Burqa Ban Italy: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की तैयारी का ऐलान किया है। मेलोनी ने कहा है कि इस संबंध में सरकार जल्द कैबिनेट के सामने प्रस्ताव रखेगी। इसके साथ ही स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या सीमित करने और ऐसे विदेशी छात्रों के माता-पिता के लिए इटैलियन भाषा सीखना अनिवार्य करने का भी प्रस्ताव है, जिनके बच्चों को इटली की शिक्षा व्यवस्था में घुलने-मिलने में गंभीर दिक्कत हो रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभी प्रस्ताव है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे संसद से मंजूरी लेनी होगी, तभी यह कानून का रूप ले सकेगा। प्रस्ताव को संसद की मंजूरी 60 दिनों के भीतर मिलना जरूरी होगी।
स्कूलों में बुर्का-नकाब पर क्यों आया प्रस्ताव?
मेलोनी ने रविवार को अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा संगठन के एक कार्यक्रम में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि स्कूल में चेहरा खुला होना चाहिए और किसी महिला या लड़की पर परंपरा के नाम पर चेहरा ढकने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।
मेलोनी ने इस मुद्दे को लैंगिक समानता और स्कूलों में बेहतर एकीकरण से जोड़ते हुए कहा कि इटली आने वाले और यहां अपना भविष्य बनाने की इच्छा रखने वाले लोगों को इटैलियन भाषा सीखनी चाहिए, देश की संस्कृति समझनी चाहिए और उसके नियमों का सम्मान करना चाहिए।
बुर्का और नकाब, लेकिन हिजाब का जिक्र नहीं
प्रस्ताव में खास तौर पर बुर्का और नकाब का जिक्र किया गया है। बुर्का पूरे शरीर और चेहरे को ढकता है, जबकि नकाब में आमतौर पर आंखें दिखाई देती हैं।
मेलोनी की घोषणा में हिजाब का जिक्र नहीं किया गया है। हिजाब आमतौर पर बाल और गर्दन को ढकता है, लेकिन चेहरा खुला रहता है।
विदेशी छात्रों की संख्या भी होगी सीमित?
बुर्का-नकाब के साथ मेलोनी सरकार स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या पर भी कानूनी सीमा तय करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि एक कक्षा में अधिकतम कितने विदेशी छात्रों को रखने की अनुमति होगी।
दिलचस्प बात यह है कि इटली में विदेशी छात्रों की संख्या पर पहले से ही 30 प्रतिशत की सीमा का ढांचा मौजूद है। इसलिए नया प्रस्ताव मौजूदा व्यवस्था में क्या बदलाव करेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
विदेशी बच्चों के माता-पिता को सीखनी होगी इटैलियन भाषा
प्रस्ताव का एक और अहम हिस्सा विदेशी छात्रों के माता-पिता से जुड़ा है। मेलोनी ने कहा कि जिन विदेशी छात्रों को इटली की शिक्षा व्यवस्था में घुलने-मिलने में गंभीर दिक्कत हो रही है, उनके माता-पिता के लिए इटैलियन भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा।
सरकार का तर्क है कि भाषा की समझ स्कूल और समाज में बेहतर एकीकरण में मदद करेगी। हालांकि, इस नियम को लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
इटली में पहले से है चेहरा ढकने को लेकर कानून
इटली में चेहरा ढकने को लेकर 1975 से कानून मौजूद है, लेकिन इसे सीधे तौर पर बुर्का या नकाब पर पूर्ण प्रतिबंध वाला कानून कहना सही नहीं होगा। इस कानून के तहत ऐसे हेलमेट या कपड़ों पर रोक है, जिनसे किसी व्यक्ति की पहचान करना मुश्किल हो, जब तक इसके लिए उचित कारण न हो।
2008 में इटली की सर्वोच्च प्रशासनिक अदालत के एक फैसले ने स्पष्ट किया था कि धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से पूरे चेहरे को ढकने की अनुमति कुछ परिस्थितियों में हो सकती है, लेकिन पहचान की पुष्टि जरूरी होने पर चेहरा दिखाना पड़ सकता है।
यानी मेलोनी सरकार का नया प्रस्ताव स्कूलों के लिए बुर्का और नकाब पर विशेष नियम बनाने की दिशा में कदम है, न कि पहले से मौजूद कानून के तहत लागू किसी राष्ट्रव्यापी स्कूल बैन की घोषणा।
दुनिया के कई देशों में चेहरे को पूरी तरह ढकने पर प्रतिबंध
बुर्का और नकाब को लेकर इटली पहला देश नहीं है जहां इस तरह की पाबंदियों पर बहस हो रही है। यूरोप और दुनिया के कई देशों में सार्वजनिक जगहों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने वाले कपड़ों पर अलग-अलग तरह के प्रतिबंध या नियम लागू हैं।
इन नियमों का दायरा हर देश में अलग है। कहीं पूरे सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबंध है, कहीं कुछ खास जगहों पर और कहीं पहचान सुनिश्चित करने जैसी परिस्थितियों में चेहरा दिखाना जरूरी होता है।
फ्रांस और बेल्जियम के मामलों में यूरोपीय अदालत का फैसला
फ्रांस में सार्वजनिक जगहों पर चेहरे को ढकने से जुड़े कानून को यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स के सामने चुनौती दी गई थी। 2014 के S.A.S. v. France मामले में अदालत ने फ्रांस के कानून को कन्वेंशन के तहत वैध माना।
बेल्जियम में भी चेहरे को ढकने पर प्रतिबंध से जुड़े मामले यूरोपीय मानवाधिकार अदालत तक पहुंचे हैं। इन मामलों में सार्वजनिक जीवन में लोगों के बीच संपर्क और सामाजिक मेलजोल से जुड़े तर्कों पर भी विचार किया गया।
हालांकि, मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर इन प्रतिबंधों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी रही है। इसलिए अलग-अलग देशों के कानूनों को एक जैसा मानना सही नहीं होगा।
इटली के स्कूलों में करीब 9.3 लाख गैर-इटालियन नागरिकता वाले छात्र
Fondazione ISMU के आंकड़ों के मुताबिक, इटली के स्कूलों में करीब 9.3 लाख ऐसे छात्र पढ़ते हैं, जिनके पास इटली की नागरिकता नहीं है। ये कुल स्कूल छात्रों का करीब 11.6 प्रतिशत हैं—यानी लगभग हर 100 छात्रों में 12 गैर-इटालियन नागरिकता वाले छात्र हैं।
यही वजह है कि विदेशी छात्रों का एकीकरण और स्कूलों में उनकी संख्या इटली की शिक्षा और इमिग्रेशन बहस का अहम हिस्सा बन चुका है।
आपके दिए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 साल में इटली में विदेशी नाबालिगों की कुल आबादी करीब 4.5 प्रतिशत कम हुई है। यानी विदेशी नागरिकता वाले बच्चों की कुल संख्या में गिरावट दर्ज की गई है, भले ही स्कूलों में उनकी मौजूदगी अभी भी महत्वपूर्ण है।
मेलोनी को मिल रही ज्यादा सख्त इमिग्रेशन नीति की चुनौती
इटली में इमिग्रेशन पहले से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा है। 2027 में अगला आम चुनाव होना है और प्रवासन तथा एकीकरण को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
मेलोनी की पार्टी Brothers of Italy (FdI) को अब National Future (FN) जैसी नई दक्षिणपंथी राजनीतिक चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। Reuters के मुताबिक, National Future का नेतृत्व पूर्व जनरल रॉबर्टो वन्नाची कर रहे हैं और पार्टी मेलोनी के गठबंधन से भी ज्यादा सख्त रुख की मांग करती रही है।
जुलाई में ही बुर्का-नकाब पर रोक की मांग उठी थी
National Future ने जुलाई में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की मांग की थी। यानी जिस मुद्दे पर अब मेलोनी सरकार प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है, उस पर उससे भी ज्यादा सख्त रुख रखने वाली राजनीतिक ताकत पहले से दबाव बना रही थी।
हालांकि, यह प्रस्ताव केवल राजनीतिक दबाव का परिणाम है, ऐसा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सरकार ने इसे स्कूलों में एकीकरण, भाषा, सांस्कृतिक समझ और लैंगिक समानता से जोड़कर पेश किया है।
अब आगे क्या होगा?
मेलोनी ने कहा है कि प्रस्ताव जल्द कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इसे संसद में भेजा जाएगा। वहां मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बन सकेगा। मौजूदा जानकारी के मुताबिक, संसद से 60 दिनों के भीतर मंजूरी जरूरी होगी।
इसलिए फिलहाल इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पर नया प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है। अभी यह सरकार की ओर से घोषित प्रस्ताव है। विदेशी छात्रों की नई अधिकतम सीमा भी अभी तय नहीं बताई गई है।
आने वाले दिनों में कैबिनेट और संसद की प्रक्रिया से यह स्पष्ट होगा कि प्रस्ताव अपने मौजूदा रूप में कानून बनता है या इसमें बदलाव किए जाते हैं।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).