UP News: वाराणसी में यूपी एटीएस ने जाली नोट तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। सारनाथ क्षेत्र में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर एक लाख 97 हजार रुपये के जाली नोट जब्त किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद एटीएस ने नेपाल बॉर्डर से उत्तर प्रदेश तक फैले तस्करी सिंडिकेट की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
13 संदिग्धों की पहचान, नेपाल बॉर्डर से जुड़े तार
छानबीन में पता चला है कि मोहम्मद सुलेमान और इदरीश नामक आरोपी लंबे समय से जाली नोटों की तस्करी में सक्रिय थे। नेपाल बॉर्डर पर यह तस्करी खास तरीके से संचालित होती थी, जिसमें मनी एक्सचेंज व्यवसायियों का सहयोग लिया जाता था। विदेशी मुद्रा (डॉलर और पाउंड) के बदले जाली नोट चलाए जाते थे। जांच में सामने आया है कि नोटों की गड्डियों में 13-15 जाली नोट शामिल होते थे। एटीएस अब इन आरोपियों से जुड़े अन्य 13 संदिग्धों की पहचान कर रही है। इनकी गतिविधियां नेपाल बॉर्डर और उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैली हुई थीं।
महाकुंभ के दौरान जाली नोट फैलाने की योजना
छानबीन के दौरान यह भी सामने आया है कि दोनों आरोपियों की योजना प्रयागराज में आगामी महाकुंभ मेले के दौरान जाली नोटों को खपाने की थी। वे पश्चिम बंगाल के मालदा स्थित गिरोह के संपर्क में थे। बताया गया कि मालदा के जाकिर नामक व्यक्ति के इशारे पर यह योजना बनाई गई थी।
गिरफ्तारी और बरामदगी
- गिरफ्तार आरोपी: मोहम्मद सुलेमान अंसारी (बिहार के वैशाली जिले का निवासी) और इदरीश (फतेहाबाद का निवासी)।
- बरामदगी: 500 रुपये के एक लाख 97 हजार रुपये के जाली नोट।
- स्थान: वाराणसी का सारनाथ क्षेत्र।
एटीएस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले डेटा की जांच शुरू कर दी है। इसमें उनके अन्य संपर्कों और नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।
तस्करी का तरीका
सुलेमान और इदरीश जाली नोटों को नेपाल बॉर्डर से लेकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में खपाने के लिए मनी एक्सचेंज का इस्तेमाल करते थे। खासतौर पर विदेशियों को जाली नोट देने का यह उनका आम तरीका था।
एटीएस की अगली रणनीति
एटीएस ने स्पष्ट किया है कि यह नेटवर्क सिर्फ वाराणसी तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सक्रिय हो सकता है। नेपाल बॉर्डर पर तस्करों की गतिविधियों और पश्चिम बंगाल के गिरोह से उनके संबंधों को लेकर जांच तेज कर दी गई है।
अपराधियों का इतिहास
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सुलेमान वर्ष 2010 से जाली नोट तस्करी में लिप्त है। इससे पहले भी वह कई बार नेपाल बॉर्डर के जरिए नोटों की तस्करी कर चुका है। इदरीश भी इस काम में उसका सहयोगी रहा है।
बहरहाल, यूपी एटीएस की इस कार्रवाई से जाली नोट तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। यह घटना न केवल जाली नोटों के प्रवाह को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे आने वाले महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी।