Crime News: आजमगढ़ में मंगलवार शाम एक परिवार के भीतर शुरू हुआ विवाद कुछ ही घंटों में चार हत्याओं और बंधक संकट में बदल गया। अहिरौला थाना क्षेत्र में अरविंद सिंह (42) ने पहले अपनी पत्नी और दो पुजारियों को गोली मार दी। इसके बाद वह अपने तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया। बाहर पुलिस का घेरा बढ़ता गया और अंदर से आरोपी बच्चों को मारने की धमकी देता रहा। करीब 7 घंटे बाद उसने एक बच्चे पर गोली चला दी। इसके बाद ATS और SOG की टीम ने ऑपरेशन शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी टीम पर अरविंद ने रिवॉल्वर से 6 राउंड फायर किए, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई।
पत्नी और दो पुजारियों की हत्या से शुरू हुआ खौफनाक घटनाक्रम
घर में चल रही थी चार दिन से पूजा
यह पूरा मामला जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर अहिरौला थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, अरविंद के परिवार को शक था कि उसके भाई सुनील सिंह की आत्मा उसे परेशान कर रही है। इसी वजह से उसकी मां कमला देवी और पत्नी बबीता ने घर में महामृत्युंजय जाप और पूजा शुरू कराई थी।
पुजारी हिमांशु के मुताबिक, घर में करीब चार दिन से पूजा चल रही थी। मंगलवार को पूजा की पूर्णाहुति थी। वह अपने पिता अखिलेश मिश्रा, पंडित महेंद्र पाठक समेत चार लोगों के साथ पूजा करा रहे थे।
अरविंद पहले से पूजा का विरोध कर रहा था
पुजारी हिमांशु ने पुलिस को बताया कि अरविंद पहले ही उन्हें घर नहीं आने की चेतावनी दे चुका था। सोमवार को भी उसने अगले दिन पूजा के लिए नहीं आने को कहा था। इसके बावजूद मंगलवार को पूर्णाहुति के लिए पुजारी घर पहुंचे।
मंगलवार शाम करीब 6 बजे अरविंद बाजार से घर लौटा। इसके बाद पत्नी बबीता से उसका विवाद शुरू हो गया। पुजारी हिमांशु के मुताबिक, अरविंद पूजा को लेकर नाराज था और बहस के दौरान गुस्से में आ गया।
पहले पत्नी से बहस, फिर पुजारियों से आधार कार्ड मांगा
‘आधार कार्ड दिखाओ’ पर बढ़ गया विवाद
हिमांशु के मुताबिक, अरविंद ने पुजारियों से उनका आधार कार्ड मांगना शुरू कर दिया। पुजारियों ने कहा कि वे पूजा कराने आए हैं और आधार कार्ड लेकर घूमने वाले लोग नहीं हैं।
पुजारी के अनुसार, उन्होंने अरविंद से कहा कि वे न तो फेरी लगाने वाले हैं और न ही नेपाल या बांग्लादेश से आए हैं, फिर भी अरविंद अपनी बात पर अड़ा रहा।
इसी दौरान बबीता ने पति से कहा कि पुजारियों का अपमान न करे। यहीं से विवाद और भड़क गया।
पत्नी ने पुजारियों का बचाव किया तो गोली मार दी
पुजारी हिमांशु के मुताबिक, बबीता के इतना कहने पर अरविंद ने उससे कहा—“तेरे चक्कर में मेरे भाई की हत्या हो गई। अब तू यहां ड्रामा कर रही है।”
इसके बाद अरविंद कमरे से अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर लेकर आया और पत्नी बबीता को गोली मार दी।
पुजारियों ने वहां से भागने की कोशिश की। हिमांशु के मुताबिक, वह किसी तरह दीवार कूदकर अपनी जान बचाने में सफल रहा, लेकिन उसके पिता अखिलेश मिश्रा को अरविंद ने गोली मार दी। दूसरे पुजारी महेंद्र पाठक चौखट तक पहुंच चुके थे, तभी उन्हें भी गोली मार दी गई।
इस तरह कुछ ही देर में अरविंद की पत्नी और दो पुजारियों की हत्या हो चुकी थी।
गोलियों की आवाज सुनकर जुटी भीड़, बच्चों को बनाया बंधक
खुद को तीन बच्चों के साथ कमरे में किया बंद
फायरिंग की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे। भीड़ बढ़ती देख अरविंद ने अपने तीन बच्चों को लेकर खुद को एक कमरे में बंद कर लिया।
पड़ोसी गोलू सिंह के मुताबिक, उन्होंने पुलिस को फोन किया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया।
पुलिस के मुताबिक, करीब 10 थानों की फोर्स मौके पर पहुंच गई थी। इसके बावजूद अरविंद बच्चों को मारने की धमकी दे रहा था। स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी।
पुलिस घंटों करती रही सरेंडर के लिए समझाने की कोशिश
बच्चे कमरे के अंदर थे और अरविंद के पास लाइसेंसी रिवॉल्वर थी। पुलिस ने उसे समझाकर सरेंडर कराने की कोशिश शुरू की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ATS और SOG की टीम को भी बुलाया गया। करीब 45 जवानों को ऑपरेशन के लिए लगाया गया। टीम लगातार अरविंद से बातचीत कर उसे हथियार डालने और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए समझाती रही।
लेकिन वह सरेंडर के लिए तैयार नहीं हुआ।
करीब 7 घंटे बाद बच्चे पर चलाई गोली
रात करीब 1 बजे हालात अचानक बिगड़ गए
कई घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद रात करीब 1 बजे स्थिति बेहद गंभीर हो गई। पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने कमरे के अंदर मौजूद एक बच्चे पर गोली चला दी।
इसके बाद सुरक्षा बलों ने इंतजार करना खतरनाक समझा और कमरे में प्रवेश करने का फैसला किया।
ATS-SOG की टीम ने पहले स्मोक ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया। इसके बाद दरवाजा तोड़कर जवान कमरे के अंदर दाखिल हुए।
अरविंद ने जवानों पर भी 6 राउंड फायर किए
पुलिस के मुताबिक, जवानों के कमरे में घुसते ही अरविंद ने उन पर अपनी रिवॉल्वर से करीब 6 राउंड फायर किए।
इसके जवाब में जवानों ने गोली चलाई। जवाबी कार्रवाई में अरविंद सिंह मारा गया।
इस तरह मंगलवार शाम करीब 6 बजे पत्नी और पुजारियों से शुरू हुआ विवाद रात करीब 1 बजे पुलिस ऑपरेशन और एनकाउंटर तक पहुंच गया।
इस हत्याकांड में कुल 5 लोगों की मौत
अरविंद समेत पत्नी और दोनों पुजारी मारे गए
इस पूरी घटना में अरविंद के अलावा उसकी पत्नी बबीता (40), पुजारी महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (55) की मौत हुई। इसके अलावा बंधक बनाए गए बच्चों में से एक की भी गोली लगने से मौत हुई।
यानी परिवार के भीतर शुरू हुए इस विवाद और उसके बाद हुई फायरिंग में कुल पांच लोगों की जान गई।
परिवार में अब अरविंद की 70 वर्षीय मां कमला देवी और उसकी दो बेटियां बची हैं। पोस्टमॉर्टम के बाद दोपहर करीब डेढ़ बजे शव घर लाए गए और अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी गईं। घर के बाहर पुलिस फोर्स तैनात है।
बालासाहेब ठाकरे के गनर थे अरविंद के भाई सुनील, 8 साल पहले हुई थी हत्या
इस हत्याकांड के पीछे करीब 8 साल पुरानी एक ऐसी कहानी भी सामने आ रही है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। अरविंद सिंह के बड़े भाई सुनील सिंह महाराष्ट्र में रहते थे और परिवार के मुताबिक, वह शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के गनर रह चुके थे।
साल 2018 में सुनील सिंह की उनके ही चचेरे भाइयों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। सुनील की पत्नी के भाई सूरज सिंह के मुताबिक, सुनील गांव में अरविंद के साथ भंडारे में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान चचेरे भाई मनीष सिंह और अवनीश ने दोनों को घेर लिया।
सूरज के मुताबिक, आरोपियों ने सुनील को दौड़ाकर गोली मारी, जबकि अरविंद के साथ भी मारपीट की गई। इस हत्या के बाद सुनील की पत्नी ममता ने मनीष और अवनीश के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और परिवार के मुताबिक, दोनों करीब डेढ़ महीने पहले ही जेल से बाहर आए थे।
सुनील की हत्या के पीछे क्या थी रंजिश?
परिवार की ओर से इस पुराने मामले को लेकर एक और गंभीर दावा किया गया है। सुनील की पत्नी के भाई सूरज सिंह के मुताबिक, बबीता का मनीष के साथ कथित अफेयर था और इसकी जानकारी सुनील को हो गई थी।
सूरज का दावा है कि इसके बाद सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी, छिनैती और छेड़खानी समेत कई मामलों में शिकायत की थी। परिवार का आरोप है कि इसी रंजिश के चलते मनीष ने सुनील की हत्या की थी।
इन आरोपों और पुराने हत्याकांड के कारणों की पुष्टि संबंधित पुलिस रिकॉर्ड/जांच से ही होगी। लेकिन इतना साफ है कि 2018 में भाई की हत्या से जुड़ी पुरानी रंजिश और मंगलवार को हुई चार लोगों की मौत की घटना के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी सामने आ रही है।
भाई की मौत के बाद अरविंद के व्यवहार में बदलाव का दावा
पड़ोसी और परिवार के लोगों ने बताया कि सुनील की हत्या के बाद अरविंद के व्यवहार में बदलाव आया था। परिवार आर्थिक परेशानी से भी गुजर रहा था।
इसी दौरान परिवार में यह मान्यता बनी कि सुनील की आत्मा अरविंद को परेशान कर रही है। इसी वजह से मां कमला देवी और पत्नी बबीता ने घर में महामृत्युंजय जाप और पूजा शुरू कराई थी।
लेकिन अरविंद इस पूजा का विरोध कर रहा था। मंगलवार को इसी विरोध ने पत्नी और पुजारियों से विवाद का रूप लिया और कुछ ही देर में मामला गोलीबारी तक पहुंच गया।
‘भाई की आत्मा परेशान कर रही थी’, इसलिए हो रही थी पूजा
पुजारी ने बताई पूजा कराने की वजह
पुजारी हिमांशु ने पुलिस को बताया कि परिवार को लगता था कि अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की आत्मा उसे परेशान कर रही है।
इसी वजह से उसकी मां कमला देवी और पत्नी बबीता ने पूजा कराने के लिए पुजारियों को बुलाया था। हिमांशु के मुताबिक, अरविंद ने उन्हें पहले ही घर न आने की चेतावनी दी थी, क्योंकि वह इस पूजा का विरोध कर रहा था।
परिवार की इसी मान्यता और अरविंद के विरोध के बीच मंगलवार को पूजा की पूर्णाहुति थी। उसी शाम विवाद हुआ और देखते ही देखते फायरिंग शुरू हो गई।
मां ने कहा- ‘मेरा परिवार उजड़ गया’
बेटे ने पुजारियों से आधार कार्ड मांगा था
अरविंद की मां कमला देवी ने बताया कि उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है। उन्होंने कहा कि उनके दो बेटे थे और अब दोनों नहीं रहे।
कमला देवी के मुताबिक, अरविंद ने पुजारियों से आधार कार्ड दिखाने को कहा था। पुजारी ने जवाब दिया कि वे उसे पहचानते नहीं हैं, इसलिए आधार कार्ड दिखाने की बात पर विवाद हुआ। पुजारी ने यह भी कहा कि उनके पास आधार कार्ड नहीं है।
इसके बाद अरविंद पुजारियों को मारने के लिए दौड़ा। बहू बबीता उनके सामने आ गई और पुजारियों का अपमान न करने को कहा। इसके बाद गुस्से में अरविंद ने गोली चला दी।
बहन बोली- ‘भाई का इलाज चल रहा था’
एक दिन पहले ही घर गई थी बहन
अरविंद की बहन साधना ने रोते हुए बताया कि उसे वारदात की जानकारी अगले दिन सुबह टीवी पर खबर देखने के बाद हुई।
साधना के मुताबिक, अरविंद का इलाज चल रहा था और परिवार को लगता था कि उसका व्यवहार बदल गया था। उन्होंने बताया कि वह एक दिन पहले भी घर आई थीं, लेकिन अरविंद ने दरवाजा नहीं खोला।
साधना के मुताबिक, अरविंद ने उनसे पूछा था कि वह क्यों आई हैं और क्या उनका यह घर नहीं है। इसके बाद उसने दरवाजा नहीं खोला और उन्हें वापस लौटना पड़ा।
‘पूजा से ठीक होने’ की बात कही गई थी
साधना ने बताया कि पुजारी ने उनकी मां और भाभी से कहा था कि घर में पूजा कराने से अरविंद ठीक हो जाएगा। इसी वजह से दोनों पूजा करा रही थीं।
उनके मुताबिक, अरविंद पूजा का विरोध करता था और इसी विवाद के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
पड़ोसी ने बताया- भाई की हत्या के बाद बदल गया था व्यवहार
पूजा रोकने को कहता था अरविंद
पड़ोसी गोलू सिंह के मुताबिक, अरविंद लगातार पूजा का विरोध कर रहा था और पत्नी तथा मां से पूजा बंद करने को कहता था।
गोलू के मुताबिक, मंगलवार शाम विवाद बढ़ा और अरविंद ने पत्नी तथा दोनों पुजारियों की हत्या कर दी। गोली की आवाज सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे तो उसने बच्चों के साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया।
गोलू ने ही पुलिस को फोन करने की बात बताई। उनके मुताबिक, पुलिस काफी देर तक अरविंद को समझाती रही, लेकिन वह नहीं माना।
गोलू ने यह भी कहा कि भाई की हत्या के बाद अरविंद का व्यवहार बदलता गया था और परिवार आर्थिक परेशानी से भी गुजर रहा था। उन्होंने अरविंद को लेकर मानसिक रूप से परेशान होने की बात कही, लेकिन यह पड़ोसी का बयान है; इसे किसी स्वतंत्र चिकित्सकीय निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
एक विवाद ने कैसे लिया इतना खौफनाक मोड़?
6 बजे बहस से रात 1 बजे एनकाउंटर तक
पूरी घटना को समय के क्रम में देखें तो मंगलवार शाम करीब 6 बजे अरविंद के बाजार से लौटने के बाद पत्नी से विवाद शुरू हुआ। पूजा को लेकर पहले से नाराजगी थी। इसके बाद पुजारियों से आधार कार्ड मांगने को लेकर कहासुनी हुई।
पत्नी ने पुजारियों का बचाव किया तो अरविंद ने पहले उसे गोली मारी। भागने की कोशिश कर रहे दोनों पुजारियों पर भी फायरिंग की गई। इसके बाद भीड़ जुटने लगी तो अरविंद तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया।
पुलिस ने करीब 10 थानों की फोर्स लगाकर उसे घेर लिया। हालात बिगड़ने पर ATS और SOG के करीब 45 जवान पहुंचे। कई घंटे तक सरेंडर के लिए समझाया गया।
रात करीब 1 बजे बच्चे पर गोली चलने के बाद ऑपरेशन शुरू हुआ। स्मोक ग्रेनेड और टियर गैस के बाद जवान कमरे में घुसे। पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने जवानों पर 6 राउंड फायर किए। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
इस तरह करीब 7 घंटे तक चला बंधक संकट पांच लोगों की मौत के साथ खत्म हुआ। अब पुलिस के सामने इस पूरे घटनाक्रम की जांच, फायरिंग की परिस्थितियों और परिवार के पुराने विवादों की कड़ियों को जोड़ने की जिम्मेदारी है।
I have started working as a crime reporter in 2011 for a daily local newspaper named ‘Khusro Mail’. I have also worked for many news organization such as Public Vibe app and Oneindia Hindi news portal. Now I am working as Editor In Chief for Rocket Post Bharat (rocketpostbharat.com).