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Pilibhit News: किसानों का 209 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान बकाया? सपा नेता हेमराज वर्मा के पीलीभीत विधायक पर गंभीर आरोप..

Pilibhit News: किसानों का 209 करोड़ रुपये गन्ना भुगतान बकाया? सपा नेता हेमराज वर्मा के पीलीभीत विधायक पर गंभीर आरोप..

Pilibhit News: पीलीभीत में गन्ना भुगतान और धान की खरीद को लेकर किसानों की परेशानी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्यमंत्री हेमराज वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बरखेड़ा की बजाज चीनी मिल पर किसानों का करीब 112 करोड़ रुपये और मकसूदापुर चीनी मिल पर लगभग 97 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल तय होने के बावजूद किसानों को औने-पौने दाम पर फसल बेचनी पड़ रही है। हेमराज वर्मा ने गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक की जवाबदेही पर सवाल उठाए।

गन्ना भुगतान का मुद्दा: दो चीनी मिलों पर 209 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा

बजाज और मकसूदापुर चीनी मिल को लेकर क्या बोले हेमराज वर्मा?

हेमराज वर्मा ने गन्ना भुगतान का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि पीलीभीत के बरखेड़ा स्थित बजाज चीनी मिल पर किसानों का करीब 112 करोड़ रुपये बकाया है। वहीं, मकसूदापुर चीनी मिल पर लगभग 97 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी होने की बात कही गई। दोनों मिलों की बताई गई रकम को जोड़ने पर कुल बकाया करीब 209 करोड़ रुपये होता है। ये आंकड़े हेमराज वर्मा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए विवरण पर आधारित हैं।

गन्ने की खेती में किसान को खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर पहले से पैसा लगाना पड़ता है। फसल तैयार होने के बाद उसे चीनी मिल तक पहुंचाने में भी मेहनत और खर्च होता है। ऐसे में गन्ना बेचने के बाद भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़े, तो किसान का पूरा आर्थिक हिसाब बिगड़ सकता है।

गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार और CM योगी पर उठाए सवाल

हेमराज वर्मा ने सवाल उठाया कि जब सरकार किसानों के हितों की बात करती है, तो गन्ना भुगतान में देरी के मामलों में प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? उन्होंने गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लेते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।

पीलीभीत में गन्ना भुगतान की समस्या पहले भी विरोध-प्रदर्शनों का मुद्दा बन चुकी है। जून 2026 में गन्ना भुगतान की मांग को लेकर मंत्री के आवास का घेराव किए जाने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में किसानों के सामने सवाल है कि बकाया रकम का भुगतान कब होगा और उन्हें अपने पैसे के लिए कितना और इंतजार करना पड़ेगा।

धान का MSP 2,441 रुपये, फिर भी कम दाम पर बिक्री का आरोप

धान खरीद में देरी को लेकर सरकार पर हमला

हेमराज वर्मा ने धान खरीद की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सामान्य व्यवस्था के अनुसार धान की सरकारी खरीद एक अक्टूबर से शुरू होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार किसानों को इंतजार करना पड़ा। आरोप है कि खरीद व्यवस्था समय पर सक्रिय नहीं होने के कारण किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ी।

खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है। MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह तय कीमत है, जिसके जरिए सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने का प्रयास करती है। हालांकि, MSP तय होने और हर किसान को उसी कीमत पर अपनी फसल बेचने का अवसर मिलने के बीच सरकारी खरीद व्यवस्था की अहम भूमिका होती है।

पीलीभीत, पूरनपुर और बीसलपुर मंडियों को लेकर क्या दावा?

हेमराज वर्मा ने आरोप लगाया कि पीलीभीत की मंडियों में किसान औने- पौने यानि लागत का भी पूरा दाम न मिला पाने की स्थिति में धान बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने अलग-अलग मंडियों में कम कीमत पर बेचे जा चुके धान की मात्रा के बारे में भी आंकड़े दिए।

उनके मुताबिक, पीलीभीत नवीन मंडी में करीब 1.25 लाख क्विंटल, पूरनपुर मंडी में लगभग 3,000 क्विंटल और बीसलपुर मंडी में करीब 10,000 क्विंटल धान कम कीमतों पर बेचा जा चुका है। इन मात्रा संबंधी आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

यदि किसान को MSP से कम कीमत पर धान बेचना पड़ता है, तो उसे प्रति क्विंटल नुकसान हो सकता है। खासकर उन किसानों के लिए यह स्थिति मुश्किल होती है, जिन्हें अगली फसल की तैयारी, कर्ज चुकाने और घर का खर्च चलाने के लिए तुरंत पैसों की जरूरत होती है।

धान खरीद में देरी से बिचौलियों को फायदा मिलने का आरोप

सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार क्यों मुश्किल?

हेमराज वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद में देरी होने से किसानों की मजबूरी का फायदा बिचौलियों और फसल कारोबारियों को मिल सकता है। उनका सवाल है कि जब सरकार ने धान का समर्थन मूल्य तय कर रखा है, तो किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था का इंतजार क्यों करना पड़ता है?

धान की कटाई के बाद किसान के सामने फसल को सुरक्षित रखने, नमी की स्थिति, मौसम और तत्काल नकदी की जरूरत जैसी कई चुनौतियां होती हैं। अगर सरकारी खरीद केंद्रों पर समय से तौल नहीं होती या खरीद की प्रक्रिया में देरी होती है, तो कुछ किसानों को मजबूरी में निजी खरीदारों को कम कीमत पर धान बेचना पड़ सकता है।

हालांकि, सरकारी खरीद में देरी जानबूझकर बिचौलियों को फायदा पहुंचाने के लिए की गई, इस आरोप की पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य जरूरी हैं। फिलहाल यह हेमराज वर्मा की ओर से उठाया गया सवाल और आरोप है।

12 अक्टूबर से खरीद शुरू करने की घोषणा, जिले में 148 क्रय केंद्र

पीलीभीत में 12 अक्टूबर से सरकारी धान खरीद शुरू करने की घोषणा की गई थी। इसके लिए जिले में 148 क्रय केंद्र निर्धारित किए गए। लेकिन किसानों के लिए केवल क्रय केंद्रों की संख्या घोषित होना ही पर्याप्त नहीं है।

जरूरी यह है कि केंद्रों पर धान की तौल समय से हो, गुणवत्ता की जांच पारदर्शी तरीके से की जाए और पात्र किसानों को तय प्रक्रिया के अनुसार भुगतान मिले। खरीद व्यवस्था का लाभ तभी दिखाई देगा, जब किसान बिना अनावश्यक परेशानी के अपनी उपज बेच सकेंगे।

किसान हितैषी सरकार के दावों पर हेमराज वर्मा ने उठाए सवाल

किसानों को भाषण नहीं, फसल का उचित मूल्य चाहिए

हेमराज वर्मा ने गन्ना भुगतान और धान खरीद की समस्याओं को लेकर योगी सरकार पर किसानों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकार किसानों के हितों की बात तो करती है, लेकिन किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने और बकाया भुगतान कराने के मामले में जमीनी स्तर पर ठोस नतीजे दिखने चाहिए।

उनके मुताबिक, गन्ना भुगतान में देरी और धान की कम कीमत पर बिक्री जैसी समस्याएं किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर डालती हैं। किसान को अपनी मेहनत का पैसा समय पर मिले, ताकि वह परिवार का खर्च चला सके, कर्ज चुका सके और अगली फसल की तैयारी कर सके।

अब सरकार के सामने दो बड़े सवाल

पीलीभीत के किसानों से जुड़े इस मुद्दे पर अब दो सवाल सबसे अहम हैं। पहला, बजाज और मकसूदापुर चीनी मिलों पर बकाया बताए जा रहे गन्ना भुगतान को लेकर क्या कार्रवाई होगी और किसानों को उनका पैसा कब मिलेगा? दूसरा, सरकारी धान खरीद व्यवस्था के जरिए किसानों को MSP का लाभ किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा?

हेमराज वर्मा ने इन मुद्दों को उठाकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, बकाया रकम और मंडियों में कम कीमत पर हुई बिक्री से जुड़े आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। संबंधित विभागों और चीनी मिलों की ओर से इन दावों पर स्थिति स्पष्ट होने से मामले की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिले और भुगतान के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े। अब देखना होगा कि गन्ना भुगतान और धान खरीद को लेकर उठे इन सवालों पर संबंधित विभाग क्या कदम उठाते हैं।