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Pilibhit News: पूरनपुर में करीब 70 और 66 साल की दो बुजुर्ग महिलाओं ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर अपनी 915 वर्गमीटर की संपत्ति को कब्जे से मुक्त कराने और सुरक्षा देने की मांग की है। शिकायत में डॉ. यशपाल भाटी और उनकी पत्नी डॉ. मुनीता सिंह पर भवन खाली न करने, अस्पताल का सामान बेचने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। मामला सामने आने के बाद अब प्रशासन की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना और संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।

915 वर्गमीटर की संपत्ति को लेकर क्या है पूरा विवाद?

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की पूरनपुर तहसील में दो बुजुर्ग महिलाओं की संपत्ति से जुड़ा विवाद प्रशासन के सामने आया है। 12 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, रजनी अग्रवाल, पत्नी जगमोहन राय अग्रवाल, और चमन अग्रवाल, पत्नी विजय कुमार अग्रवाल, निवासी ग्राम चांट फिरोजपुर, तहसील पूरनपुर ने डॉ. यशपाल भाटी और उनकी पत्नी डॉ. मुनीता सिंह के खिलाफ शिकायत की है।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि करीब 915 वर्गमीटर का भवन उनकी संपत्ति है। उनका आरोप है कि विवाद के चलते वे अपनी ही संपत्ति का इस्तेमाल नहीं कर पा रही हैं। दोनों महिलाओं ने प्रशासन से भवन को कब्जे से मुक्त कराने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

जसवंत देवी मेमोरियल आई हॉस्पिटल के सामान को बेचने का आरोप

प्रार्थना पत्र में बताया गया है कि संबंधित भवन में पहले जसवंत देवी मेमोरियल आई हॉस्पिटल संचालित होता था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल की मशीनें, फर्नीचर और अन्य सामान बेच दिया गया।

महिलाओं का यह भी कहना है कि भवन खाली करने के लिए कहने के बावजूद उसे खाली नहीं किया गया। इसके साथ ही संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है। इन आरोपों के संबंध में अभी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है और विपक्षी पक्ष का जवाब भी सामने आना बाकी है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।

सड़क दुर्घटना में बेटे-बहू की मौत, तीन नाबालिग बच्चों की जिम्मेदारी

शिकायत में परिवार की एक दुखद घटना का भी जिक्र किया गया है। रजनी अग्रवाल के पुत्र तनुज अग्रवाल और उनकी पत्नी प्रियंका अग्रवाल की वर्ष 2025 में सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उनके पीछे तीन नाबालिग बच्चे हैं, जिनकी जिम्मेदारी परिवार पर है।

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, विवादित संपत्ति उनके जीवनयापन और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में संपत्ति का विवाद उनके लिए आर्थिक और पारिवारिक चिंता का विषय बना हुआ है। दोनों महिलाओं ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर राहत दिलाने की मांग की है।

योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बीच प्रशासन की भूमिका अहम

उत्तर प्रदेश सरकार अवैध कब्जों और भू-माफिया के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की बात करती है। ऐसे में बुजुर्ग महिलाओं की ओर से संपत्ति पर कब्जे से संबंधित शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि, किसी भी मामले में आरोप लगने मात्र से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता। इस शिकायत में भी संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और वास्तविक कब्जे की स्थिति की जांच जरूरी है। अस्पताल के सामान की बिक्री और भवन को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की भी निष्पक्ष तरीके से जांच की जानी चाहिए।

अब DM से कार्रवाई की मांग, जांच पर टिकी निगाहें

शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी से मामले का संज्ञान लेकर संपत्ति को मुक्त कराने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन शिकायत पर क्या कदम उठाता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

उत्तर प्रदेश में एंटी भू-माफिया व्यवस्था के तहत अवैध कब्जों से जुड़ी शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। इस मामले में भी संबंधित दस्तावेजों और आरोपों की जांच के बाद कानून के अनुसार कदम उठाए जाने की जरूरत है।

यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। जीरो टॉलरेंस नीति की असली कसौटी यही है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और बुजुर्ग नागरिकों के संपत्ति संबंधी अधिकारों की रक्षा की जाए।