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पीलीभीत दर्दनाक हादसा: बोलेरो की टक्कर से ट्रक चालक की मौत

“बस झुके थे टायर देखने… लेकिन पीछे से मौत ने धक्का मार दिया!”

पीलीभीत की सुबह एक चीख में बदल गई — सड़क पर मेहनतकश की जान ले गई बेलगाम रफ्तार

पीलीभीत दर्दनाक हादसा: रात के अंधेरे में… एक ज़िंदगी हमेशा के लिए बुझ गई

वो रात किसी आम ट्रक ड्राइवर की ड्यूटी थी, लेकिन सुबह होने से पहले ही एक पूरा परिवार अंधेरे में डूब गया।
शमशाद, मुडलिया गौसू गांव का रहने वाला वो शख्स, जो ट्रक चलाकर अपने घर में रोटी की रोशनी लाता था, आज खुद ज़िंदगी से कट गया।

“लखीमपुर के लिए निकला था, लेकिन किस्मत ने मोड़ दिया रस्ता मौत की ओर”

घटना पीलीभीत के कजरी गांव के पास की है, जहां मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे, शमशाद मोरिंग लदे ट्रक के टायर चेक करने के लिए ढाबे के पास रुके थे। उनके साथ हेल्पर शाहेद भी था।

लेकिन किसे पता था कि जिस झुकाव से टायर को देखा जा रहा था, वही झुकाव इस मेहनतकश की अंतिम सांस बन जाएगा।

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पीलीभीत दर्दनाक हादसा: पीछे से आई मौत — एक बोलेरो ने छीन ली ज़िंदगी

हेल्पर शाहेद के मुताबिक, शमशाद अभी टायर की जांच कर ही रहे थे कि खुटार की ओर से आई तेज़ रफ्तार बोलेरो ने पीछे से उन्हें इतनी जबरदस्त टक्कर मारी कि वो सड़क से उछलकर गिर पड़े।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि शमशाद के शरीर में कोई हरकत बाकी नहीं रही।

पुलिस आई, अस्पताल पहुंचाया… लेकिन मौत पहले ही फैसला कर चुकी थी

डायल 112 की पुलिस तत्परता से मौके पर पहुंची और घायल को अस्पताल पहुंचाया गया।
लेकिन डॉक्टरों ने देखते ही कह दिया –

“अब कुछ नहीं किया जा सकता, मरीज की मौत पहले ही हो चुकी है।”

शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
सेहरामऊ उत्तरी थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि बोलेरो चालक फरार है और उसकी तलाश की जा रही है।

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सबसे करुण दृश्य तब देखने को मिला जब शमशाद की मौत की खबर उसके घर पहुंची।

7 साल की बेटी अपने पिता की तस्वीरों से लिपटकर रो रही थी।

पत्नी की आंखें तो भीगी थीं, लेकिन उसके भीतर एक खामोश तूफान था।

पूरा गांव गमगीन है, और हर कोई यही कह रहा है —

“शमशाद गया नहीं है, उसे सिस्टम ने मारा है।”

स्थानीय लोगों का फूटा ग़ुस्सा — ये हादसा नहीं, सरकारी लापरवाही की सजा है

ग्रामीणों ने बताया कि ढाबे के आसपास अक्सर ट्रक रुकते हैं,
लेकिन न सड़क चौड़ी है, न रोशनी है, और न ही कोई चेतावनी बोर्ड या स्पीड ब्रेकर।

“जहां हर रात ट्रक रुकते हैं, वहां एक स्ट्रीट लाइट तक नहीं है। जब तक कोई VIP नहीं मरेगा, तब तक ये सिस्टम जागेगा नहीं!”

जनजागरूकता की सबसे बड़ी ज़रूरत — सड़क किनारे की सुरक्षा कब होगी?

यह हादसा एक और सवाल छोड़ गया है —

“जो लोग हमारी ज़िंदगी चलाते हैं… उनके लिए सुरक्षा क्यों नहीं?”

ट्रक ड्राइवरों के लिए रिफ्लेक्टर जैकेट अनिवार्य क्यों नहीं?

ढाबों के पास ट्रक स्टॉप की सुरक्षा गाइडलाइन कहां है?

रात्रि चेकिंग और स्पीड मॉनिटरिंग आखिर किसके लिए बनी है?

जब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिलेगा, हर दूसरा शमशाद इसी तरह चुपचाप खत्म होता रहेगा।

पीलीभीत दर्दनाक हादसा: एक अपील — इस खबर को शेयर करें, ताकि अगली मौत को रोका जा सके

शमशाद अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी मौत को सिर्फ खबर न बनने दें।
इसे आवाज़ बनाएं, सवाल बनाएं, और सिस्टम को ज़िम्मेदारी की याद दिलाएं।

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