Crime Petrol: उत्तर प्रदेश के हाथरस से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बर्खास्त सिपाही ने जेल जाने से बचने के लिए अपनी ही मौत की साजिश रच डाली। आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए एक बेघर भिखारी को जिंदा जला दिया और मौके पर अपने दस्तावेज छोड़ दिए, ताकि पुलिस उसे मृत मान ले।
गिरफ्तारी से बचने के लिए रची खतरनाक साजिश
पुलिस के अनुसार, मैनपुरी के बघौनी गांव निवासी रामवीर सिंह (55) पहले यूपी पुलिस में सिपाही था, लेकिन आपराधिक प्रवृत्ति के चलते 2013 में बर्खास्त कर दिया गया था। उसके खिलाफ हत्या समेत कुल 13 मुकदमे दर्ज हैं और वह लंबे समय से फरार चल रहा था। गिरफ्तारी और जेल से बचने के लिए उसने यह खौफनाक प्लान बनाया।
प्लेटफॉर्म पर सो रहे भिखारी को बनाया निशाना
12 मार्च की रात हाथरस रेलवे प्लेटफॉर्म सुनसान होने पर रामवीर ने अपनी कद-काठी के एक भिखारी को चुना, जिसका कोई पहचानने वाला नहीं था। उसने सो रहे भिखारी पर केरोसिन डालकर उसे जिंदा जला दिया।
आधार कार्ड और मोबाइल छोड़कर पुलिस को गुमराह किया
हत्या के बाद आरोपी ने अपना अधजला आधार कार्ड और मोबाइल फोन मौके पर छोड़ दिया, ताकि पुलिस लाश को उसी का समझे और मामला खत्म मान ले।
खुद भी बुरी तरह झुलसा, चोरी-छिपे कराता रहा इलाज
इस वारदात के दौरान रामवीर खुद भी आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गया। दो दिन तक वह मेडिकल स्टोर से दवा लेकर छिपकर इलाज करता रहा, लेकिन जब हालत बिगड़ी तो हाथरस जिला अस्पताल में भर्ती हो गया। वहां से 14 मार्च को उसे सैफई मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
भिखारी के गायब होने से पुलिस को हुआ शक
शुरुआत में पुलिस जली हुई लाश को रामवीर मानकर जांच कर रही थी, लेकिन रेलवे स्टेशन पर रहने वाला भिखारी अचानक गायब हो गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि वह कभी प्लेटफॉर्म छोड़कर नहीं जाता था, जिससे पुलिस का शक गहरा गया।
अस्पताल में असली नाम से भर्ती होना पड़ा भारी
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रामवीर सिंह नाम का एक व्यक्ति झुलसी हालत में जिला अस्पताल और फिर सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। आरोपी ने अस्पताल में अपना असली नाम और पता दर्ज कराया था, जिससे उसकी पहचान उजागर हो गई।
एक महीने तक निगरानी, डिस्चार्ज होते ही गिरफ्तारी
पुलिस ने सैफई मेडिकल कॉलेज में आरोपी पर नजर बनाए रखी। करीब एक महीने बाद जैसे ही उसे डिस्चार्ज किया गया, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया और हाथरस ले आई।
पूछताछ में कबूला जुर्म
जीआरपी इंस्पेक्टर सुयश सिंह के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि वह खुद को मृत दिखाकर कहीं और जाकर बसना चाहता था, ताकि पुलिस से बच सके।
तीन बड़ी वजहों से खुला राज
- गांव में पता चला कि रामवीर जिंदा है और अस्पताल में भर्ती है
- प्लेटफॉर्म का भिखारी भी लापता था
- अस्पताल में असली नाम से रजिस्ट्रेशन करवाना
कई जिलों में दर्ज हैं गंभीर मुकदमे
रामवीर सिंह के खिलाफ फिरोजाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, मैनपुरी, बदायूं और कानपुर देहात में हत्या और हत्या के प्रयास समेत 13 गंभीर मामले दर्ज हैं। उस पर गैंगस्टर एक्ट भी लग चुका है।
परिवार की हालत
रामवीर के परिवार में पत्नी और पांच बेटियां हैं। उसका इकलौता बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। परिवार मैनपुरी में रहता है।