत्व उसके तत्काल नतीजे से ज्यादा उसके संदेश में होता है। अगर मोदी और जिनपिंग के बीच बातचीत सकारात्मक माहौल में होती है और दोनों नेता रिश्तों को स्थिर रखने पर जोर देते हैं, तो यह निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण संकेत होगा।
एक तस्वीर, कई संदेश
शी जिनपिंग का भारत पहुंचना और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर पूरी दुनिया में जाएगी। इस तस्वीर को अलग-अलग देश अपने-अपने नजरिए से देखेंगे।
भारत के दोस्तों के लिए यह संदेश हो सकता है कि नई दिल्ली अपनी रणनीतिक स्वायत्तता के साथ आगे बढ़ रही है। चीन के लिए यह संकेत हो सकता है कि भारत के साथ संवाद बनाए रखना जरूरी है। वहीं भारत के विरोधियों के लिए यह संदेश जा सकता है कि नई दिल्ली बड़े देशों के बीच अपने रिश्तों को अपने हितों के हिसाब से संतुलित करने की क्षमता रखती है।
इसलिए BRICS Summit में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं होगी। यह इस बात का संकेत भी दे सकती है कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत और चीन एक-दूसरे को किस नजरिए से देखते हैं और आने वाले समय में उनके रिश्ते प्रतिस्पर्धा, टकराव और सहयोग के बीच किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).